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शाम-ए-तांबा में देश के मशहूर शायरों ने की शिरकत

Wed, 04 Mar 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Wed, 04 Mar 2015 11:21 PM IST
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Sham -e - tamba part of the country's famous poets
मशहूर शायर मरहूम गुलाम रव्वानी ताबां की याद में आयोजित आल इंडिया मुशायरा
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की शुरुआत मुख्य अतिथि मिजोरम के राज्यपाल अज़ीज कुरैशी ने शमा रौशन कर की। उन्होंने मरहूम शायर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ताबां साहब ने अपनी शायरी की बदौलत  दुनिया में ख्याति पाई।

मंगलवार की देर रात सीपी सभागार में शाम-ए-ताबां के तहत आल इंडिया मुशायरा हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मिजोरम के राज्यपाल अजीज कुरैशी ने मरहूम शायर के साथ बिताए दिनों के संस्मरण लोगों के साथ साझा किए। कहा कि ताबा खुद्दार इंसान थे। उन्होंने न तो कभी शासन की मदद ली और न अपने करीबियों की।   मुनव्वर राना ने अपनी चिरपरिचित शायरी सुनाते हुए कहा, किसी के हिस्से में मकां आया, किसी के हिस्से में दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में मां आई।

लखनऊ से आईं डा. नसीम नखत ने भ्रूण हत्या पर कटाक्ष करते हुए कहा, हमारे कातिल से कोई पूछे, भला हमारा कसूर क्या है...। जो हम न होंगे तुम्हारी दुनिया की शक्ल कितनी खराब होगी, जरा तसब्बुर करो तो उसका, वो दिन भी आएगा दूर क्या है। अलीगढ़ से आए हास्य रस के शायर कलीम समर ने कार्यक्रम में पुलिस का लाव लश्कर देखकर कटाक्ष किया- कह रहा था कल दरोगा थाने में दीवान से, आ गए कल्लन के पैसे छोड़ दो सम्मान से। श्रंगार रस के शायर दिल्ली से आए एजाज अंसारी ने कहा, नदी के दो किनारे हैं,

ये कभी मिल नहीं सकते, मोहब्बत सब्र करती है, सियासत जुल्म ढाती है। मुशायरा का संचालन कर रहे लखनऊ से आए शायर रईस अंसारी ने अपने शेर के माध्यम से लोगों की दाद बटोरते हुए कहा वो जिन के घर में दिया तक नहीं जलाने को, ये चांद सिर्फ उन्हीं के लिए निकलता है। हसन काजमी ने कहा, बासी रोटी सेंक के जब नाश्ते में मां ने दी, हर अमीरी से हमें ये मुफलिसी अच्छी लगी। डा तारिक कमर ने सुनाया ऐ हवा ऐसी भी जल्दी क्या है, क्या कहीं आग लगानी है अभी।

कार्यक्रम के दौरान मरहूम शायर के पुत्र इजहार आलम खां ने पिता के जीवन पर प्रकाश डाला। श्रोताओं में प्रमुख रूप से नगर के प्रमुख उद्योग पति सत्यप्रकाश अग्रवाल, गिरीश चंद्र अग्रवाल, राजीव बिंदल, प्रहलाद नरायन अग्रवाल, सोहराब खां, रामप्रकाश यादव कल्लू, राजीव गुप्ता, अलीम खां, आमिर खां, शहरोज खां, चंदा खां, आशुतोष अग्रवाल, पियूष अग्रवाल, नजमी खां आदि मौजूद रहे।
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