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Farrukhabad News: सेलेक्ट्रा मशीन खराब, लिवर व किडनी समेत 40 तरह की जांचें बंद
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की सेंट्रल लैब में लगी बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर (सेलेक्ट्रा मशीन दो दिन से खराब है। इससे लिवर, किडनी समेत 40 तरह की जांचें बंद हो गईं। दो दिन में 200 से अधिक मरीजों को निजी लैबों में मोटी रकम खर्च कर जांचें करानी पड़ी।
लोहिया अस्पताल की सेंट्रल लैब में हर रोज 200 से अधिक मरीज जांच के लिए नमूने दे रहे है। इनमें 100 से अधिक मरीज लिवर, किडनी, शुगर, रक्त, मूत्र या सीरम आदि जैविक जांचें, ग्लूकोज, एनिम, इलेक्ट्रोलाइट समेत छोटी-बड़ी 40 तरह की जांचें कराने रोजाना आते हैं। इन जांचों को करने वाली बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन ने बुधवार शाम काम करना बंद कर दिया। ऐसे में गुरुवार और शुक्रवार को भी मशीन से जांचें नहीं की जा सकीं। दो दिन में 200 से अधिक मरीजों को बिना जांच कराए ही घरों को लौटना पड़ा। इनमें अधिक जरूरत वाले मरीजों को निजी लैबों में मोटी रकम खर्च करके जांचें करानी पड़ीं। शुक्रवार को भी मशीन सही नहीं की जा सकी। लैब प्रभारी डॉ. जय सिंह ने बताया कि संबंधित कंपनी को मशीन खराब होते ही मेल करके सूचना दे दी गई। शनिवार को इंजीनियर आने की उम्मीद है।
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चार-चार दिन बायोवेस्ट उठाने नहीं आता कर्मचारी
सेंट्रल लैब में रोजाना 200 से अधिक मरीजों के नमूने लिए जाते हैं। इनकी जांचें होने के बाद सिरिंज, ब्लड बायल आदि बायोवेस्ट डस्टबिन में भरे जाते हैं। कर्मियों का कहना है कि कार्यदायी संस्था चार-चार दिन बायोवेस्ट उठाने नहीं आती। लिहाजा दिक्कत का सामना करना पड़ा। यही नहीं डस्टबिन में नियमानुसार लगने वाली पॉलिथीन भी नहीं लगाई जाती।
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लोहिया अस्पताल की सेंट्रल लैब में हर रोज 200 से अधिक मरीज जांच के लिए नमूने दे रहे है। इनमें 100 से अधिक मरीज लिवर, किडनी, शुगर, रक्त, मूत्र या सीरम आदि जैविक जांचें, ग्लूकोज, एनिम, इलेक्ट्रोलाइट समेत छोटी-बड़ी 40 तरह की जांचें कराने रोजाना आते हैं। इन जांचों को करने वाली बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन ने बुधवार शाम काम करना बंद कर दिया। ऐसे में गुरुवार और शुक्रवार को भी मशीन से जांचें नहीं की जा सकीं। दो दिन में 200 से अधिक मरीजों को बिना जांच कराए ही घरों को लौटना पड़ा। इनमें अधिक जरूरत वाले मरीजों को निजी लैबों में मोटी रकम खर्च करके जांचें करानी पड़ीं। शुक्रवार को भी मशीन सही नहीं की जा सकी। लैब प्रभारी डॉ. जय सिंह ने बताया कि संबंधित कंपनी को मशीन खराब होते ही मेल करके सूचना दे दी गई। शनिवार को इंजीनियर आने की उम्मीद है।
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चार-चार दिन बायोवेस्ट उठाने नहीं आता कर्मचारी
सेंट्रल लैब में रोजाना 200 से अधिक मरीजों के नमूने लिए जाते हैं। इनकी जांचें होने के बाद सिरिंज, ब्लड बायल आदि बायोवेस्ट डस्टबिन में भरे जाते हैं। कर्मियों का कहना है कि कार्यदायी संस्था चार-चार दिन बायोवेस्ट उठाने नहीं आती। लिहाजा दिक्कत का सामना करना पड़ा। यही नहीं डस्टबिन में नियमानुसार लगने वाली पॉलिथीन भी नहीं लगाई जाती।
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