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कुरआन की तिलावत कर रखा पहला रोजा

Fri, 19 Jun 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Fri, 19 Jun 2015 11:32 PM IST
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Quran recitation kept the first Rosa
रमजान माह के पहले दिन अकीदतमंदों में गजब का उत्साह देखा गया। घरों में
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महिलाओं ने तो मस्जिदों में पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने कुरआन की तिलावत की। शुक्रवार को पहला रोजा होने के चलते मस्जिदों में भीड़ उमड़ी। शुक्रवार को रमजान माह का पहला रोजा रखा गया। रोजा की पहली सहरी के चलते मुस्लिम लोग रात के अंतिम से पहर ढाई-तीन बजे ही जाग गए। मस्जिदों से लाउडस्पीकर से जगाने का ऐलान होता रहा। रोजा रखने वाले लोगों ने एक-दूसरे को मोबाइल फोन से

काल करके जगाया। महिलाओं ने तड़के सेवइयां, सूतफेनी और खीर आदि पकवान बनाए। सहरी समाप्त होने पर जगह-जगह मस्जिदों में गोले दागे गए। सहरी के बाद मुस्लिमों ने खाना-पीना छोड़ पहला रोजा शुरू किया। शुक्रवार को पहला रोजा पड़ने के चलते नमाज के वक्त घुमना स्थित जामा मस्जिद, सुनहरी मस्जिद, जिन्नातों वाली मस्जिद और शमसेर खानी आदि मस्जिदें रोजादारों से खचाखच भरी नजर आईं। रोजादारों ने नमाज अदा कर कुरआन की तिलावत की। महिलाओं ने घर में नमाज और कुरआन की तिलावत की।

शमसेर खानी मस्जिद में सामूहिक इफ्तार की रिवायत
शहर की शमसेर खानी मस्जिद कई यादें अपनी जेहन में समेटे है। इससे मुकद्दस रमजान की तमाम यादें जुड़ी हैं। नवाबी काल की ऐतिहासिक मस्जिद में 19वें रोजे को शमसेर खां का शहादत दिवस मनाया जाता है। इस दिन सामूहिक रोजा इफ्तार की रिवायत वर्षों से चली आ रही है। इन दिनों नमाजियों की सुविधा के लिए मस्जिद का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। हरे-भरे वृक्ष ईको फ्रैंडली का पैगाम देते हैं।

नगर क्षेत्र की शमसेर खानी मस्जिद की बुनियाद नवाब बंगश के प्रिय सिपहसालार शमसेर खां ने नवाब कायम खां के कार्यकाल में वर्ष 1747 में रखी थी। नवाब की मौत 1748 में हो गई। तब उनके खानदानी दुश्मन सफदर जंग ने शमसेर खां को शहीद कर दिया और मस्जिद का निर्माण अधूरा रह गया। काफी अर्से बाद लोगों का नूर खोती इबादतगाह की तरफ गया और उन्होंने इसका जीर्णोद्धार शुरू करा दिया। धूप, तपिश से बचाव के लिए दालान में टिन शेड डलवाया गया है।

दो भागों में बंटी मस्जिद में आधे हिस्से में कब्रिस्तान है, जिसमें बुजुर्ग हजरत नूर अली और शमसेर खां और उनके बेटे हसन अली खां के मजार हैं। इसके अलावा भी यहां कब्रें हैं। मस्जिद में करीब 400 नमाजी एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं। वजू के लिए सबमर्र्िसबल पंप लगाया गया है। पानी की टंकी भी रखी है। नीम, शीशम, शहतूत, अंजीर के अलावा

बेला, गुलाब जैसे पौधों से मस्जिद का बागीचा गुलजार है। यहां मदरसा भी है जहां 2 बजे पढ़ाई होती है। सूफी बच्चे दीन की तालीम हासिल करने आते हैं। मौजूदा वक्त में तरावीह की नमाज में हाफिज मालिक कुरआन शरीफ सुनाते हैं और पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं।

फलों के दाम छूने लगे आसमान
रमजान शुरू होते ही बाजार में फलों के दाम आसमान छूने लगे हैं। खजूर और जूस की डिमांड बढ़ गई है। पैकिंग खजूर 200 से 220 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार फलों के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। रमजान शुरू होते ही खजूर, केला, सेब, अंगूर, मुसम्मी, संतरा, अनार और अनन्नास आदि फल बाजार में सज गए हैं। इस महीने सबसे ज्यादा डिमांड खजूर की होती है। बाजार में खुले खजूर के अलावा सऊदी अरब का पैक्ड खजूर भी

उपलब्ध है। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस बार फलों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। खुला खजूर जहां 120 से 130 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। वहीं पैक्ड खजूर 25 से लेकर 200 रुपये तक की पैकिंग में उपलब्ध है। अंगूर के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हुए हैं। अंगूर 200 रुपये प्रति किलो है। अनार, मुसम्मी और अनानास जूस की डिमांड भी बढ़ गई है। बाजारों में सेब, संतरा और अनार आदि फलों के रेडीमेड जूस भी सज गए हैं। हालांकि संपन्न लोग ही पैक जूस

का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। गढ़ी कोहना निवासी रोजेदार निजामुद्दीन कहते हैं कि पैकिंग रियल जूस महंगा पड़ता है, जबकि खुला जूस सस्ता। महादेवी वर्मा मूर्ति के निकट फल की ठेली लगाए रामकिशन कहते हैं कि उनके पास सऊदी अरब का पैकिंग खजूर उपलब्ध है। आधा किलो पैकिंग खजूर 100 रुपये और 25 रुपये का 200 ग्राम का खजूर का पैकेट है। वह कहते हैं कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल रमजान में फलों पर 20 से 25 प्रतिशत महंगाई बढ़ी है।
 
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