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Farrukhabad News: 12 साल से प्यासी बूढ़ी गंगा में आया पानी, किसानों के चेहरे खिले
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संवाद न्यूज एजेंसी
कायमगंज। 12 साल से प्यासी बूढ़ी गंगा की प्यास बुझाने गंगा उनसे मिलने पहुंच गई। इससे त्रासदी से आहत आसपास के गांव के किसानों के चेहरे खिल उठे। अस्तित्व खोती जा रही बूढ़ी गंगा को संजीवनी मिलने से किसानों को भी आस जगी है कि उन्हें भी आने वाले समय में इससे खेती में लाभ मिलेगा।
कंपिल के रामेश्वर नाथ मंदिर से करीब 1 किमी दूर इकलहरा मार्ग पर एक समय में बूढ़ी गंगा में भी पानी का बहाव रहता था। वर्षो पहले बूढ़ी गंगा में पानी आना ही बंद हो गया। वर्ष 2011 में बाढ़ त्रासदी के दौरान रामेश्वरनाथ मंदिर तक पानी आ गया था। कुछ समय बूढ़ी गंगा में पानी चलता रहा। धीरे-धीरे बूढ़ी गंगा सूखती चली गई। जानकारों के मुताबिक यह 12 साल से यह सूखी पड़ी है। गंगा नदी बूढ़ी गंगा से दूर क्या हुई किसानों ने इसे अपने खेतों में मिला लिया। तो कहीं रास्ता बना लिया।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण तेज हुई धार ने हिलोरे लिए तो बूढ़ी गंगा को संजीवनी मिल गई। वह भी उफनाकर बहने लगी। गंगा के उफान से बूढ़ी गंगा के आसपास के गांव पथरामई, मधवापुर, गढ़ी, दूदेमई, बौरा, बिहारीपुर, गंगपुर, शेखपुर, शाहपुर, इकलहरा आदि के आसपास भी पानी भर गया। लोगों का मानना है कि गंगा के जलस्तर ने और फैलाव लिया, तो उम्मीद है कि बूढ़ी गंगा को जीवन दान मिल जाए। ग्रामीणों को गंगा से आई बाढ़ के कारण परेशानी है, वहीं गंगा का मिलन बूढ़ी गंगा से होने से चेहरे पर हल्की मुस्कान भी है।
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गांव इकलहरा निवासी किसान राजेश्वर, भूरे ने बताया कि बूढ़ी गंगा अस्तित्व खोती जा रही थी। अब इसका मिलन गंगा से हुआ है। उम्मीद है गंगा की धारा इस नदी को नया जीवन दान दे दे। इससे किसानों को काफी लाभ होगा। ग्रामीणों की माने तो इसी नदी के पानी से किसान फसल की सिंचाई करते थे।
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कायमगंज। 12 साल से प्यासी बूढ़ी गंगा की प्यास बुझाने गंगा उनसे मिलने पहुंच गई। इससे त्रासदी से आहत आसपास के गांव के किसानों के चेहरे खिल उठे। अस्तित्व खोती जा रही बूढ़ी गंगा को संजीवनी मिलने से किसानों को भी आस जगी है कि उन्हें भी आने वाले समय में इससे खेती में लाभ मिलेगा।
कंपिल के रामेश्वर नाथ मंदिर से करीब 1 किमी दूर इकलहरा मार्ग पर एक समय में बूढ़ी गंगा में भी पानी का बहाव रहता था। वर्षो पहले बूढ़ी गंगा में पानी आना ही बंद हो गया। वर्ष 2011 में बाढ़ त्रासदी के दौरान रामेश्वरनाथ मंदिर तक पानी आ गया था। कुछ समय बूढ़ी गंगा में पानी चलता रहा। धीरे-धीरे बूढ़ी गंगा सूखती चली गई। जानकारों के मुताबिक यह 12 साल से यह सूखी पड़ी है। गंगा नदी बूढ़ी गंगा से दूर क्या हुई किसानों ने इसे अपने खेतों में मिला लिया। तो कहीं रास्ता बना लिया।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण तेज हुई धार ने हिलोरे लिए तो बूढ़ी गंगा को संजीवनी मिल गई। वह भी उफनाकर बहने लगी। गंगा के उफान से बूढ़ी गंगा के आसपास के गांव पथरामई, मधवापुर, गढ़ी, दूदेमई, बौरा, बिहारीपुर, गंगपुर, शेखपुर, शाहपुर, इकलहरा आदि के आसपास भी पानी भर गया। लोगों का मानना है कि गंगा के जलस्तर ने और फैलाव लिया, तो उम्मीद है कि बूढ़ी गंगा को जीवन दान मिल जाए। ग्रामीणों को गंगा से आई बाढ़ के कारण परेशानी है, वहीं गंगा का मिलन बूढ़ी गंगा से होने से चेहरे पर हल्की मुस्कान भी है।
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गांव इकलहरा निवासी किसान राजेश्वर, भूरे ने बताया कि बूढ़ी गंगा अस्तित्व खोती जा रही थी। अब इसका मिलन गंगा से हुआ है। उम्मीद है गंगा की धारा इस नदी को नया जीवन दान दे दे। इससे किसानों को काफी लाभ होगा। ग्रामीणों की माने तो इसी नदी के पानी से किसान फसल की सिंचाई करते थे।