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आपरेटरों की कमी से नलकूप संचालन बेपटरी
Updated Tue, 13 Feb 2018 11:00 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर।
आपरेटरों की कमी से राजकीय नलकूपों का संचालन बेपटरी हो गया है। एक आपरेटर के पास दो से तीन नलकूप का चार्ज है। बिजली आपूर्ति होने पर सभी नलकूपों को एक साथ चलाना आपरेटरों के लिए मुश्किल है। कई नलकूपों का संचालन किसान खुद कर रहे हैं। इससे गांव के ही दूसरे किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है।
सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिले में 579 राजकीय नलकूप संचालित हैं। इसके लिए 280 आपरेटर हैं। हर साल सेवानिवृत्त होने से इनकी संख्या कम होती जा रही है। शासन स्तर से नलकूप खंड के आपरेटरों की भर्ती नहीं हुई है। 50 फीसदी नलकूप आपरेटर कम होने से संचालन बेपटरी हो गया है। एक आपरेटर के पास दो से तीन नलकूप की जिम्मेदारी है। ग्रामीण क्षेत्र का बिजली रोस्टर एक होने से एक ही समय नलकूप को चलाना होता है। ऐसे में यह आपरेटर चहेते किसानों को चाभी दे देते हैं। यह किसान अपने और अपने चहेतों को प्राथमिकता देकर सिंचाई का लाभ लेते हैं।
चंदापुर गांव के किसान सत्यप्रकाश ने बताया कि नलकूप में तैनात आपरेटर आता ही नहीं है। गांव के ही एक-दो किसानों के पास नलकूप की चाभी रहती है। वह अपने फसलों की सिंचाई करते हैं। दूसरे के खेत में पानी नहीं लगाते हैं।
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रारी गांव के किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव के नलकूप को चलाने आपरेटर नहीं आता है। जिन किसानों के खेत नलकूप के पास हैं। वही चाभी लिए रहते हैं और अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। अब हालत ऐसी हो गई है कि राजकीय नलकूप एक ही किसान का बन कर रह गया है। दूसरे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पाते हैं।
अधिशासी अभियंता कांशीराम आर्य ने बताया कि शासन से नलकूप आपरेटरों की भर्ती न होने से इनकी संख्या में कमी हो गई है। नजदीक के जो नलकूप हैं, उनका चार्ज एक ही आपरेटर को दिया गया है। इसी हिसाब से संचालन कराया जा रहा है। जब तक आपरेटरों की भर्ती नहीं होगी, समस्या बनी रहेगी।
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फतेहपुर।
आपरेटरों की कमी से राजकीय नलकूपों का संचालन बेपटरी हो गया है। एक आपरेटर के पास दो से तीन नलकूप का चार्ज है। बिजली आपूर्ति होने पर सभी नलकूपों को एक साथ चलाना आपरेटरों के लिए मुश्किल है। कई नलकूपों का संचालन किसान खुद कर रहे हैं। इससे गांव के ही दूसरे किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है।
सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिले में 579 राजकीय नलकूप संचालित हैं। इसके लिए 280 आपरेटर हैं। हर साल सेवानिवृत्त होने से इनकी संख्या कम होती जा रही है। शासन स्तर से नलकूप खंड के आपरेटरों की भर्ती नहीं हुई है। 50 फीसदी नलकूप आपरेटर कम होने से संचालन बेपटरी हो गया है। एक आपरेटर के पास दो से तीन नलकूप की जिम्मेदारी है। ग्रामीण क्षेत्र का बिजली रोस्टर एक होने से एक ही समय नलकूप को चलाना होता है। ऐसे में यह आपरेटर चहेते किसानों को चाभी दे देते हैं। यह किसान अपने और अपने चहेतों को प्राथमिकता देकर सिंचाई का लाभ लेते हैं।
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चंदापुर गांव के किसान सत्यप्रकाश ने बताया कि नलकूप में तैनात आपरेटर आता ही नहीं है। गांव के ही एक-दो किसानों के पास नलकूप की चाभी रहती है। वह अपने फसलों की सिंचाई करते हैं। दूसरे के खेत में पानी नहीं लगाते हैं।
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रारी गांव के किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव के नलकूप को चलाने आपरेटर नहीं आता है। जिन किसानों के खेत नलकूप के पास हैं। वही चाभी लिए रहते हैं और अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। अब हालत ऐसी हो गई है कि राजकीय नलकूप एक ही किसान का बन कर रह गया है। दूसरे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पाते हैं।
अधिशासी अभियंता कांशीराम आर्य ने बताया कि शासन से नलकूप आपरेटरों की भर्ती न होने से इनकी संख्या में कमी हो गई है। नजदीक के जो नलकूप हैं, उनका चार्ज एक ही आपरेटर को दिया गया है। इसी हिसाब से संचालन कराया जा रहा है। जब तक आपरेटरों की भर्ती नहीं होगी, समस्या बनी रहेगी।