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नहीं बने शौचालय, लाभार्थी भी बाहर करते शौच
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:43 AM IST
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साल भर में खुद पाये सिर्फ गड्ढे
शौचालय न बनने से लाभार्थी खुले में शौच को अभिशप्त
स्वच्छ भारत मिशन की नगर में की जा रही है अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो
खागा।
नगर में स्वच्छ भारत मिशन की अनदेखी की जा रही है। लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए 885 शौचालय बनाए जाने थे। लाभार्थियों का चयन हुए साल भर हो गए, लेकिन अभी तक सिर्फ गड्ढे ही खुद पाए हैं। इसका मुख्य कारण दूसरी किस्त न आना है।
करीब साल भर पहले स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शासन से शौचालय निर्माण के लिए 885 लाभार्थियों का चयन किया गया था। हर लाभार्थी को आठ हजार रुपये दो किस्तों में मिलने थे। इसकी 50 फीसदी रकम लाभार्थी को मिल गई है। योजना को लागू करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत को सौंपी गई थी। ईओ श्रीचंद्र का कहना है कि अभी तक शासन से केवल पहली किस्त आई है। उन्होंने बताया कि 2733 लोगों ने आवेदन किया था। जांच के बाद 1282 लोग पात्र पाए गए हैं। इनमे 885 लाभार्थियों को पहली किस्त दी जा चुकी है। उधर, लाभार्थी राजेंद्र, छिटानी, कुंवरिया, कलावती, कृष्णा और फूलकली ने बताया कि चार हजार रुपये में गड्ढे से ज्यादा कार्य नहीं कराया जा सका। अब दूसरी किस्त मिले तो आगे का काम हो। अब तो खोदे गए गड्ढे ही परेशान का सबब बन गए हैं। गंदा पानी भर जाता है, लोग गंदगी भी फेंक जाते हैं।
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शौचालय न बनने से लाभार्थी खुले में शौच को अभिशप्त
स्वच्छ भारत मिशन की नगर में की जा रही है अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो
खागा।
नगर में स्वच्छ भारत मिशन की अनदेखी की जा रही है। लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए 885 शौचालय बनाए जाने थे। लाभार्थियों का चयन हुए साल भर हो गए, लेकिन अभी तक सिर्फ गड्ढे ही खुद पाए हैं। इसका मुख्य कारण दूसरी किस्त न आना है।
करीब साल भर पहले स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शासन से शौचालय निर्माण के लिए 885 लाभार्थियों का चयन किया गया था। हर लाभार्थी को आठ हजार रुपये दो किस्तों में मिलने थे। इसकी 50 फीसदी रकम लाभार्थी को मिल गई है। योजना को लागू करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत को सौंपी गई थी। ईओ श्रीचंद्र का कहना है कि अभी तक शासन से केवल पहली किस्त आई है। उन्होंने बताया कि 2733 लोगों ने आवेदन किया था। जांच के बाद 1282 लोग पात्र पाए गए हैं। इनमे 885 लाभार्थियों को पहली किस्त दी जा चुकी है। उधर, लाभार्थी राजेंद्र, छिटानी, कुंवरिया, कलावती, कृष्णा और फूलकली ने बताया कि चार हजार रुपये में गड्ढे से ज्यादा कार्य नहीं कराया जा सका। अब दूसरी किस्त मिले तो आगे का काम हो। अब तो खोदे गए गड्ढे ही परेशान का सबब बन गए हैं। गंदा पानी भर जाता है, लोग गंदगी भी फेंक जाते हैं।
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