{"_id":"74962","slug":"Fatehpur-74962-36","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब नए सिरे से जिंदगी संवारने की जद्दोजहद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नए सिरे से जिंदगी संवारने की जद्दोजहद
Fatehpur
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
गाजीपुर (फतेहपुर)। फतेनगर करसूमा गांव में सोमवार को लगी भीषण आग से तबाह हो चुके परिवाराें ने नए सिरे से जिंदगी संवारने की जद्दोजहद शुरू कर दी है। बिना आर्थिक सहायता के दाना-पानी के इंतजाम में अग्निकांड पीडि़त खुद जुट गए हैं। पड़ोसी गांव वालों ने भोजन बनवाकर भेजा तो एक-एक निवाले के लिए पीडि़त टूट पड़े। आग से सब कुछ तबाह होने से सिर छिपाने के लिए भी जगह नहीं बची। मंगलवार को किसी ने पड़ोसी के घर में शरण ली तो कोई चारपाई के नीचे राहत के पल तलाशता नजर आया। सुबह पीडि़तों ने सहायता न मिलने पर फतेहपुर-गाजीपुर मार्ग पर जाम लगाया हालांकि जाम कुछ मिनटों तक ही चला। एसओ और सीओ ग्रामीणों को समझाकर गांव ले गए। हालांकि एसडीएम सदर एसपी राय ने ग्रामीणों के जाम लगाने की सूचना से इनकार किया है।
चिलचिलाती धूप में न सिर छिपाने के लिए छत और न खाने के लिए अन्न और न तन ढ़कने को कपड़े। भूख से रोते बच्चे और गृहस्थी की तबाही देखकर बिलखती महिलाएं, यह नजारा है तकरीबन 3500 की आबादी वाले कोरसम गांव का। यहां आग ने सबकुछ खत् कर दिया। लोग एकबार फिर मसे घर-बार बसाने की कोशिश में लग गए। सरकारी सहायता के चेक को छोड़कर किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय में भोजन व्यवस्था के नाम पर आंशिक मदद की गई। ग्राम प्रधान ने भोजन की व्यवस्था की। पड़ोसी गांव मलाका से भी पूड़ी-सब्जी बनवाकर भेजी गई। अगिभनकांड के दूसरे दिन भी राख हो चुकी गृहस्थी के ढेरों से धुआं उठता रहा। जिनके घर पूरी तरह जल गए थे वे चिलचिलाती धूप से बचने के लिए या पड़ोसी के दरवाजे डेरा डालकर बैठ गए या फिर चारपाई के नीचे। लोगों के घराें में रखी खाद्य सामग्री से लेकर आभूषण और नगदी तथा अन्य एक-एक सामग्री जलकर राख हो गई। गांव के बिहारी लाल ने बताया वह बेरोजगार है। कुछ दिन पहले ही किसी तरह गृहस्थी बनाई थी, लेकिन कुछ नहीं बचा। इसी प्रकार पवन और छन्नू की भी गृहस्थी तबाह हो गई। गांव के प्राइमरी पाठशाला में प्रशासन ने भोजन बंटवाया ।
विज्ञापन
चिलचिलाती धूप में न सिर छिपाने के लिए छत और न खाने के लिए अन्न और न तन ढ़कने को कपड़े। भूख से रोते बच्चे और गृहस्थी की तबाही देखकर बिलखती महिलाएं, यह नजारा है तकरीबन 3500 की आबादी वाले कोरसम गांव का। यहां आग ने सबकुछ खत् कर दिया। लोग एकबार फिर मसे घर-बार बसाने की कोशिश में लग गए। सरकारी सहायता के चेक को छोड़कर किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय में भोजन व्यवस्था के नाम पर आंशिक मदद की गई। ग्राम प्रधान ने भोजन की व्यवस्था की। पड़ोसी गांव मलाका से भी पूड़ी-सब्जी बनवाकर भेजी गई। अगिभनकांड के दूसरे दिन भी राख हो चुकी गृहस्थी के ढेरों से धुआं उठता रहा। जिनके घर पूरी तरह जल गए थे वे चिलचिलाती धूप से बचने के लिए या पड़ोसी के दरवाजे डेरा डालकर बैठ गए या फिर चारपाई के नीचे। लोगों के घराें में रखी खाद्य सामग्री से लेकर आभूषण और नगदी तथा अन्य एक-एक सामग्री जलकर राख हो गई। गांव के बिहारी लाल ने बताया वह बेरोजगार है। कुछ दिन पहले ही किसी तरह गृहस्थी बनाई थी, लेकिन कुछ नहीं बचा। इसी प्रकार पवन और छन्नू की भी गृहस्थी तबाह हो गई। गांव के प्राइमरी पाठशाला में प्रशासन ने भोजन बंटवाया ।
विज्ञापन