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Farrukhabad News: आलू ने दिया दर्द, ''हरा सोना'' बन गई दवा
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फर्रुखाबाद/कमालगंज। साल दर साल आलू के अनिश्चित भाव व मंदी की मार से किसान आहत हैं। ऐसे में किसानों के लिए ''हरा सोना'' दर्द की दवा बन सकता है। ऐसा ही रास्ता दिखाया है कमालगंज के बसहा नगला निवासी आलू बीज उत्पादक किसान ने। यह हरा सोना नेपियर घास का चारा है। एक रुपये किलो लागत और चार रुपये किलो बिक्री हो रही है। अन्य किसान भी इसके खेती के लिए आगे आए हैं।
भारत की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट फर्रुखाबाद में इस बार भी मंदी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह तोड़ दिया। आलू बीज उत्पादक प्रगतिशील किसान मन्नी सिंह ने दक्षिण के राज्यों व पंजाब के किसानों से प्रभावित होकर छह एकड़ में हरे चारे की हाईब्रिड नेपियर घास की फसल की है। भूसा के साथ खिलाने पर उनके पालतू पशुओं में स्वास्थ्य व दूध उत्पादन में भी अत्यधिक सुधार हुआ।
खुद के पशुओं को हरा चारा खिलाने के साथ ही उन्होंने पशुपालकों व गो संरक्षण केंद्रों को चारा बेचकर आलू के नुकसान से राहत का रास्ता भी खोल लिया। ब्लाॅक क्षेत्र के गो संरक्षण केंद्र हसनापुर, सिंधौली व नगर पंचायत की कान्हा गोशाला को नियमित रूप से हरा चारा बेचा जा रहा है। जहां बाजार में भूसा नौ रुपये किलो है। हरा चारा चार रुपये किलो ही है। इससे गोशाला के पशु सेहतमंद हो रहे हैं। गोशालाओं का पैसा भी बच रहा। (संवाद)
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अन्य किसान भी प्रभावित
क्षेत्र के अन्य किसान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। गगनी के किसान जीतू, रामपुर माझगांव के रवि, खुदागंज के राहुल, कैंटहा के अवधेश सिंह आदि ने भी मन्नी सिंह से प्रभवित होकर चारे की बेड़ गाड़ी है। एक बीघा खेत में करीब 2000 पौधे लगाए जाते हैं। अधिक या कम संख्या के आधार पर तीन से पांच रुपये पौधा की बेड़ बिक्री हो रही है।
सूखा पशु आहार व उद्योगों के लिए ईंधन भी
उन्नतिशील किसान मन्नी सिंह कहते हैं कि उन्होंने देहरादून से हाईब्रिड नेपियर घास की स्टिक मंगाकर गोबर खाद डालकर बिजाई की। उनके पैतृक गांव बसहा नगला में हरा सोना लहलहा रहा है। इसमें 16 से 23 प्रतिशत प्रोटीन, 10-10 प्रतिशत शुगर व फैट जैसे तत्व माने जाते हैं। हरा चारा पशुओं के लिए रामबाण तो है ही, प्लांट लगाकर सूखे चारे का पाउडर बनाकर इससे नेपियर ग्रास पैलेट भी बनाए जा सकते हैं। ये सर्वाधिक पोषक तत्वों से भरपूर सूखा चारा होगा। साथ ही धुएं चिमनियों वाले कारखानों, ईंट भट्टों आदि में यह पैलेट ईंधन ( फ्यूल) के रूप में भी उपयोग हो सकते हैं।
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भारत की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट फर्रुखाबाद में इस बार भी मंदी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह तोड़ दिया। आलू बीज उत्पादक प्रगतिशील किसान मन्नी सिंह ने दक्षिण के राज्यों व पंजाब के किसानों से प्रभावित होकर छह एकड़ में हरे चारे की हाईब्रिड नेपियर घास की फसल की है। भूसा के साथ खिलाने पर उनके पालतू पशुओं में स्वास्थ्य व दूध उत्पादन में भी अत्यधिक सुधार हुआ।
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खुद के पशुओं को हरा चारा खिलाने के साथ ही उन्होंने पशुपालकों व गो संरक्षण केंद्रों को चारा बेचकर आलू के नुकसान से राहत का रास्ता भी खोल लिया। ब्लाॅक क्षेत्र के गो संरक्षण केंद्र हसनापुर, सिंधौली व नगर पंचायत की कान्हा गोशाला को नियमित रूप से हरा चारा बेचा जा रहा है। जहां बाजार में भूसा नौ रुपये किलो है। हरा चारा चार रुपये किलो ही है। इससे गोशाला के पशु सेहतमंद हो रहे हैं। गोशालाओं का पैसा भी बच रहा। (संवाद)
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अन्य किसान भी प्रभावित
क्षेत्र के अन्य किसान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। गगनी के किसान जीतू, रामपुर माझगांव के रवि, खुदागंज के राहुल, कैंटहा के अवधेश सिंह आदि ने भी मन्नी सिंह से प्रभवित होकर चारे की बेड़ गाड़ी है। एक बीघा खेत में करीब 2000 पौधे लगाए जाते हैं। अधिक या कम संख्या के आधार पर तीन से पांच रुपये पौधा की बेड़ बिक्री हो रही है।
सूखा पशु आहार व उद्योगों के लिए ईंधन भी
उन्नतिशील किसान मन्नी सिंह कहते हैं कि उन्होंने देहरादून से हाईब्रिड नेपियर घास की स्टिक मंगाकर गोबर खाद डालकर बिजाई की। उनके पैतृक गांव बसहा नगला में हरा सोना लहलहा रहा है। इसमें 16 से 23 प्रतिशत प्रोटीन, 10-10 प्रतिशत शुगर व फैट जैसे तत्व माने जाते हैं। हरा चारा पशुओं के लिए रामबाण तो है ही, प्लांट लगाकर सूखे चारे का पाउडर बनाकर इससे नेपियर ग्रास पैलेट भी बनाए जा सकते हैं। ये सर्वाधिक पोषक तत्वों से भरपूर सूखा चारा होगा। साथ ही धुएं चिमनियों वाले कारखानों, ईंट भट्टों आदि में यह पैलेट ईंधन ( फ्यूल) के रूप में भी उपयोग हो सकते हैं।