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दुकानदारों का धंधा हो रहा है चौपट
Fatehpur
Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। पचास नंबर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में बालू के बजाय राखी के इस्तेमाल ने आसपास के बाशिदों
का जीना मुहाल कर रखा है। दिन में हवा चलने से राख के उड़ने से क्षेत्रीय नागरिकों से शुद्ध खाना, पानी भी छिन गया है। लोगों को आंखों की बीमारी से भी जूझना पड़ रहा है। समस्या से परेशान क्षेत्रीय नागरिकों ने विभागीय अधिकारियों से समस्या का निदान करने की पुरजोर मांग की है।
केमिस्ट बीरेंद्र कुमार गुप्ता का कहना है ओवर ब्रिज के निर्माण में राखी की अनलोडिंग और लगे ढेरों के बिछाने का काम शुरू होने से जीवन रक्षक दवाओं की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। राखी शीशे के केबिन में प्रवेश करके कीमती दवा, इंजेक्शन और सिरप में पहुंच जाती है। इससे दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। किराना व्यवसाई हरिशचंद्र गुप्ता का कहना है दुकान के भीतर रखी चीनी, मैदा, आटा आदि सामान तो लोगों ने खरीदना बंद कर दिया है। सड़क पर लगे ढेरों से राखी उड़कर दुकान में रखी चीनी और मैदा के बोरों में मिल गई है। इससे जो भी ग्राहक सामान खरीद कर ले जाता है उसे खाते ही लौटा जाता है। जनरल स्टोर संचालक अरविंद कुमार का कहना है सुबह के शाम तक का समय दुकान की सफाई करते बीत रहा है। बिना चश्मा लगाए दुकान में बैठना जानबूझकर आखों में तकलीफ को आमंत्रण देना है। अंडा व्यवसाई तसव्वर राज का कहना है कि ओवर ब्रिज के पास फैली राखी ने जीना दूभर कर दिया है। व्यवसाय पूरी तरह खतम हो गया है। साथ ही आंख की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। पटरी के दुकानदार अगर बिना चश्मा लगाए गलती से दुकान में बैठ जाते हैं, तो शाम तक उन्हें आख के डाक्टर के पास जाना पड़ता है।
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का जीना मुहाल कर रखा है। दिन में हवा चलने से राख के उड़ने से क्षेत्रीय नागरिकों से शुद्ध खाना, पानी भी छिन गया है। लोगों को आंखों की बीमारी से भी जूझना पड़ रहा है। समस्या से परेशान क्षेत्रीय नागरिकों ने विभागीय अधिकारियों से समस्या का निदान करने की पुरजोर मांग की है।
केमिस्ट बीरेंद्र कुमार गुप्ता का कहना है ओवर ब्रिज के निर्माण में राखी की अनलोडिंग और लगे ढेरों के बिछाने का काम शुरू होने से जीवन रक्षक दवाओं की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। राखी शीशे के केबिन में प्रवेश करके कीमती दवा, इंजेक्शन और सिरप में पहुंच जाती है। इससे दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। किराना व्यवसाई हरिशचंद्र गुप्ता का कहना है दुकान के भीतर रखी चीनी, मैदा, आटा आदि सामान तो लोगों ने खरीदना बंद कर दिया है। सड़क पर लगे ढेरों से राखी उड़कर दुकान में रखी चीनी और मैदा के बोरों में मिल गई है। इससे जो भी ग्राहक सामान खरीद कर ले जाता है उसे खाते ही लौटा जाता है। जनरल स्टोर संचालक अरविंद कुमार का कहना है सुबह के शाम तक का समय दुकान की सफाई करते बीत रहा है। बिना चश्मा लगाए दुकान में बैठना जानबूझकर आखों में तकलीफ को आमंत्रण देना है। अंडा व्यवसाई तसव्वर राज का कहना है कि ओवर ब्रिज के पास फैली राखी ने जीना दूभर कर दिया है। व्यवसाय पूरी तरह खतम हो गया है। साथ ही आंख की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। पटरी के दुकानदार अगर बिना चश्मा लगाए गलती से दुकान में बैठ जाते हैं, तो शाम तक उन्हें आख के डाक्टर के पास जाना पड़ता है।
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