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Farrukhabad News: एक महीने से बाढ़ में घिरे गांव, चूल्हे पड़े ठंडे
Thu, 11 Sep 2025 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:13 AM IST
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फोटो-25, जमापुर में घरों व गली में भरा पानी। संवाद
अमृतपुर। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से समस्या बढ़ती जा रही है। करीब एक महीने से पानी से घिरे ग्रामीणों के घरों में चूल्हे ठंडे पड़े हैं। राशन और ईंधन न होने से लोग बमुश्किल एक वक्त का भोजन कर पा रहे हैं।
घर में भरे तीन से पांच फीट पानी से गेहूं और घरेलू सामान भीगकर खराब हो चुका है। गेहूं को सुखाने और पिसवाने के लिए ग्रामीण नाव अथवा पैदल ही सिर पर गठरी लेकर बाढ़ के पानी को पार कर सड़क तक पहुंच रहे हैं। कई गांवों की सड़कें पूरी तरह कट चुकी हैं। यहां ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
गांव तीसराम की मड़ैया, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरापुर, सैदापुर, आशा की मड़ैया, नगला दुर्गू, सुंदरपुर, मंझा, माखन नगला, कलिका नगला, अंबरपुर की मड़ैया आदि गांवों के लोगों का कहना है कि बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों को राशन के साथ-साथ ईंधन और पशुओं के चारे की भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि कुछ लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं।
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गंगा खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर
फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गई। बुधवार को गंगा का जलस्तर 137.25 मीटर से घटकर 137.20 मीटर पर आ गया। गंगा के जलस्तर में पांच सेमी की कमी हुई। इसके बावजूद गंगा खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर बह रहीं हैं। वहीं, रामगंगा का जलस्तर भी 136.85 मीटर से घटकर 136.65 मीटर पर पहुंच गया। रामगंगा चेतावनी बिंदु से पांच सेमी ऊपर है।
नरौरा बांध से गंगा में 117529 क्यूसेक और रामगंगा में खो-हरेली, रामनगर बैराज से 13077 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की मात्रा कम होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक माह से बाढ़ की मार झेल रहे थे। अब पानी का दबाव घटने से बाढ़ के कम होने की संभावना बनी है। (संवाद)
जमापुर डिप पर नहीं सुरक्षा इंतज़ाम, बालक बहते-बहते बचा
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से बदायूं मार्ग पर जगह-जगह पानी का तेज बहाव लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। राजेपुर चौराहा, चित्रकूट डिप और जमापुर डिप पर पानी भरने के बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं।
बुधवार को जमापुर डिप पर हिमांशु (12) साइकिल लेकर गुजर रहा था। अचानक पैर फिसलने से वह पानी के तेज बहाव में बहने लगा। इसी बीच अंबरपुर गांव के मोहित ने साहस दिखाते हुए पानी में कूदकर उसे बचाया। सौभाग्य से हिमांशु और मोहित दोनों तैरना जानते थे, जिससे बड़ी दुर्घटना बच गई। उसी ग्रामीण रणजीत भी बाढ़ के तेज बहाव के बीच से साइकिल निकाल रहा था। हिमांशु को बाढ़ के पानी में बहता देख वह डर गया।
रामकुमार, रोशनलाल, अभय प्रताप सिंह, गोपाल सिंह, नरेंद्र आदि ने बताया कि इस मार्ग से गुजरते वक्त रोज़ कोई न कोई बहाव में फंस जाता है। मंगलवार को भी पांच लोगों को ग्रामीणों ने बचाया था। एसडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक व्यवस्था कराई जाएगी।
अमृतपुर में पहुंची दो हजार पैकेट राहत सामग्री
अमृतपुर। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ से अमृतपुर क्षेत्र के 100 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं। एक माह से पानी भरे होने के कारण बाढ़ पीड़ित परिवारों का राशन भी समाप्त हो चुका है। स्थिति को देखते हुए एसडीएम संजय कुमार सिंह ने 3,000 राहत पैकेट की डिमांड भेजी थी। जिसमें से 2,000 पैकेट पहुंच गए हैं।
एसडीएम ने बताया कि बुधवार को राहत सामग्री का वितरण शुरू करवाया गया है। तुसौर में 355 तथा कमालुद्दीनपुर में 562 परिवारों को सहायता सामग्री दी गई है। बताया कि जिन गांवों में पिछली बार राहत सामग्री नहीं दी जा सकी थी, इस बार वहां वितरण प्राथमिकता से किया जा रहा है। (संवाद)
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घर में भरे तीन से पांच फीट पानी से गेहूं और घरेलू सामान भीगकर खराब हो चुका है। गेहूं को सुखाने और पिसवाने के लिए ग्रामीण नाव अथवा पैदल ही सिर पर गठरी लेकर बाढ़ के पानी को पार कर सड़क तक पहुंच रहे हैं। कई गांवों की सड़कें पूरी तरह कट चुकी हैं। यहां ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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गांव तीसराम की मड़ैया, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरापुर, सैदापुर, आशा की मड़ैया, नगला दुर्गू, सुंदरपुर, मंझा, माखन नगला, कलिका नगला, अंबरपुर की मड़ैया आदि गांवों के लोगों का कहना है कि बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों को राशन के साथ-साथ ईंधन और पशुओं के चारे की भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि कुछ लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं।
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गंगा खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर
फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गई। बुधवार को गंगा का जलस्तर 137.25 मीटर से घटकर 137.20 मीटर पर आ गया। गंगा के जलस्तर में पांच सेमी की कमी हुई। इसके बावजूद गंगा खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर बह रहीं हैं। वहीं, रामगंगा का जलस्तर भी 136.85 मीटर से घटकर 136.65 मीटर पर पहुंच गया। रामगंगा चेतावनी बिंदु से पांच सेमी ऊपर है।
नरौरा बांध से गंगा में 117529 क्यूसेक और रामगंगा में खो-हरेली, रामनगर बैराज से 13077 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी की मात्रा कम होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक माह से बाढ़ की मार झेल रहे थे। अब पानी का दबाव घटने से बाढ़ के कम होने की संभावना बनी है। (संवाद)
जमापुर डिप पर नहीं सुरक्षा इंतज़ाम, बालक बहते-बहते बचा
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से बदायूं मार्ग पर जगह-जगह पानी का तेज बहाव लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। राजेपुर चौराहा, चित्रकूट डिप और जमापुर डिप पर पानी भरने के बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं।
बुधवार को जमापुर डिप पर हिमांशु (12) साइकिल लेकर गुजर रहा था। अचानक पैर फिसलने से वह पानी के तेज बहाव में बहने लगा। इसी बीच अंबरपुर गांव के मोहित ने साहस दिखाते हुए पानी में कूदकर उसे बचाया। सौभाग्य से हिमांशु और मोहित दोनों तैरना जानते थे, जिससे बड़ी दुर्घटना बच गई। उसी ग्रामीण रणजीत भी बाढ़ के तेज बहाव के बीच से साइकिल निकाल रहा था। हिमांशु को बाढ़ के पानी में बहता देख वह डर गया।
रामकुमार, रोशनलाल, अभय प्रताप सिंह, गोपाल सिंह, नरेंद्र आदि ने बताया कि इस मार्ग से गुजरते वक्त रोज़ कोई न कोई बहाव में फंस जाता है। मंगलवार को भी पांच लोगों को ग्रामीणों ने बचाया था। एसडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक व्यवस्था कराई जाएगी।
अमृतपुर में पहुंची दो हजार पैकेट राहत सामग्री
अमृतपुर। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ से अमृतपुर क्षेत्र के 100 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं। एक माह से पानी भरे होने के कारण बाढ़ पीड़ित परिवारों का राशन भी समाप्त हो चुका है। स्थिति को देखते हुए एसडीएम संजय कुमार सिंह ने 3,000 राहत पैकेट की डिमांड भेजी थी। जिसमें से 2,000 पैकेट पहुंच गए हैं।
एसडीएम ने बताया कि बुधवार को राहत सामग्री का वितरण शुरू करवाया गया है। तुसौर में 355 तथा कमालुद्दीनपुर में 562 परिवारों को सहायता सामग्री दी गई है। बताया कि जिन गांवों में पिछली बार राहत सामग्री नहीं दी जा सकी थी, इस बार वहां वितरण प्राथमिकता से किया जा रहा है। (संवाद)