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सीएचसी में चार दिन से बिजली गुल, खून की जांच ठप
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पुराना जिला अस्पताल में संचालित सीएचसी में पिछले चार दिन से बिजली आपूर्ति ठप है। इससे खून की जांचें भी नहीं हो पा रही हैं। मशीन न चल पाने से करीब आधा दर्जन खून के नमूने खराब हो गए हैं। कक्ष में अंधेरा होने से मंगलवार को बाहरी कमरे में रखकर मरीजों को दवाई दी गई।
शहीद ले.कमांडर कौशलेंद्र सिंह राठौर चिकत्सालय फतेहगढ़ सीएमओ कार्यालय के निकट पुराना जिला अस्पताल परिसर में संचालित है। यहां की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। अस्पताल में पिछले चार दिन से बिजली गुल है। डाक्टर व कर्मचारियों की शिकायत के बावजूद जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। मंगलवार को बिजली न होने से दवा वितरण कक्ष में अंधेरा था।
इससे महिला फार्मासिस्ट बाहरी कमरे में मेज पर दवाएं रखकर बांट रही थीं। मरीजों के खून की जांच भी नहीं हो पा रही थी। लैब टेक्नीशियन महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शनिवार को उन्होंने खून के छह नमूने लिए थे। बिजली न होने से जांच नहीं हो सकी और नमूने खराब हो गए। वहीं डा.बृजेश मिश्र ने बताया कि अस्पताल में बिजली न होने के संबंध में वह सभी अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। स्टाफ के साथ मरीजों को भी समस्या हो रही है।
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महीनों से बीपी, डायरिया व आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं
शासन से भले ही स्वास्थ्य सेवाओं पर लाखों खर्च हो रहे हों, लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही में कोई कमी नहीं है। सीएमओ को दवाई खरीद का अधिकार होने के बावजूद आवश्यक दवाओं का टोटा है। इसी के चलते निजी अस्पताल व क्लीनिक का धंधा फलफूल रहा है। बारिश में अक्सर बच्चों में डायरिया की बीमारी फैलती है।
हालात यह हैं कि दो माह से सीएचसी पर डायरिया की दवाई ही नहीं हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर संबंधी दवा पिछले माह से नहीं है। आयुर्वेदिक दवाओं की नवंबर 2018 के बाद आपूर्ति ही नहीं की गई। डा.बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि वह दो बार सीएमओ को पत्र भी दे चुके हैं, लेकिन दवाएं अभी तक उपलब्ध नहीं हुईं।
एंटी डायरियल (बच्चों का सीरप) व ब्लड प्रेशर की दवाएं तो जिले में ही नहीं है। इस संबंध में भी वह कई बार अधिकारियों को मौखिक रूप से जानकारी दे चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.चंद्रशेखर ने बताया कि सीएचसी की बिजली खराब होने के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं दी गई। शाम तक ठीक कराने का प्रयास किया जाएगा। एंटी डायरियल, ब्लडप्रेशर व अन्य दवाएं उपलब्ध न होने की जानकारी कर वह व्यवस्था कराएंगे।
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शहीद ले.कमांडर कौशलेंद्र सिंह राठौर चिकत्सालय फतेहगढ़ सीएमओ कार्यालय के निकट पुराना जिला अस्पताल परिसर में संचालित है। यहां की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। अस्पताल में पिछले चार दिन से बिजली गुल है। डाक्टर व कर्मचारियों की शिकायत के बावजूद जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। मंगलवार को बिजली न होने से दवा वितरण कक्ष में अंधेरा था।
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इससे महिला फार्मासिस्ट बाहरी कमरे में मेज पर दवाएं रखकर बांट रही थीं। मरीजों के खून की जांच भी नहीं हो पा रही थी। लैब टेक्नीशियन महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शनिवार को उन्होंने खून के छह नमूने लिए थे। बिजली न होने से जांच नहीं हो सकी और नमूने खराब हो गए। वहीं डा.बृजेश मिश्र ने बताया कि अस्पताल में बिजली न होने के संबंध में वह सभी अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। स्टाफ के साथ मरीजों को भी समस्या हो रही है।
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महीनों से बीपी, डायरिया व आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं
शासन से भले ही स्वास्थ्य सेवाओं पर लाखों खर्च हो रहे हों, लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही में कोई कमी नहीं है। सीएमओ को दवाई खरीद का अधिकार होने के बावजूद आवश्यक दवाओं का टोटा है। इसी के चलते निजी अस्पताल व क्लीनिक का धंधा फलफूल रहा है। बारिश में अक्सर बच्चों में डायरिया की बीमारी फैलती है।
हालात यह हैं कि दो माह से सीएचसी पर डायरिया की दवाई ही नहीं हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर संबंधी दवा पिछले माह से नहीं है। आयुर्वेदिक दवाओं की नवंबर 2018 के बाद आपूर्ति ही नहीं की गई। डा.बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि वह दो बार सीएमओ को पत्र भी दे चुके हैं, लेकिन दवाएं अभी तक उपलब्ध नहीं हुईं।
एंटी डायरियल (बच्चों का सीरप) व ब्लड प्रेशर की दवाएं तो जिले में ही नहीं है। इस संबंध में भी वह कई बार अधिकारियों को मौखिक रूप से जानकारी दे चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.चंद्रशेखर ने बताया कि सीएचसी की बिजली खराब होने के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं दी गई। शाम तक ठीक कराने का प्रयास किया जाएगा। एंटी डायरियल, ब्लडप्रेशर व अन्य दवाएं उपलब्ध न होने की जानकारी कर वह व्यवस्था कराएंगे।