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रोडवेज बस में रात में कंबल लेकर चलें
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:20 PM IST
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फर्रुखाबाद। रोडवेज की बसों में ठंड से बचने की तैयारी यात्रियों को ही रखनी होगी। रोडवेज की अधिकतर बसों में शीशे नहीं हैं। कई बसें तो खस्ताहाल हैं। खिड़कियां भी इतनी ढीली हैं कि ठंडी हवा सीधे बस के अंदर घुसती है। इसके चलते यात्रियों को ठंड में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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कई बसें बगैर फिटनेस के दौड़ रही हैं। रोडवेज महकमे की मानें तो उनके बेड़ारास में सभी बसें सही हालत में चल रही हैं। हर माह बसों का फिटनेस होता है। अमर उजाला संवाददाता ने रोडवेज बस स्टाप फर्रुखाबाद पर खड़ी बसों की हालत देखी तो करीब आधा दर्जन से ज्यादा बसें खटारा अवस्था में थीं। कई बसों में शीशे नहीं थे।
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जिले में रोडवेज विभाग के बेड़ारास में 83 बसें शामिल हैं। फर्रुखाबाद रोडवेज बस स्टैंड से दिल्ली, आगरा, कानपुर, बदायूं, हरिद्वार, शाहजहांपुर समेत विभिन्न रूटों पर बसें रोजाना दौड़ती हैं। इनमें से अधिकतर बसों की हालत खस्ता है। बसों को देखने से लगता है कि इनका फिटनेस सालों से नहीं हुआ है।
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वहीं, कई बसों में शीशे न होने के चलते ठंडी हवा सीधे अंदर घुसती है। रोडवेज बसअड्डा फर्रुखाबाद में खड़ी बदायूं, हरदोई की बसों में पीछे की ओर तीन-चार शीशे टूटे थे। वहीं गोला डिपो की बस खस्ताहाल थी। दिल्ली रूट पर चलने वाली 33 बसों में से अधिकतर बसें रात में ही चलती हैं। इन बसों के भी अधिकतर शीशे टूटे ही हैं। वहीं कई बसों की खिड़कियां भी ढीली हैं। इससे बस चलने के दौरान खड़-खड़ की आवाज से भी यात्रियों को दिक्कत उठानी पड़ती है।
वर्जन
रोडवेज विभाग हर साल बसों का फिटनेस करवाता है। बगैर फिटनेस के कोई भी बस नहीं चलती है। रोड पर चलने के दौरान अधिकतर शीशे ही क्षतिग्रस्त होते हैं। शीशों को तुरंत बदलवाया जाता है। खिड़कियों को भी समय-समय पर ठीक कराया जाता है। लंबी रूट पर चलने वाली बसों का सर्दी के मौसम में विशेष ख्याल रखा जाता है। - संजीव यादव (एआरएम, रोडवेज विभाग)