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मानो पहाड़ सा भरभराकर ढहा, बंद हो गई आंखें
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फतेहपुर। कुछ पल के लिए लगा मानो पहाड़ सी कोई चीज भरभराकर ढह गई और आंखें बंद हो गईं। होश आने पर खुद को अस्पताल के बेड पर पाया। जिला अस्पताल में भर्ती दो सहपाठी छात्रों ने ट्रक ओर और रोडवेज बस दुर्घटना के समय का दृश्य कुछ ऐसे बयां किया। जबकि एक मजदूर का कहना है कि उसे लगा कि मौत करीब आ गई। उन पलों की याद कर उसके आंखें नम हो जाती हैं।
हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरैला निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी का बेटा धीरज द्विवेदी और मकदूमपुर निवासी गंगा विशुन का बेटा संजीव कुमार कानपुर में किराए में कमरा लेकर नौकरी की तैयारी के लिए कोचिंग पढ़ते हैं। दोनों सहपाठी त्योहार मनाने के लिए रविवार को रोडवेज बस में कानपुर से बैठे थे। बस जैसे ही मौहार गांव के समीप
पहुंची, तो कानपुर की तरफ जा रहे ट्रक का अगला दाहिना टायर फटा और वह इनकी दूसरी लेन से आ रही बस से भिड़ गई। दोनों सहपाठी छात्रों के चेहरे में अभी तक हादसे की दहशत दिखी। छात्रों ने बताया कि दुर्घटना के समय कुछ भी सोचने समझने का मौका नहीं मिला। इसी तरह अस्पताल में भर्ती हथगाम थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर
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गांव निवासी रज्जन का बेटा विकास सोनी कानपुर में मेहनत मजदूरी करता है। वह त्योहार मनाने गांव आ रहा था। विकास ने बताया कि वह बीच में बैठा था। बहुत तेज धमाका हुआ और बस ऐसे पलटी की उसे कुछ सूूझा ही नहीं। डर के मारे आंख बंद हो गई। बस के अंदर जब थोड़ा होश आया, तो उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगा।
अगल-बगल कुछ लोग दबे कराह रहे थे तो कुछ मर चुके थे। बचाव में जुटे ग्रामीण की आवाज भी उसे समझ नहीं आ रही थी। खून से लथपथ सवारियां दिखने पर वह फिर बेहोश हो गया था। इसके बाद अस्पताल कब लाया गया, उसे याद नहीं है। देर शाम होश आने पर अस्पताल में ग्लूकोज की बोतल चढ़ रही थी। यहां पर हाथ पैर हिलाया, तो चोट का दर्द होने पर लगा कि शायद ईश्वर ने जान बचा ली है।
फोटो एवं परिचय:-
20- हाईवे किनारे पड़ी दुर्घटनाग्रस्त बस।
21- हाईवे पर बिखरे पड़े कांच के टुकड़े
मानो पहाड़ सा भरभराकर ढहा, बंद हो गई आंखें
बस यात्रियों ने मौत का करीब से किया अहसास
अमर उजाला ब्यूरो
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हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरैला निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी का बेटा धीरज द्विवेदी और मकदूमपुर निवासी गंगा विशुन का बेटा संजीव कुमार कानपुर में किराए में कमरा लेकर नौकरी की तैयारी के लिए कोचिंग पढ़ते हैं। दोनों सहपाठी त्योहार मनाने के लिए रविवार को रोडवेज बस में कानपुर से बैठे थे। बस जैसे ही मौहार गांव के समीप
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पहुंची, तो कानपुर की तरफ जा रहे ट्रक का अगला दाहिना टायर फटा और वह इनकी दूसरी लेन से आ रही बस से भिड़ गई। दोनों सहपाठी छात्रों के चेहरे में अभी तक हादसे की दहशत दिखी। छात्रों ने बताया कि दुर्घटना के समय कुछ भी सोचने समझने का मौका नहीं मिला। इसी तरह अस्पताल में भर्ती हथगाम थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर
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गांव निवासी रज्जन का बेटा विकास सोनी कानपुर में मेहनत मजदूरी करता है। वह त्योहार मनाने गांव आ रहा था। विकास ने बताया कि वह बीच में बैठा था। बहुत तेज धमाका हुआ और बस ऐसे पलटी की उसे कुछ सूूझा ही नहीं। डर के मारे आंख बंद हो गई। बस के अंदर जब थोड़ा होश आया, तो उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगा।
अगल-बगल कुछ लोग दबे कराह रहे थे तो कुछ मर चुके थे। बचाव में जुटे ग्रामीण की आवाज भी उसे समझ नहीं आ रही थी। खून से लथपथ सवारियां दिखने पर वह फिर बेहोश हो गया था। इसके बाद अस्पताल कब लाया गया, उसे याद नहीं है। देर शाम होश आने पर अस्पताल में ग्लूकोज की बोतल चढ़ रही थी। यहां पर हाथ पैर हिलाया, तो चोट का दर्द होने पर लगा कि शायद ईश्वर ने जान बचा ली है।
फोटो एवं परिचय:-
20- हाईवे किनारे पड़ी दुर्घटनाग्रस्त बस।
21- हाईवे पर बिखरे पड़े कांच के टुकड़े
मानो पहाड़ सा भरभराकर ढहा, बंद हो गई आंखें
बस यात्रियों ने मौत का करीब से किया अहसास
अमर उजाला ब्यूरो