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पांच दिन में ट्रांसपोर्टरों को 60 लाख का नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 05 Oct 2015 11:20 PM IST
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फर्रुखाबाद। हड़ताल के चलते ट्रकों के पहिये जाम हैं। इसके चलते पांच दिन में जिले के ट्रांसपोर्टरों को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। मांगें न माने जाने को लेकर ट्रांसपोर्टरों में सरकार के प्रति रोष है। दूसरी तरफ अगर हड़ताल जल्द समाप्त न हुई तो खाद्य सामग्रियों के दाम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई भी बढ़ेगी।
जिले भर में करीब 500 ट्रक और दो दर्जन से ज्यादा ट्रांसपोर्ट हैं। पिछले पांच दिनों से टोल टैक्स आदि समस्याओं का निस्तारण न होने के कारण सरकार के खिलाफ ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर चल रहे हैं। रोजमर्रा के प्रयोग में होने वाली वस्तुएं जिले में नहीं आ पा रही हैं। इसमें परचून का माल व अन्य वस्तुएं भी शामिल हैं।
हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्टरों को भी रोजाना हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक-एक ट्रांसपोर्टर के यहां तीन-तीन-चार-चार ट्रक लगे हैं। इसके लिए उन्होंने चालक भी रखे हैं। इसके साथ ही टैक्स, बीमा और परमिट का भी खर्चा जा रहा है। यानी एक ट्रक पर प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपये का खर्चा पड़ता है।
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पांच दिन से चल रही हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्टरों को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। पांच दिनों से बाहरी प्रांतों और जिलों से परचून आदि का सामान जिले में नहीं आ रहा है। इसके साथ ही यहां का सामान भी बाहर नहीं जा पा रहा है। माल न आने के चलते थोक बाजार में स्टॉक कम हो रहा है। हड़ताल का यही हाल रहा तो ब्लैक में सामान बिक सकता है।
रोजाना हो रहा 8 से 15 हजार का नुकसान
पांच दिन से चल रही हड़ताल के चलते जिले भर के ट्रांसपोर्टरों को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। मोटरवालों की सरकार भी नहीं सुन रही है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में जनता को महंगाई से जूझना पड़ सकता है।- पंकज मिश्र (जिला महामंत्री, जिला ट्रांसपोर्ट यूनियन)
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जिले भर में करीब 500 ट्रक और दो दर्जन से ज्यादा ट्रांसपोर्ट हैं। पिछले पांच दिनों से टोल टैक्स आदि समस्याओं का निस्तारण न होने के कारण सरकार के खिलाफ ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर चल रहे हैं। रोजमर्रा के प्रयोग में होने वाली वस्तुएं जिले में नहीं आ पा रही हैं। इसमें परचून का माल व अन्य वस्तुएं भी शामिल हैं।
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हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्टरों को भी रोजाना हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक-एक ट्रांसपोर्टर के यहां तीन-तीन-चार-चार ट्रक लगे हैं। इसके लिए उन्होंने चालक भी रखे हैं। इसके साथ ही टैक्स, बीमा और परमिट का भी खर्चा जा रहा है। यानी एक ट्रक पर प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपये का खर्चा पड़ता है।
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पांच दिन से चल रही हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्टरों को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। पांच दिनों से बाहरी प्रांतों और जिलों से परचून आदि का सामान जिले में नहीं आ रहा है। इसके साथ ही यहां का सामान भी बाहर नहीं जा पा रहा है। माल न आने के चलते थोक बाजार में स्टॉक कम हो रहा है। हड़ताल का यही हाल रहा तो ब्लैक में सामान बिक सकता है।
रोजाना हो रहा 8 से 15 हजार का नुकसान
पांच दिन से चल रही हड़ताल के चलते जिले भर के ट्रांसपोर्टरों को करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। मोटरवालों की सरकार भी नहीं सुन रही है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में जनता को महंगाई से जूझना पड़ सकता है।- पंकज मिश्र (जिला महामंत्री, जिला ट्रांसपोर्ट यूनियन)