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Farrukhabad News: लोहिया अस्पताल में डॉक्टर न मिलने से इलाज में परेशानी
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फोटो-27, लोहिया अस्पताल की ओपीडी में डॉ. नीरज वर्मा के कमरे के बाहर मरीजों की लगी भीड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। हर सोमवार की तरह आज भी लोहिया पुरुष अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही, मगर डॉक्टर नदारद रहे। एक आर्थो और ईएनटी सर्जन दिव्यांग बोर्ड में गए, तो दूसरे सर्जन के कमरे में मरीजों की धक्का-मुक्की होती रही। फिजीशियन ब्लड बैंक में काम निपटाने चले गए। लिहाजा मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोहिया अस्पताल की ओपीडी में सुबह नौ बजे से ही ऑनलाइन पंजीकरण और पर्चा काउंटरों पर लंबी कतारें लग गई।आर्थो सर्जन डॉ. रिषिकांत वर्मा और ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार दिव्यांग बोर्ड ड्यूटी करने चले गए। जबकि सर्जन डॉ. रोहित तिवारी 26 सितंबर तक अवकाश पर हैं। दूसरे सर्जन डॉ. अमरनाथ के सामने ओपीडी के अलावा ओटी भी करनी थी।
उधर, खांसी, जुकाम, बुखार आदि के मरीजों को देखने वाले डॉ. प्रवीन कुमार ब्लड बैंक में काम निपटाने चले गए। लिहाजा मरीज ओपीडी में भटकने को मजबूर हो गए। ओपीडी में डॉक्टर न मिलने पर लोग इमरजेंसी में पहुंचे। वहां कई लोगों को इलाज संभव हो सका। प्रभारी सीएमएस डॉ. प्रभात वर्मा ने बताया कि दिव्यांग बोर्ड जाना पड़ेगा। एक डॉक्टर अवकाश पर हैं। उनकी कोशिश है कि हर मरीज को दवा मिले।
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फर्रुखाबाद। हर सोमवार की तरह आज भी लोहिया पुरुष अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही, मगर डॉक्टर नदारद रहे। एक आर्थो और ईएनटी सर्जन दिव्यांग बोर्ड में गए, तो दूसरे सर्जन के कमरे में मरीजों की धक्का-मुक्की होती रही। फिजीशियन ब्लड बैंक में काम निपटाने चले गए। लिहाजा मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोहिया अस्पताल की ओपीडी में सुबह नौ बजे से ही ऑनलाइन पंजीकरण और पर्चा काउंटरों पर लंबी कतारें लग गई।आर्थो सर्जन डॉ. रिषिकांत वर्मा और ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार दिव्यांग बोर्ड ड्यूटी करने चले गए। जबकि सर्जन डॉ. रोहित तिवारी 26 सितंबर तक अवकाश पर हैं। दूसरे सर्जन डॉ. अमरनाथ के सामने ओपीडी के अलावा ओटी भी करनी थी।
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उधर, खांसी, जुकाम, बुखार आदि के मरीजों को देखने वाले डॉ. प्रवीन कुमार ब्लड बैंक में काम निपटाने चले गए। लिहाजा मरीज ओपीडी में भटकने को मजबूर हो गए। ओपीडी में डॉक्टर न मिलने पर लोग इमरजेंसी में पहुंचे। वहां कई लोगों को इलाज संभव हो सका। प्रभारी सीएमएस डॉ. प्रभात वर्मा ने बताया कि दिव्यांग बोर्ड जाना पड़ेगा। एक डॉक्टर अवकाश पर हैं। उनकी कोशिश है कि हर मरीज को दवा मिले।
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