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आलू में आधी लागत भी नहीं निकल रही
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सातनपुर मंडी में आलू साफ करते पल्लेदार। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी में नई आलू की आमद तो बढ़ी है लेकिन भाव काफी गिर गया है। गुरुवार को भाव 251 से 361 रुपये प्रति बोरी रहा। किसानों का कहना है कि इस भाव में आधी लागत भी नहीं निकल रही है।
किसानों का कहना है कि अक्तूबर में हुई भीषण बारिश के कारण आलू की उपज आधी रह गई है। मंडी में गुरुवार को दस हजार बोरी आलू पहुंचा। बड़े साइज का अच्छा आलू 361 रुपये और छोटे साइज का आलू 251 रुपये बोरी (50 किलो) के हिसाब से बिका। एक बीघे में आलू 15 बोरी तक ही निकल रहा है। 300 रुपये बोरी के भाव में बिकने पर किसान को 4500 रुपये ही मिलेेेंगे जबकि प्रति बीघा लागत 10 हजार रुपये तक आई है।
5500 रुपये प्रति बीघा घाटा
याकूतगंज के किसान पंकज गुप्ता ने बताया कि एक बीघे खेत में 1200 रुपये की डीएपी, 270 रुपये की यूरिया, 3000 रुपये का बीज और 500 की दवा डाली। जोताई-बुवाई पर 800 रुपये, सिंचाई पर 1000, खोदाई पर 1000 और मंडी तक का भाड़ा 300 रुपये लग रहा है। इस हिसाब से प्रति बीघा 8070 रुपये खर्च हुए हैं। अगर किसान की मेहनत के दो हजार रुपये भी लगाए जाएं तो लागत 10 हजार से ऊपर है। बीघे में अधिकतम 15 बोरी आलू ही निकल रहा है। इस समय जो भाव चल रहा है उसमें 5500 रुपये तक ही मिल रहे हैं।
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आलू गुणवत्तापूर्ण न होने से भाव गिरा
आलू आढ़ती परशुराम राजपूत ने बताया कि गुरुवार को तीन किसान 225 बोरी आलू लाए थे। आलू 321 से 341 रुपये प्रति बोरी के भाव से बिका। आलू में चमक नहीं थी। आलू की गुणवत्ता ठीक न होने से बाहरी व्यापारी कम आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों पर ही निर्भर होने से भाव नहीं बढ़ पा रहे हैं।
दूसरे प्रदेशों से मांग नहीं आ रही : सुधीर
आलू आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष सुधीर वर्मा रिंकू का कहना है कि अभी तक शीतगृहों में आलू भरा होने से नए आलू का भाव नहीं बढ़ा। खेतों में गुणवत्तापूर्ण आलू न निकलने से दूसरे प्रदेशों से आलू की मांग नहीं आ रही है। पंजाब का आलू बेहतर होने से उसकी डिमांड है। इससे सातनपुर मंडी में स्थानीय व्यापारी की आलू की खरीद कर रहे हैं।
आलू के व्यापार में भी घाटा
आलू व्यापारी सुभाष कटियार ने बताया कि 720 रुपये प्रति क्विंटल में आलू खरीदा। मंडी से लेकर बिहार पहुंचाने तक 1000 रुपये प्रति क्विंटल खर्च हुए और आलू 950 रुपये क्विंटल में ही बिका। 150 रुपये क्विंटल घाटा हुआ है। प्रमुख की गुणवत्ता ठीक न होने से भाव नहीं मिल रहा है।
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किसानों का कहना है कि अक्तूबर में हुई भीषण बारिश के कारण आलू की उपज आधी रह गई है। मंडी में गुरुवार को दस हजार बोरी आलू पहुंचा। बड़े साइज का अच्छा आलू 361 रुपये और छोटे साइज का आलू 251 रुपये बोरी (50 किलो) के हिसाब से बिका। एक बीघे में आलू 15 बोरी तक ही निकल रहा है। 300 रुपये बोरी के भाव में बिकने पर किसान को 4500 रुपये ही मिलेेेंगे जबकि प्रति बीघा लागत 10 हजार रुपये तक आई है।
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5500 रुपये प्रति बीघा घाटा
याकूतगंज के किसान पंकज गुप्ता ने बताया कि एक बीघे खेत में 1200 रुपये की डीएपी, 270 रुपये की यूरिया, 3000 रुपये का बीज और 500 की दवा डाली। जोताई-बुवाई पर 800 रुपये, सिंचाई पर 1000, खोदाई पर 1000 और मंडी तक का भाड़ा 300 रुपये लग रहा है। इस हिसाब से प्रति बीघा 8070 रुपये खर्च हुए हैं। अगर किसान की मेहनत के दो हजार रुपये भी लगाए जाएं तो लागत 10 हजार से ऊपर है। बीघे में अधिकतम 15 बोरी आलू ही निकल रहा है। इस समय जो भाव चल रहा है उसमें 5500 रुपये तक ही मिल रहे हैं।
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आलू गुणवत्तापूर्ण न होने से भाव गिरा
आलू आढ़ती परशुराम राजपूत ने बताया कि गुरुवार को तीन किसान 225 बोरी आलू लाए थे। आलू 321 से 341 रुपये प्रति बोरी के भाव से बिका। आलू में चमक नहीं थी। आलू की गुणवत्ता ठीक न होने से बाहरी व्यापारी कम आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों पर ही निर्भर होने से भाव नहीं बढ़ पा रहे हैं।
दूसरे प्रदेशों से मांग नहीं आ रही : सुधीर
आलू आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष सुधीर वर्मा रिंकू का कहना है कि अभी तक शीतगृहों में आलू भरा होने से नए आलू का भाव नहीं बढ़ा। खेतों में गुणवत्तापूर्ण आलू न निकलने से दूसरे प्रदेशों से आलू की मांग नहीं आ रही है। पंजाब का आलू बेहतर होने से उसकी डिमांड है। इससे सातनपुर मंडी में स्थानीय व्यापारी की आलू की खरीद कर रहे हैं।
आलू के व्यापार में भी घाटा
आलू व्यापारी सुभाष कटियार ने बताया कि 720 रुपये प्रति क्विंटल में आलू खरीदा। मंडी से लेकर बिहार पहुंचाने तक 1000 रुपये प्रति क्विंटल खर्च हुए और आलू 950 रुपये क्विंटल में ही बिका। 150 रुपये क्विंटल घाटा हुआ है। प्रमुख की गुणवत्ता ठीक न होने से भाव नहीं मिल रहा है।