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खतरा अभी टला नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:22 PM IST
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शमशाबाद क्षेत्र में बाढ के पानी से घिरी झोपडियां।
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा और रामगंगा में लगातार पानी छोड़े जाने के कारण अभी बाढ़ का खतरा टला नहीं है। गंगा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम होने से जलस्तर घटने लगा है। चेतावनी बिंदु पार पहुंचा गंगा का जलस्तर वापस चेतावनी बिंदु पर लौट आया है। रामगंगा के जलस्तर में भी कमी हुई है। लेकिन छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा अधिक होने के कारण दो दिन में रामगंगा का जलस्तर बढ़ना तय है।
गंगा नदी का जलस्तर कम होने लगा है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.70 मीटर पर था। जो शनिवार को घटकर सुबह 136.65 मीटर पर आया और शाम को जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 पर वापस लौट आया। इससे गांवों में पानी भरना बंद हो गया है। लेकिन तराई क्षेत्र में कटान अभी जारी है।
लगातार कटान होने के कारण कई गांव के लोग परेशान है। गंगा में नरौरा से सुबह 87978 क्यूसेक पानी पास हो रहा था। जो शाम को बढ़कर 95018 क्यूसेक हो गया। हरिद्वार से गंगा में सुबह 54084 क्यूसेक पानी पास हो रहा था। शाम को पानी की मात्रा घटकर 49249 क्यूसेक रह गई। रामगंगा के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की कमी हुई है।
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जलस्तर 135.50 से घटकर 135.30 मीटर पर आ गया है। इसमें छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा शनिवार को सुबह 40300 क्यूसेक थी। जो शाम को बढ़कर 46731 क्यूसेक हो गई। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण रामगंगा के जलस्तर दो दिन में बढ़ना तय है।
गंगा ने ब्लाक क्षेत्र के गांवों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार रात गांव सुतिहार में बाढ़ का पानी झोपड़ियों में घुस गया। मजबूरी में ग्रामीणों ने सड़क किनारे डेरा जमा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान ने सिर्फ पन्नी उपलब्ध कराई है। गांव के छोटेलाल, रतिराम, केशवशरन, संजीव कुमार, बालकिशन और गोवर्धन समेत एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों की झोपड़ियों में पानी घुस गया।
बाढ़ का पानी घुसने से शनिवार सुबह ग्रामीण सड़क किनारे पहुंचे और पन्नी तानकर डेरा जमा लिया। सड़क किनारे ही महिलाएं भोजन आदि बनाते दिखाई दीं। जानवर भी सड़क किनारे ही लाइन से बंधे थे। गांव में लंच पैकेट नहीं बंटवाए गए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से आर्थिक सहायता मुहैया कराए जाने की मांग की है।
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गंगा नदी का जलस्तर कम होने लगा है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.70 मीटर पर था। जो शनिवार को घटकर सुबह 136.65 मीटर पर आया और शाम को जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 पर वापस लौट आया। इससे गांवों में पानी भरना बंद हो गया है। लेकिन तराई क्षेत्र में कटान अभी जारी है।
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लगातार कटान होने के कारण कई गांव के लोग परेशान है। गंगा में नरौरा से सुबह 87978 क्यूसेक पानी पास हो रहा था। जो शाम को बढ़कर 95018 क्यूसेक हो गया। हरिद्वार से गंगा में सुबह 54084 क्यूसेक पानी पास हो रहा था। शाम को पानी की मात्रा घटकर 49249 क्यूसेक रह गई। रामगंगा के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की कमी हुई है।
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जलस्तर 135.50 से घटकर 135.30 मीटर पर आ गया है। इसमें छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा शनिवार को सुबह 40300 क्यूसेक थी। जो शाम को बढ़कर 46731 क्यूसेक हो गई। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण रामगंगा के जलस्तर दो दिन में बढ़ना तय है।
गंगा ने ब्लाक क्षेत्र के गांवों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार रात गांव सुतिहार में बाढ़ का पानी झोपड़ियों में घुस गया। मजबूरी में ग्रामीणों ने सड़क किनारे डेरा जमा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान ने सिर्फ पन्नी उपलब्ध कराई है। गांव के छोटेलाल, रतिराम, केशवशरन, संजीव कुमार, बालकिशन और गोवर्धन समेत एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों की झोपड़ियों में पानी घुस गया।
बाढ़ का पानी घुसने से शनिवार सुबह ग्रामीण सड़क किनारे पहुंचे और पन्नी तानकर डेरा जमा लिया। सड़क किनारे ही महिलाएं भोजन आदि बनाते दिखाई दीं। जानवर भी सड़क किनारे ही लाइन से बंधे थे। गांव में लंच पैकेट नहीं बंटवाए गए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से आर्थिक सहायता मुहैया कराए जाने की मांग की है।