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मुसीबतों के बीच पुलिस ने दिखाई मानवीयता
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आगरा (मैनपुरी) के ध्यानार्थ ---- फोटो-14 मुसीबतों के बीच पुलिस ने दिखाई मानवीयता डेढ़ सौ किमी चले पैदल,
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। दुश्वारियां ऐसी कि पैदल चलते-चलते पत्नी, बच्चे और खुद के पैरों में छाले पड़ गए। घर पहुंचना था तो चलना मजबूरी। कदम-दर कदम मुसीबतें रहीं, मगर पुलिस के भीतर वाकई मानवता दिखी। कई जगह वाहनों पर बैठाया। खाना का जिम्मा तो पुलिस के हवाले ही रहा हो। चाय-नाश्ता भी कई स्थानों पर मिलता रहा। पुलिस ने बरेली से रोडवेज बस स्टैंड तक पहुंचा दिया। थकावट इतनी कि बार-बार आंख बंद हो जाती है।
मैनपुरी के नगला रती निवासी सुनील दिसंबर में हरिद्वार मजदूरी करने गए थे। दस साल के बेटे साइल और पत्नी ऊषा को भी साथ ले गए। उन्हें क्या पता था कि लॉकडाउन में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। मजबूर होकर 17 मई की रात साढ़े आठ बजे पैदल घर के लिए चल दिए। बिजनौर तक न तो कोई वाहन मिला और न ही किसी ने रोटी पूछी। मगर जैसे ही आगे बढ़े, तो खाने-पीने का पूरा जिम्मा मानों पुलिस ने उठा लिया हो। ऊषा कहती हैं कि पुलिस तो उनके लिए भगवान ही बन गई। कहीं ट्रैक्टर, कहीं ट्रक आदि को रोककर उसमें बैठा देते। रात में सड़क किनारे गांव के लोग शरण दे देते।
बरेली में मंगलवार रात को पुलिस ने रोका और रोडवेज बस से बुधवार देर रात फर्रुखाबाद बस स्टेशन पहुंच गया। तब से यहीं समय काट रहा है। अब घर तक जाने के लिए बस का इंतजार है। ऊषा तो बार-बार पुलिस को ही शुक्रिया कहती रहीं।
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मैनपुरी के नगला रती निवासी सुनील दिसंबर में हरिद्वार मजदूरी करने गए थे। दस साल के बेटे साइल और पत्नी ऊषा को भी साथ ले गए। उन्हें क्या पता था कि लॉकडाउन में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। मजबूर होकर 17 मई की रात साढ़े आठ बजे पैदल घर के लिए चल दिए। बिजनौर तक न तो कोई वाहन मिला और न ही किसी ने रोटी पूछी। मगर जैसे ही आगे बढ़े, तो खाने-पीने का पूरा जिम्मा मानों पुलिस ने उठा लिया हो। ऊषा कहती हैं कि पुलिस तो उनके लिए भगवान ही बन गई। कहीं ट्रैक्टर, कहीं ट्रक आदि को रोककर उसमें बैठा देते। रात में सड़क किनारे गांव के लोग शरण दे देते।
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बरेली में मंगलवार रात को पुलिस ने रोका और रोडवेज बस से बुधवार देर रात फर्रुखाबाद बस स्टेशन पहुंच गया। तब से यहीं समय काट रहा है। अब घर तक जाने के लिए बस का इंतजार है। ऊषा तो बार-बार पुलिस को ही शुक्रिया कहती रहीं।
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