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राजपत्रित अफसरों की टीम ने 15 लोगों के लिए बयान
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फर्रुखाबाद। कमालगंज-फतेहगढ़ रेलवे स्टेशनों के बीच नगला पजाबा क्रासिंग पर मालगाड़ी-ट्रैक्टर ट्राली में भिड़ंत की जांच राजपत्रित अफसरों ने पूरी कर ली है। चार सदस्यीय टीम ने दो दिन में 15 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें चश्मदीद, गवाह, रेलवे और आरपीएफ के अफसर मौजूद रहे। जांच रिपोर्ट आते ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
तीन नवंबर की शाम को कानपुर से मथुरा जा रही मालगाड़ी की नगला पजाबा स्थित ट्रैक्टर ट्राली से भिड़ंत हो गई थी। दुर्घटना में अभी तक यह साबित नहीं हो सका कि इसमें गलती सिर्फ ट्रैक्टर चालक की थी अथवा गेट मैन भी दोषी था। प्रत्यक्षदर्शियों और ट्रैक्टर चालक का कहना था कि गेटमैन ने मालगाड़ी के आने तक गेट बंद नहीं किया था। इसीलिए ट्रैक्टर अंदर घुस गया। बाद में उसने गेट बंद करके खुद गेट के खंभे को सहयोगियों के साथ तोड़ा था। आरपीएफ की जांच में भी ट्रैक्टर की टक्कर लगने की न तो बात सामने आई और न ही निशान मिले। इससे पूरा मामला संदिग्ध हो गया था।
इसी के बाद इज्जतनगर डीआरएम ने चार राजपत्रित अधिकारियों की टीम बना दी थी। टीम में शामिल मथुरा के सहायक मंडल इंजीनियर, इज्जतनगर के सहायक मंडल यांत्रित अभियंता, सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी व असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर सोमवार को यहां पहुंचे। अधिकारियों ने फतेहगढ़ स्थित रेलवे के निरीक्षण भवन में कुल 15 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें चश्मदीद, गवाह, रेलवे और आरपीएफ के कर्मचारी शामिल रहे। अधिकारी जांच पूरी करने के बाद मंगलवार शाम को रवाना हो गए। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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आरपीएफ ने ट्रैक्टर और ट्राली का मलबा कब्जे में ले लिया था, मगर दोष सिद्ध न हो पाने के चलते मुकदमा नहीं लिखा गया था। आरपीएफ इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के तुरंत बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा। आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
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तीन नवंबर की शाम को कानपुर से मथुरा जा रही मालगाड़ी की नगला पजाबा स्थित ट्रैक्टर ट्राली से भिड़ंत हो गई थी। दुर्घटना में अभी तक यह साबित नहीं हो सका कि इसमें गलती सिर्फ ट्रैक्टर चालक की थी अथवा गेट मैन भी दोषी था। प्रत्यक्षदर्शियों और ट्रैक्टर चालक का कहना था कि गेटमैन ने मालगाड़ी के आने तक गेट बंद नहीं किया था। इसीलिए ट्रैक्टर अंदर घुस गया। बाद में उसने गेट बंद करके खुद गेट के खंभे को सहयोगियों के साथ तोड़ा था। आरपीएफ की जांच में भी ट्रैक्टर की टक्कर लगने की न तो बात सामने आई और न ही निशान मिले। इससे पूरा मामला संदिग्ध हो गया था।
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इसी के बाद इज्जतनगर डीआरएम ने चार राजपत्रित अधिकारियों की टीम बना दी थी। टीम में शामिल मथुरा के सहायक मंडल इंजीनियर, इज्जतनगर के सहायक मंडल यांत्रित अभियंता, सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी व असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर सोमवार को यहां पहुंचे। अधिकारियों ने फतेहगढ़ स्थित रेलवे के निरीक्षण भवन में कुल 15 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें चश्मदीद, गवाह, रेलवे और आरपीएफ के कर्मचारी शामिल रहे। अधिकारी जांच पूरी करने के बाद मंगलवार शाम को रवाना हो गए। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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आरपीएफ ने ट्रैक्टर और ट्राली का मलबा कब्जे में ले लिया था, मगर दोष सिद्ध न हो पाने के चलते मुकदमा नहीं लिखा गया था। आरपीएफ इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के तुरंत बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा। आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।