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निलंबित दीवान ने लोन चंद महीनों में ही किया चुकता

Tue, 19 Oct 2021 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 11:36 PM IST
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Suspended Diwan paid off the loan within a few months
फर्रुखाबाद। सर्विलांस सेल के निलंबित दीवान ने दो पर्सनल लोन लिए और ऊपरी कमाई के खेल से चंद महीनों में ही अदा कर दिए। कायमगंज में पकड़े गए सटोरिये ने एसओजी के अलावा सर्विलांस सेल में भी अलग से महीना बंदी (रिश्वत) देने का खुलासा किया था। इसकी जानकारी के बाद भी अधिकारी मामले को पचा गए थे।
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सर्विलांस सेल में 12 वर्ष तक तैनात रहे निलंबित दीवान सत्येंद्र यादव ने इस वर्ष थाना मऊदरवाजा क्षेत्र की एक बैंक शाखा से दो-दो लाख रुपये के दो पर्सनल लोन लिए थे। इसके लिए अकाउंट शाखा से उसने फार्म-16 भी लिया था। 13 फीसदी वार्षिक ब्याज पर ली गई लोन की रकम को दीवान ने चंद महीनों में ही अदा कर दिया। दीवान का खेल इतना निराला था कि एसओजी प्रभारी या कप्तान कोई रहे, उसको पूरे जनपद के सटोरिये महीना बंदी देना नहीं भूलते थे। दीवान के पास पूरे जनपद के सटोरियों की लिस्ट है। लगभग चार माह पहले कायमगंज कोतवाली में पकड़े गए एक सटोरिये ने पूछताछ में खुलासा किया था कि एसओजी के अलावा सर्विलांस की महीना बंदी अलग से जाती है।
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वरिष्ठ अधिकारियों के करीब रहने से कोई एसओ व कोतवाल कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। उसके खिलाफ कई पुलिसकर्मियों ने शासन में भी शिकायतें की थीं। आईजी के यहां तैनात एक स्टेनो से मिलीभगत कर वह सभी मामलों को निपटा देता है। वह स्टेनो जनपद में भी तैनात रह चुके हैं। बता दें कि सर्विलांस सेल का दीवान सत्येंद्र यादव गांव नूरनगर निवासी जनसेवा केंद्र संचालक रंजीत को पकड़कर दो लाख रुपये मांगने के आरोप में पिछले दिनों निलंबित हो चुका है। इस मामले में मेरापुर थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
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शहर कोतवाली में जीतू करता था सर्विलांस पर काम
शहर कोतवाली से लाइन हाजिर सिपाही जीतू कानपुर में एसओजी में तैनात रहा था। उसके पास अपना लैपटॉप है। दीवान सत्येंद्र के चाचा के बेटे दीवान रामनरेश यादव भी शहर कोतवाली में तैनात थे। सत्येंद्र ने गोपनीय वेबसाइट व उनके लॉक नंबर जीतू को बता रखे थे। रामनरेश व जीतू कोतवाली में अपनी सर्विलांस सेल चलाकर लोगों की धरपकड़ कर रुपये वसूलने का खेल खेलते थे। इसके चलते कोतवाल से लेकर अन्य अधिकारी भी दोनों से खुश रहते थे।
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