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इस त्योहार कहीं मौसम न बना दे कर्जदार
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 03 Mar 2015 11:21 PM IST
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होली के त्योहार पर मौसम का बिगड़ा मिजाज कहीं सीजनी दुकानदारों को कर्जदार
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न बना दे। तीसरे दिन मंगलवार सुबह भी रिमझिम बारिश से रंग-गुलाल और
पिचकारी दुकानदार मायूस दिखे। हालांकि दोपहर बाद निकली धूप से दुकानदारों
को कुछ राहत मिली लेकिन दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई
दे रही थीं।
सीजनी दुकानदारों को इस बार होली का त्योहार रास नहीं आ रहा है। शनिवार रात से बिगड़े मौसम ने रंग-गुलाल, पिचकारी, टोपी आदि बेचने वाले दुकानदारों को रुलाकर रख दिया है। रविवार को जहां पूरे दिन बरसात हुई। वहीं सोमवार को भी दोपहर बाद बरसात से बाजार में सन्नाटा ही पसरा रहा।
मंगलवार को भी तड़के हल्की बारिश होने से बाजार में होली जैसी रौनक नहीं दिखाई दी। पापड़ व चिप्स की दुकानों पर भी बिक्री काफी कम है। हालांकि दोपहर बाद धूप निकलने से रंग-गुलाल दुकानदारों को कुछ राहत अवश्य मिली। अगर मौसम ने फिर पलटी मारी और बरसात हुई तो इस बार दुकानदार कर्ज में अवश्य डूब जाएंगे।
दुकानदार बोले, लागत निकलना मुश्किल
सीजनी दुकानदारों को उम्मीद रहती है कि हफ्ते भर के बाजार में आमदनी अच्छी हो जाएगी। इसी के चलते वह कर्जा लेकर भी माल लगाते हैं। इस बार होली पर बिगड़े मौसम ने दुकानदारों को परेशानी में डाल दिया है। उन्हें तो लागत निकलती भी नहीं दिख रही।
रेलवे रोड पर रंग-गुलाल व पिचकारी समेत अन्य आइटमों की दुकान लगाए बसंत राजपूत कहते हैं कि 12 हजार रुपये 5 प्रतिशत ब्याज पर लेकर कानपुर से रंग-गुलाल, स्प्रे कलर, पिचकारी, मुखौटा और विभिन्न वैरायटियों के नकली बाल व मूंछें खरीदी थीं। दो दिन में मात्र 700-800 रुपये की बिक्री हुई है। बीते साल होली पर दो दिनों में चार से पांच हजार की बिक्री हो चुकी थी। अब धूप निकली है तो कुछ उम्मीद बंधी है।
त्रिपोलिया चौक पर रंग-गुलाल की ठेली लगाए शनि कुमार कहते हैं कि कानपुर से रंग-गुलाल, पिचकारी, टोपी और मुखौटे आदि आइटम खरीदकर लाए थे। सोचा था होली में कुछ कमाई हो जाएगी। बिगड़े मौसम ने तो माजरा ही बिगाड़ दिया। मुनाफा छोड़ो लागत निकल आए यही बहुत है। मठिया देवी मंदिर के पास चिप्स-पापड़ की दुकान लगाए गौरव कुमार कहते
हैं कि दाल पापड़, आलू पापड़, चिप्स, साबुदाना पापड़ व साबुदाना जलेबी का स्टाक भरा पड़ा है। होली में महज दो दिन शेष हैं और अभी तक 20 प्रतिशत तक माल नहीं बिका है। कानपुर, बरेली और आगरा आदि से माल लाए हैं। दोपहर बाद धूप खिली है। अगर ऐसा ही मौसम रहा तो बिक्री बढ़ेगी। लेकिन इस बार मुनाफा ज्यादा नहीं होगा।
रंग-गुलाल, पिचकारी व अन्य के मूल्यों पर नजर
गुलाल- 80 से 100 रुपये प्रति किलो, रंग 30 रुपये का एक तोला (10 ग्राम), स्प्रे रंग- 30 से 150 रुपये प्रति पीस, मुखौटा- 50 से 20, पिचकारी, 10 से 200, नकली बाल- 25 से 100 और नकली मूंछ- 5 से 50 रुपये।
चिप्स-पापड़ के मूल्य पर नजर
आलू पापड़- 200 रुपये प्रति किलो, आलू चिप्स- 150 से 160 रुपये, दाल पापड़- 140 से 160 रुपये प्रति किलो, साबुदाना पापड़ व साबुदाना जलेबी 20 से 25 रुपये पैकेट (प्रति दस ग्राम)।
सीजनी दुकानदारों को इस बार होली का त्योहार रास नहीं आ रहा है। शनिवार रात से बिगड़े मौसम ने रंग-गुलाल, पिचकारी, टोपी आदि बेचने वाले दुकानदारों को रुलाकर रख दिया है। रविवार को जहां पूरे दिन बरसात हुई। वहीं सोमवार को भी दोपहर बाद बरसात से बाजार में सन्नाटा ही पसरा रहा।
मंगलवार को भी तड़के हल्की बारिश होने से बाजार में होली जैसी रौनक नहीं दिखाई दी। पापड़ व चिप्स की दुकानों पर भी बिक्री काफी कम है। हालांकि दोपहर बाद धूप निकलने से रंग-गुलाल दुकानदारों को कुछ राहत अवश्य मिली। अगर मौसम ने फिर पलटी मारी और बरसात हुई तो इस बार दुकानदार कर्ज में अवश्य डूब जाएंगे।
दुकानदार बोले, लागत निकलना मुश्किल
सीजनी दुकानदारों को उम्मीद रहती है कि हफ्ते भर के बाजार में आमदनी अच्छी हो जाएगी। इसी के चलते वह कर्जा लेकर भी माल लगाते हैं। इस बार होली पर बिगड़े मौसम ने दुकानदारों को परेशानी में डाल दिया है। उन्हें तो लागत निकलती भी नहीं दिख रही।
रेलवे रोड पर रंग-गुलाल व पिचकारी समेत अन्य आइटमों की दुकान लगाए बसंत राजपूत कहते हैं कि 12 हजार रुपये 5 प्रतिशत ब्याज पर लेकर कानपुर से रंग-गुलाल, स्प्रे कलर, पिचकारी, मुखौटा और विभिन्न वैरायटियों के नकली बाल व मूंछें खरीदी थीं। दो दिन में मात्र 700-800 रुपये की बिक्री हुई है। बीते साल होली पर दो दिनों में चार से पांच हजार की बिक्री हो चुकी थी। अब धूप निकली है तो कुछ उम्मीद बंधी है।
त्रिपोलिया चौक पर रंग-गुलाल की ठेली लगाए शनि कुमार कहते हैं कि कानपुर से रंग-गुलाल, पिचकारी, टोपी और मुखौटे आदि आइटम खरीदकर लाए थे। सोचा था होली में कुछ कमाई हो जाएगी। बिगड़े मौसम ने तो माजरा ही बिगाड़ दिया। मुनाफा छोड़ो लागत निकल आए यही बहुत है। मठिया देवी मंदिर के पास चिप्स-पापड़ की दुकान लगाए गौरव कुमार कहते
हैं कि दाल पापड़, आलू पापड़, चिप्स, साबुदाना पापड़ व साबुदाना जलेबी का स्टाक भरा पड़ा है। होली में महज दो दिन शेष हैं और अभी तक 20 प्रतिशत तक माल नहीं बिका है। कानपुर, बरेली और आगरा आदि से माल लाए हैं। दोपहर बाद धूप खिली है। अगर ऐसा ही मौसम रहा तो बिक्री बढ़ेगी। लेकिन इस बार मुनाफा ज्यादा नहीं होगा।
रंग-गुलाल, पिचकारी व अन्य के मूल्यों पर नजर
गुलाल- 80 से 100 रुपये प्रति किलो, रंग 30 रुपये का एक तोला (10 ग्राम), स्प्रे रंग- 30 से 150 रुपये प्रति पीस, मुखौटा- 50 से 20, पिचकारी, 10 से 200, नकली बाल- 25 से 100 और नकली मूंछ- 5 से 50 रुपये।
चिप्स-पापड़ के मूल्य पर नजर
आलू पापड़- 200 रुपये प्रति किलो, आलू चिप्स- 150 से 160 रुपये, दाल पापड़- 140 से 160 रुपये प्रति किलो, साबुदाना पापड़ व साबुदाना जलेबी 20 से 25 रुपये पैकेट (प्रति दस ग्राम)।