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टीबी अस्पताल की एक्सरे मशीन बेमतलब
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फतेहपुर। एक ओर सरकार देश को टीबी रोग से मुक्त करना चाहती है, वहीं जिले में राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम में अव्यवस्था हावी है। टीबी हास्पिटल में एक्सरे मशीन होने के बाद भी गरीबों को बाहर से एक्सरे कराना पड़ता है। दूरदराज से आने वाले मरीजों को जांच के नाम पर तीन से पांच सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
टीबी की रोकथाम करने और मरीजों को चिह्नित कर उनकी मानीटरिंग व इलाज करने के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है। अभी करीब चार महीने पहले टीबी हास्पिटल में करीब 25 लाख कीमत की नई एक्सरे मशीन लगाई गई है जिससे आने वाले मरीजों को नि:शुल्क जांच हो सके।
आलम यह है कि टीबी हास्पिटल में प्रतिदिन 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। इनमें पांच से आठ मरीजों के एक्सरे होते हैं। मरीजों का आरोप है कि एक्सरे बाहर से कराना पड़ता है। यहां पर नियमित ओपीडी भी नहीं होती है, जिससे इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
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जहानाबाद की कमरजहां ने बताया वह पांच महीने से बीमार हैं। यहां इलाज कराने आए तो डाक्टर ने बाहर से एक्सरे कराने को कहा। जब अस्पताल से ही एक्सरे कराने को कहा तो बोले कि यहां रिपोर्ट साफ नहीं आती है। इसलिए बाहर से कराओ। प्राइवेट में तीन सौ रुपये का एक्सरे कराया है।
महाखेड़ा के रमेश का कहना है कि कई दिनों से खांसी से पीड़ित हैं। टीबी की आशंका होने पर हास्पिटल आए तो यहां पर बलगम की जांच कराई गई। इसके बाद डाक्टर से बाहर से एक्सरे कराने के लिए कहा। प्राइवेट एक्सरे कराने पर तीन सौ रुपये लगे हैं। जबकि अस्पताल में मशीन है।
मोहम्मदपुर गौंती के इदरीश का कहना है कि टीबी अस्पताल में इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया जाता है। कमीशन के चक्कर में बाहर से मरीजों के प्राइवेट एक्सरे कराए जाते हैं। इसके बदले में प्राइवेट पैथोलॉजी वाले डाक्टरों को कमीशन देते हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं है।
सनगांव की अनीता देवी का कहना है सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार अस्पतालों में संसाधन तो उपलब्ध करा रही है लेकिन इसका शत प्रतिशत लाभ रोगियों को नहीं मिल रहा है। डाक्टर ने प्राइवेट एक्सरे कराकर रिपोर्ट दिखाने के लिए कहा है।
जिम्मेदारों ने कहा
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एके अग्रवाल का कहना है कि हास्पिटल में एक डाक्टर की कमी है, सीएमओ से मांग की गई है। जिससे सुचारु रूप से ओपीडी चल सके। प्राइवेट एक्सरे कराए जाने की जानकारी नहीं है। मरीजों के एक्सरे हास्पिटल में ही कराए जाते हैं। टीबी की रोकथाम को लेकर जिन मरीजों का इलाज चलता है, उनको प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। उपचार का हर महीना पूरा होने पर 250 रुपये और कोर्स पूरा होने पर 500 रुपये दिया जाता है। टीबी के मरीजों को नि:शुल्क दवाएं और परीक्षण का प्रावधान है।
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सीएमओ डा. उमाकांत पांडेय ने बताया कि टीबी हास्पिटल में बलगम की जांच के लिए मशीन लगी हुई है। इसी प्रकार एक्सरे के लिए दो मशीनें हैं। डाक्टर को बाहर से जांच न कराने के सख्त हिदायत हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी से इस मामले में जानकारी ली जाएगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
टीबी अस्पताल में रोगियों को बाहर से कराना पड़ रहा एक्सरे, जेबें हो रहीं ढीली
राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम की खुली पोल, सीएमओ से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
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टीबी की रोकथाम करने और मरीजों को चिह्नित कर उनकी मानीटरिंग व इलाज करने के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है। अभी करीब चार महीने पहले टीबी हास्पिटल में करीब 25 लाख कीमत की नई एक्सरे मशीन लगाई गई है जिससे आने वाले मरीजों को नि:शुल्क जांच हो सके।
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आलम यह है कि टीबी हास्पिटल में प्रतिदिन 25 से 30 मरीज आ रहे हैं। इनमें पांच से आठ मरीजों के एक्सरे होते हैं। मरीजों का आरोप है कि एक्सरे बाहर से कराना पड़ता है। यहां पर नियमित ओपीडी भी नहीं होती है, जिससे इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
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जहानाबाद की कमरजहां ने बताया वह पांच महीने से बीमार हैं। यहां इलाज कराने आए तो डाक्टर ने बाहर से एक्सरे कराने को कहा। जब अस्पताल से ही एक्सरे कराने को कहा तो बोले कि यहां रिपोर्ट साफ नहीं आती है। इसलिए बाहर से कराओ। प्राइवेट में तीन सौ रुपये का एक्सरे कराया है।
महाखेड़ा के रमेश का कहना है कि कई दिनों से खांसी से पीड़ित हैं। टीबी की आशंका होने पर हास्पिटल आए तो यहां पर बलगम की जांच कराई गई। इसके बाद डाक्टर से बाहर से एक्सरे कराने के लिए कहा। प्राइवेट एक्सरे कराने पर तीन सौ रुपये लगे हैं। जबकि अस्पताल में मशीन है।
मोहम्मदपुर गौंती के इदरीश का कहना है कि टीबी अस्पताल में इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया जाता है। कमीशन के चक्कर में बाहर से मरीजों के प्राइवेट एक्सरे कराए जाते हैं। इसके बदले में प्राइवेट पैथोलॉजी वाले डाक्टरों को कमीशन देते हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं है।
सनगांव की अनीता देवी का कहना है सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार अस्पतालों में संसाधन तो उपलब्ध करा रही है लेकिन इसका शत प्रतिशत लाभ रोगियों को नहीं मिल रहा है। डाक्टर ने प्राइवेट एक्सरे कराकर रिपोर्ट दिखाने के लिए कहा है।
जिम्मेदारों ने कहा
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एके अग्रवाल का कहना है कि हास्पिटल में एक डाक्टर की कमी है, सीएमओ से मांग की गई है। जिससे सुचारु रूप से ओपीडी चल सके। प्राइवेट एक्सरे कराए जाने की जानकारी नहीं है। मरीजों के एक्सरे हास्पिटल में ही कराए जाते हैं। टीबी की रोकथाम को लेकर जिन मरीजों का इलाज चलता है, उनको प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। उपचार का हर महीना पूरा होने पर 250 रुपये और कोर्स पूरा होने पर 500 रुपये दिया जाता है। टीबी के मरीजों को नि:शुल्क दवाएं और परीक्षण का प्रावधान है।
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सीएमओ डा. उमाकांत पांडेय ने बताया कि टीबी हास्पिटल में बलगम की जांच के लिए मशीन लगी हुई है। इसी प्रकार एक्सरे के लिए दो मशीनें हैं। डाक्टर को बाहर से जांच न कराने के सख्त हिदायत हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी से इस मामले में जानकारी ली जाएगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
टीबी अस्पताल में रोगियों को बाहर से कराना पड़ रहा एक्सरे, जेबें हो रहीं ढीली
राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम की खुली पोल, सीएमओ से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो