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बाघ को पकड़ने में गन्ने की फसल बनी चुनौती
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गांव उदयपुर कंचनपुर में बाघ को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर। क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने में खेतों में खड़ी गन्ने की फसल बाधा बन रही है। सोमवार को नाइट विजन कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है। शवदाह गृह के कमरे को पिंजरा बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
तहसील क्षेत्र के गांव उदयपुर कंचनपुर में बाघ के विचरण से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं वन विभाग कर्मियों के लिए बाघ पकड़ने में हजारों बीघा खेतों में खड़ा गन्ना चुनौती से कम नहीं है।
गन्ने के खेत में बाघ को आसानी से शिकार मिल जाता है। इसलिए बाघ गन्ने के खेत नहीं छोड़ रहा है। बाघ को पकड़ने के लिए टाइगर स्पेशलिस्ट टीमें डेरा डाले हैं।
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डॉ. आरके सिंह के नेतृत्व में लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क के डॉ. दयाशंकर रविवार से ही बाघ पकड़ने को तानाबाना बुन रहे हैं। सोमवार को सुबह बहराइच के डॉ.सर्वेश राय भी गांव पहुंच गए।
बाघ पकड़ने को तीनों डॉक्टर रणनीत बना रहे हैं। डॉ.आरके सिंह ने बताया कि गांव के बाहर गंगा किनारे बने शवदाह गृह के एक कमरे को पिंजरा बनाया जा रहा है। इसमें एक जानवर को बंद किया जाएगा।
जैसे ही बाघ शिकार पर हमला करेगा तो उसमें फंस जाएगा। क्षेत्रीय वन अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सोमवार को किसी भी नाइट विजन कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है और न ही पंजे के निशान मिले हैं।
उत्तर की दिशा की ओर कुछ हलचल मिली है। दोनों पिंजरे में शिकार रखा गया है। चारों टीमें लगातार काम कर रही हैं। जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है।
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तहसील क्षेत्र के गांव उदयपुर कंचनपुर में बाघ के विचरण से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं वन विभाग कर्मियों के लिए बाघ पकड़ने में हजारों बीघा खेतों में खड़ा गन्ना चुनौती से कम नहीं है।
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गन्ने के खेत में बाघ को आसानी से शिकार मिल जाता है। इसलिए बाघ गन्ने के खेत नहीं छोड़ रहा है। बाघ को पकड़ने के लिए टाइगर स्पेशलिस्ट टीमें डेरा डाले हैं।
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डॉ. आरके सिंह के नेतृत्व में लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क के डॉ. दयाशंकर रविवार से ही बाघ पकड़ने को तानाबाना बुन रहे हैं। सोमवार को सुबह बहराइच के डॉ.सर्वेश राय भी गांव पहुंच गए।
बाघ पकड़ने को तीनों डॉक्टर रणनीत बना रहे हैं। डॉ.आरके सिंह ने बताया कि गांव के बाहर गंगा किनारे बने शवदाह गृह के एक कमरे को पिंजरा बनाया जा रहा है। इसमें एक जानवर को बंद किया जाएगा।
जैसे ही बाघ शिकार पर हमला करेगा तो उसमें फंस जाएगा। क्षेत्रीय वन अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सोमवार को किसी भी नाइट विजन कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है और न ही पंजे के निशान मिले हैं।
उत्तर की दिशा की ओर कुछ हलचल मिली है। दोनों पिंजरे में शिकार रखा गया है। चारों टीमें लगातार काम कर रही हैं। जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है।

मनोज कौशल का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD