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निवर्तमान व पूर्व जिपं अध्यक्ष नहीं बचा सकी जमानत
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फर्रुखाबाद। जिला पंचायत सदस्य पद पर चुनाव में निवर्तमान व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को जनता की बेरुखी भारी पड़ गई। एक वार्ड में मुकाबला होने से दोनों चुनाव तो हार ही गईं, लेकिन अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं। खास बात यह है कि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के सामने उनकी पुत्रवधू ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोंकी थी। हालांकि बहू भी चुनाव हार गई।
कायमगंज के द्वितीय वार्ड 10 से निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानदेवी कठेरिया, पूर्व विधायक अजीत कुमार कठेरिया की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सगुनादेवी और इनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल पत्नी नवजीत सिंह समेत 15 प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य पद पर चुनावी मैदान में उतरे थे। इस सीट पर बसपा के राहुल देव वर्मन ने सभी को हराकर चुनाव जीत कर बाजी मारी है।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानदेवी कठेरिया तीसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने 2665 मत हासिल किए, लेकिन जमानत नहीं बचा सकीं। उधर, भाजपा प्रत्याशी पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रवेश कोरी पांचवें स्थान पर रहे। वह 2281 वोट पाकर जमानत गवां बैठे।
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मजेदार बात तो यह है कि पूर्व विधायक अजीत कुमार कठेरिया की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सगुना देवी औद उनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल भी आमने-सामने चुनाव लड़ी थीं। इसमें सास-बहू दोनों चुनाव हार गईं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को मात्र 218 वोट मिले, जबकि उनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल ने 2110 वोट हासिल किए। हालांकि जमानत दोनों की ही जब्त हो गई।
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कायमगंज के द्वितीय वार्ड 10 से निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानदेवी कठेरिया, पूर्व विधायक अजीत कुमार कठेरिया की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सगुनादेवी और इनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल पत्नी नवजीत सिंह समेत 15 प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य पद पर चुनावी मैदान में उतरे थे। इस सीट पर बसपा के राहुल देव वर्मन ने सभी को हराकर चुनाव जीत कर बाजी मारी है।
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निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानदेवी कठेरिया तीसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने 2665 मत हासिल किए, लेकिन जमानत नहीं बचा सकीं। उधर, भाजपा प्रत्याशी पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रवेश कोरी पांचवें स्थान पर रहे। वह 2281 वोट पाकर जमानत गवां बैठे।
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मजेदार बात तो यह है कि पूर्व विधायक अजीत कुमार कठेरिया की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सगुना देवी औद उनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल भी आमने-सामने चुनाव लड़ी थीं। इसमें सास-बहू दोनों चुनाव हार गईं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को मात्र 218 वोट मिले, जबकि उनकी पुत्रवधू भाव्या कंसल ने 2110 वोट हासिल किए। हालांकि जमानत दोनों की ही जब्त हो गई।