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Farrukhabad News: शव पहुंचाने के लिए एंबुलेंस चालक ने वसूले 2200 रुपये
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फर्रुखाबाद। लोहिया जिला अस्पताल में मरीज की मौत होने पर सरकार ने शव घर तक पहुंचाने के लिए निशुल्क शव वाहन दिया है। उसके रखरखाव, डीजल आदि का भार भी सरकार उठाती है। इसके बावजूद शव घर तक छोड़ने के बदले गरीब गमगीन परिजनों से 2200 रुपये वसूल लिए गए।जरी-जरदोजी का काम करके पेट भरने वाला परिवार खुली सरकारी लूट के आगे बेबस दिखा।
कासगंज जिले के थाना सहावर के गांव निशानखेड़ा निवासी राजेंद्र राजपूत (42) कंपिल थाने के गांव होतेपुर में अपनी ससुराल आए थे। 26 जून की रात में उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। घर में रह रही साली अर्चना उर्फ निशा और सास लज्जावती पैसे के अभाव में तुरंत वाहन करके अस्पताल नहीं ला सकीं।
27 जून की सुबह वह ट्रेन से राजेंद्र को लेकर फर्रुखाबाद पहुंचीं। लोहिया अस्पताल पहुंचने पर पौने नौ बजे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव घर ले जाने के लिए अर्चना के पास रुपये नहीं थे, तो फार्मासिस्ट जावेद ने अस्पताल का नि:शुल्क शव वाहन उपलब्ध करवा दिया।
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अर्चना ने बताया कि शव उतारने से पहले ही चालक ने पांच-छह हजार रुपये का रुपये का डीजल खर्च होने की बात कही। बोला कि वह अपनी जेब से रुपये नहीं देगा। अर्चना ने बताया कि उसके पास इतने रुपये नहीं थे। कई बार कहने पर भी चालक नहीं माना। इसके बाद उधार लेकर गए 2200 रुपये दिए।
जब उसने कम से कम तीन हजार रुपये देने की बात कही, तो उन्होंने हाथ जोड़कर रुपये न होने की बात कह दी। इस पर वह चला गया। यहां सवाल उठता है कि लोहिया अस्पताल के कर्मचारी इतने संवेदनहीन हो गए कि शवों का भी सौदा करने से नहीं चूकते। अर्चना घर में जरदोजी का काम करके वृद्ध मां और अपना पेट पालती है। उसने बताया कि बहन और बहनोई भी काफी गरीब हैं।
की जाएगी जांच
-यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि रुपये लिए हैं, तो गलत है। वह इस मामले की जांच करवाएंगे। दोषी पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित का पक्ष भी सुना जाएगा।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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कासगंज जिले के थाना सहावर के गांव निशानखेड़ा निवासी राजेंद्र राजपूत (42) कंपिल थाने के गांव होतेपुर में अपनी ससुराल आए थे। 26 जून की रात में उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। घर में रह रही साली अर्चना उर्फ निशा और सास लज्जावती पैसे के अभाव में तुरंत वाहन करके अस्पताल नहीं ला सकीं।
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27 जून की सुबह वह ट्रेन से राजेंद्र को लेकर फर्रुखाबाद पहुंचीं। लोहिया अस्पताल पहुंचने पर पौने नौ बजे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव घर ले जाने के लिए अर्चना के पास रुपये नहीं थे, तो फार्मासिस्ट जावेद ने अस्पताल का नि:शुल्क शव वाहन उपलब्ध करवा दिया।
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अर्चना ने बताया कि शव उतारने से पहले ही चालक ने पांच-छह हजार रुपये का रुपये का डीजल खर्च होने की बात कही। बोला कि वह अपनी जेब से रुपये नहीं देगा। अर्चना ने बताया कि उसके पास इतने रुपये नहीं थे। कई बार कहने पर भी चालक नहीं माना। इसके बाद उधार लेकर गए 2200 रुपये दिए।
जब उसने कम से कम तीन हजार रुपये देने की बात कही, तो उन्होंने हाथ जोड़कर रुपये न होने की बात कह दी। इस पर वह चला गया। यहां सवाल उठता है कि लोहिया अस्पताल के कर्मचारी इतने संवेदनहीन हो गए कि शवों का भी सौदा करने से नहीं चूकते। अर्चना घर में जरदोजी का काम करके वृद्ध मां और अपना पेट पालती है। उसने बताया कि बहन और बहनोई भी काफी गरीब हैं।
की जाएगी जांच
-यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि रुपये लिए हैं, तो गलत है। वह इस मामले की जांच करवाएंगे। दोषी पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित का पक्ष भी सुना जाएगा।
-डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।