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Farrukhabad News: सूड़ी के प्रकोप से तिलहन व उर्द की फसल चौपट
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तिली की फसल में लगी सूड़ी।
- फोटो : संवाद
फर्रुखाबाद/मोहम्मदाबाद। मौसम की मार से किसान बेहाल है। कहीं गंगा की बाढ़ में फसलें डूबकर तबाह हो गईं तो कहीं कीड़ों के प्रकोप से चौपट हैं। खेतों में लहलहाती फसल चौपट होते देख किसान अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहे हैं।
राजेपुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। दूसरी ओर मोहम्मदाबाद क्षेत्र में बाढ़ का असर नहीं है। यहां किसानों ने मक्का, धान के अलावा तिलहन, उर्द आदि फसलें खेतों में बोईं। इन दिनों उर्द और तिलहन की फसल में फूल आने के साथ फली बन रही है। इसी बीच फसलों में बिहार बाल सूड़ी का प्रकोप फैलने लगा। सैकड़ों बीघा खेतों में अब सूड़ी का प्रकोप लगातार बढ़ता रहा है। इससे बिना पत्तों के पौधे डंडी की तरह खड़े दिख रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को बताए उपाय
फसल सुरक्षा कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताया कि इन दिनों खरीफ फसलों पर रोग और कीड़ों का प्रकोप अधिक हो रहा है। उर्द, मूंग, तिल, धान व मक्का में सूड़ी का सर्वाधिक प्रकोप है। इसके प्रबंधन के लिए पांच प्रतिशत नीम पत्ती शत या नीम तेल 2-4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। बिना रसायन के एक एकड़ खेत में दो-तीन जगह प्रकाश प्रपंच लगाकर भी कीड़ों का प्रबंध किया जा सकता है। रासायनिक प्रबंधन में इंडाक्साकार्ब की एक मिली लीटर मात्रा तीन लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। बीमारियों के प्रबंधन के लिए किसानों को दो ग्राम मैंकोजेब प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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राजेपुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। दूसरी ओर मोहम्मदाबाद क्षेत्र में बाढ़ का असर नहीं है। यहां किसानों ने मक्का, धान के अलावा तिलहन, उर्द आदि फसलें खेतों में बोईं। इन दिनों उर्द और तिलहन की फसल में फूल आने के साथ फली बन रही है। इसी बीच फसलों में बिहार बाल सूड़ी का प्रकोप फैलने लगा। सैकड़ों बीघा खेतों में अब सूड़ी का प्रकोप लगातार बढ़ता रहा है। इससे बिना पत्तों के पौधे डंडी की तरह खड़े दिख रहे हैं।
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कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को बताए उपाय
फसल सुरक्षा कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताया कि इन दिनों खरीफ फसलों पर रोग और कीड़ों का प्रकोप अधिक हो रहा है। उर्द, मूंग, तिल, धान व मक्का में सूड़ी का सर्वाधिक प्रकोप है। इसके प्रबंधन के लिए पांच प्रतिशत नीम पत्ती शत या नीम तेल 2-4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। बिना रसायन के एक एकड़ खेत में दो-तीन जगह प्रकाश प्रपंच लगाकर भी कीड़ों का प्रबंध किया जा सकता है। रासायनिक प्रबंधन में इंडाक्साकार्ब की एक मिली लीटर मात्रा तीन लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। बीमारियों के प्रबंधन के लिए किसानों को दो ग्राम मैंकोजेब प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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