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मकान बचाने के लिए होगा संघर्ष, पर्याप्त मुआवजा मिले
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फर्रुखाबाद। अमृत महायोजना के तहत बरेली-इटावा हाईवे की चौड़ाई 60 मीटर करने की घोषणा के बाद से आसपास के मकान मालिक चिंतित हैं। योजना के विरोध में सेंट्रल जेल से पांचाल घाट तक करीब 200 घरों पर ‘मकान बिकाऊ हैं’ के पोस्टर लगा दिए गए हैं। उनका कहना है कि जब बेघर होना ही है, तो मकान बेचकर जाना ही अच्छा है। कहा कि रोड के बीच से 55 फीट दोनों ओर ही मार्ग रखा जाए।
अमृत महायोजना के नक्शा में सेंट्रल जेल से पांचाल घाट तक 60 मीटर रोड और इसके अतिरिक्त हरितपट्टी के लिए जमीन लेने की बात कही गई है। नक्शा सार्वजनिक होते ही हाईवे किनारे लोगों में हड़कंप मच गया। बाग लकूला निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके पैतृक खेत हैं। पीडब्ल्यूडी के निर्धारित 55 मीटर के बाद मकान बनाया है। यदि मकान चला गया तो कहां जाएंगे।
सरकार पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराए, तभी मकान की जगह दी जाएगी। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय धर्म प्रसार प्रमुख दिनेेश तोमर ने आरोप लगाया कि सदर विधायक फोन पर संतोषजनक जवाब तक नहीं देते। ऐसे में पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं। न्याय न मिला, तो कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।
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कैप्टन बालेश्वर सिंह ने 1997 में मसेनी पर हाइवे किनारे जगह खरीदी थी। अब पूरा मकान जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह डीएम को भी लिखित दे चुके हैं। कैप्टन श्यामवीर ने कहा कि अब सामूहिक पलायन करना मजबूरी है। सरकार जबरन मकान ले रही है। डीएम स्तर से समस्या समाधान नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री के पास जाएंगे।
कमलेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि हमारी खरीदी हुई जमीन है। जीवन भर की कमाई लगा दी। अब बेघर किया जा रहा है। घर बचाने के लिए हर संघर्ष करेंगे। डीएम, सांसद, एमएलए के सामने अपनी बात रख दी है। सरकार पर्याप्त मुआवजा और स्थान उपलब्ध करवाए। इधर बिर्राबाग कादरीगेट निवासी मदनलाल ने डीएम को प्रार्थनापत्र देकर कादरीगेट-पांचाल घाट रोड 45 मीटर के स्थान पर 25 मीटर किए जाने की मांग की है।
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अमृत महायोजना के नक्शा में सेंट्रल जेल से पांचाल घाट तक 60 मीटर रोड और इसके अतिरिक्त हरितपट्टी के लिए जमीन लेने की बात कही गई है। नक्शा सार्वजनिक होते ही हाईवे किनारे लोगों में हड़कंप मच गया। बाग लकूला निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके पैतृक खेत हैं। पीडब्ल्यूडी के निर्धारित 55 मीटर के बाद मकान बनाया है। यदि मकान चला गया तो कहां जाएंगे।
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सरकार पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराए, तभी मकान की जगह दी जाएगी। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय धर्म प्रसार प्रमुख दिनेेश तोमर ने आरोप लगाया कि सदर विधायक फोन पर संतोषजनक जवाब तक नहीं देते। ऐसे में पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं। न्याय न मिला, तो कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।
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कैप्टन बालेश्वर सिंह ने 1997 में मसेनी पर हाइवे किनारे जगह खरीदी थी। अब पूरा मकान जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह डीएम को भी लिखित दे चुके हैं। कैप्टन श्यामवीर ने कहा कि अब सामूहिक पलायन करना मजबूरी है। सरकार जबरन मकान ले रही है। डीएम स्तर से समस्या समाधान नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री के पास जाएंगे।
कमलेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि हमारी खरीदी हुई जमीन है। जीवन भर की कमाई लगा दी। अब बेघर किया जा रहा है। घर बचाने के लिए हर संघर्ष करेंगे। डीएम, सांसद, एमएलए के सामने अपनी बात रख दी है। सरकार पर्याप्त मुआवजा और स्थान उपलब्ध करवाए। इधर बिर्राबाग कादरीगेट निवासी मदनलाल ने डीएम को प्रार्थनापत्र देकर कादरीगेट-पांचाल घाट रोड 45 मीटर के स्थान पर 25 मीटर किए जाने की मांग की है।