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Farrukhabad News: फुंक रहा 75.64 लाख का डाटा, गुरु जी रजिस्टर पर घिस रहे कलम
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फर्रुखाबाद। परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज दर्ज करने के लिए टैबलेट के डाटा पर प्रत्येक वर्ष 75,64,800 रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी गुरुजी रजिस्टर पर कलम घिसकर उपस्थिति दर्ज करने में जुटे हैं। कुछ विद्यालयाें में तो टैबलेट डिब्बे में पैक हैं तो कई शिक्षक उन्हें घर ले गए। इससे उनके बच्चे घर में खेल रहे हैं। विभाग की 22 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 1,576 में केवल 645 विद्यालयों में ही बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की गई।
शिक्षा के स्तर में सुधार हो, इसके लिए शिक्षकों के साथ छात्र-छात्राओं की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज कराने की व्यवस्था की गई। वर्ष 2022-23 व 2023-24 में 1,576 परिषदीय विद्यालयों के लिए 3096 टैबलेट शासन से आए थे। कुछ विद्यालयों में दो-दो तो बाकी में एक-एक टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही टैबलेट चलाने का शिक्षकाें को प्रशिक्षण भी दिया गया था। इन टैबलेट के लिए एयरटेल की सिम भी दी गई है।
इसके रिचार्ज के लिए कंपोजिट ग्रांट से 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से प्रत्येक विद्यालय से 4800 रुपये प्रति वर्ष काट लिए जाते हैं। इस तरह सभी 1,576 विद्यालयों को इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराने के लिए 75,64,800 रुपये प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं, पर अधिकांश विद्यालयों में ये टैबलेट इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
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किसी भी विद्यालय में शिक्षक तो अपनी हाजिरी ऑनलाइन लगाते ही नहीं हैं। कुछ विद्यालयों में बच्चों की हाजिरी ऑनलाइन भरने की खानापूरी हो रही है। इसके चलते ही कई विद्यालयों में ये टैबलेट अलमारी में बंद रखे हैं या शिक्षक अपने घर उठा ले गए।
मास्साहब के घरों में पहुंच गए टैबलेट
- प्राथमिक विद्यालय जमापुर में दो टैबलेट दिए गए थे, अब दोनों नहीं हैं। प्रधानाध्यापक सुषमा पाठक ने बताया कि एक टैबलेट में नेटवर्क नहीं आ रहा है, जबकि दूसरा बिजली न आने से चार्ज करने के लिए घर ले जाया गया है। प्राथमिक विद्यालय तीसराम की मड़ैया के टैबलेट प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के घर पर रखे होने की जानकारी प्रधानाध्यापक श्याम कुमार ने दी। बच्चों की हाजिरी भी ऑनलाइन दर्ज नहीं हो रही है। जूनियर हाईस्कूल जगतपुर में बाढ़ के दौरान टैबलेट घर ले जाने की बात कही गई। प्रधानाध्यापक नन्हीं देवी ने बताया कि बाढ़ से पहले मोबाइल से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होती थी। इस समय रजिस्टर पर ही दर्ज हो रही है।
जूनियर हाईस्कूल रामपुर में भी दो टैबलेट मिले हैं। एक प्रधानाध्यापक सत्यवती व दूसरा सहायक अध्यापक फूल चंद्र को मिला है लेकिन विद्यालय में एक भी टैबलेट नहीं था। प्रधानाध्यापक ने बताया कि बाढ़ के कारण घर पर ले गए थे। प्राथमिक विद्यालय चित्रकूट में भी दो टैबलेट हैं। एक टैबलेट खराब बताया गया। जूनियर हाईस्कूल खानपुर में एक टैबलेट खराब होने और दूसरा बैग गिरने से गुम हो गया। प्राथमिक विद्यालय खानपुर में टैबलेट पर काम किया जा रहा था। टैबलेट के माध्यम से उपस्थिति दर्ज किए जाने की बात शिक्षा मित्र आरती त्रिपाठी ने बताई।
3096 टैबलेट 2.47 करोड़ के होने का अनुमान
अधिकांश विद्यालयों में जिस कंपनी के टैबलेट दिए गए हैं, उसकी बाजार में कीमत करीब आठ हजार रुपये है। इस हिसाब से परिषदीय विद्यालयों के लिए आए 3096 टैबलेट की कीमत 2,47,68,000 रुपये होने का अनुमान है। इतना धन खर्च होने के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो सका।
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50 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है। तकनीकी समस्या से ऑनलाइन हाजिरी लगाने में दिक्कत आ रही है। उसे भी दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।
विश्वनाथ प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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शिक्षा के स्तर में सुधार हो, इसके लिए शिक्षकों के साथ छात्र-छात्राओं की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज कराने की व्यवस्था की गई। वर्ष 2022-23 व 2023-24 में 1,576 परिषदीय विद्यालयों के लिए 3096 टैबलेट शासन से आए थे। कुछ विद्यालयों में दो-दो तो बाकी में एक-एक टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही टैबलेट चलाने का शिक्षकाें को प्रशिक्षण भी दिया गया था। इन टैबलेट के लिए एयरटेल की सिम भी दी गई है।
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इसके रिचार्ज के लिए कंपोजिट ग्रांट से 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से प्रत्येक विद्यालय से 4800 रुपये प्रति वर्ष काट लिए जाते हैं। इस तरह सभी 1,576 विद्यालयों को इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराने के लिए 75,64,800 रुपये प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं, पर अधिकांश विद्यालयों में ये टैबलेट इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
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किसी भी विद्यालय में शिक्षक तो अपनी हाजिरी ऑनलाइन लगाते ही नहीं हैं। कुछ विद्यालयों में बच्चों की हाजिरी ऑनलाइन भरने की खानापूरी हो रही है। इसके चलते ही कई विद्यालयों में ये टैबलेट अलमारी में बंद रखे हैं या शिक्षक अपने घर उठा ले गए।
मास्साहब के घरों में पहुंच गए टैबलेट
- प्राथमिक विद्यालय जमापुर में दो टैबलेट दिए गए थे, अब दोनों नहीं हैं। प्रधानाध्यापक सुषमा पाठक ने बताया कि एक टैबलेट में नेटवर्क नहीं आ रहा है, जबकि दूसरा बिजली न आने से चार्ज करने के लिए घर ले जाया गया है। प्राथमिक विद्यालय तीसराम की मड़ैया के टैबलेट प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के घर पर रखे होने की जानकारी प्रधानाध्यापक श्याम कुमार ने दी। बच्चों की हाजिरी भी ऑनलाइन दर्ज नहीं हो रही है। जूनियर हाईस्कूल जगतपुर में बाढ़ के दौरान टैबलेट घर ले जाने की बात कही गई। प्रधानाध्यापक नन्हीं देवी ने बताया कि बाढ़ से पहले मोबाइल से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होती थी। इस समय रजिस्टर पर ही दर्ज हो रही है।
जूनियर हाईस्कूल रामपुर में भी दो टैबलेट मिले हैं। एक प्रधानाध्यापक सत्यवती व दूसरा सहायक अध्यापक फूल चंद्र को मिला है लेकिन विद्यालय में एक भी टैबलेट नहीं था। प्रधानाध्यापक ने बताया कि बाढ़ के कारण घर पर ले गए थे। प्राथमिक विद्यालय चित्रकूट में भी दो टैबलेट हैं। एक टैबलेट खराब बताया गया। जूनियर हाईस्कूल खानपुर में एक टैबलेट खराब होने और दूसरा बैग गिरने से गुम हो गया। प्राथमिक विद्यालय खानपुर में टैबलेट पर काम किया जा रहा था। टैबलेट के माध्यम से उपस्थिति दर्ज किए जाने की बात शिक्षा मित्र आरती त्रिपाठी ने बताई।
3096 टैबलेट 2.47 करोड़ के होने का अनुमान
अधिकांश विद्यालयों में जिस कंपनी के टैबलेट दिए गए हैं, उसकी बाजार में कीमत करीब आठ हजार रुपये है। इस हिसाब से परिषदीय विद्यालयों के लिए आए 3096 टैबलेट की कीमत 2,47,68,000 रुपये होने का अनुमान है। इतना धन खर्च होने के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो सका।
50 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है। तकनीकी समस्या से ऑनलाइन हाजिरी लगाने में दिक्कत आ रही है। उसे भी दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।
विश्वनाथ प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी