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पीएसी जवानों से विवाद, नाविकों ने की हड़ताल
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Thu, 02 Feb 2017 11:26 PM IST
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श्रीरामनगरयिा मेला में हड़ताल के दौरान गंगातट पर खड़ी
पीएसी जवानों से हुए विवाद से नाराज नाविकों ने हड़ताल कर दी। दोनों ओर से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप किए गए। मेला एसओ ने दोनों पक्षों को सुनकर मामले को शांत कराया। दोपहर तक रही हड़ताल से श्रद्धालु परेशान रहे।
नाविकों ने मारपीट का भी आरोप लगाया, जिसे जवानों ने झूठा बताया है।
मेला श्रीरामनगरिया में गंगास्नान के दौरान कोई अनहोनी न हो इसके लिए पीएसी की फ्लड कंपनी को तैनात किया गया है। बुधवार शाम पीएसी के जवानों ने नाव में अधिक सवारियां बैठा रहे नाविकों को रोका।
कहा कि पांच से अधिक सवारियां बैठाने से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। पीएसी जवानों और नाविकों की तकरार के बाद दोनों पक्ष वहां से चले गए। सुबह एकाएक नाविकों ने गंगा में नाव नहीं उतारीं। इससे गंगापार करने वाले श्रद्धालुओं को काफी असुविधा हुई। धीरे-धीरे मामला मेला एसओ के पास पहुंचा।
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मेला एसओ महेंद्र त्रिपाठी ने मौके पर जाकर नाविकों से बातचीत की। नाविकों का कहना था कि कुछ जवान नाव को नंबर से ले जाने और सवारियां बैठाने के एवज में 20 रुपये की मांग करते हैं। जो नाविक रुपया नहीं देते हैं, उन्हें सवारियां नहीं बैठाने दी जातीं हैं।
जबकि पीएसी के जवानों का कहना था कि एक नाव में 10 ज्यादा सवारियां बैठाकर नाव को गंगा के उस पार ले जाया जाता है। इससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी फ्लड कंपनी की होगी। पीएसी जवानों का कहना था कि नाव में पांच सवारियाें से ज्यादा बैठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जबकि नाविक जुम्मन, निजाम, श्याम बाबू, इरफान, गुल मोहम्मद, साबिर, बंदे हसन का कहना था कि उनकी नाव में 10 सवारियां बैठाने की क्षमता है। और वह कई बरसों से 10 से 12 सवारियां बैठाकर गंगा के पार जाते और आते हैं।
इससे कम सवारियां बैठाने पर किराया बढ़ाना पडे़गा। एसओ मेला ने कहा कि श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। इन्होंने नाविकों से कहा कि नाव में ज्यादा सवारियां नहीं बैठाएं। इसके बाद करीब दोपहर 12 बजे हड़ताल समाप्त हो सकी।
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नाविकों ने मारपीट का भी आरोप लगाया, जिसे जवानों ने झूठा बताया है।
मेला श्रीरामनगरिया में गंगास्नान के दौरान कोई अनहोनी न हो इसके लिए पीएसी की फ्लड कंपनी को तैनात किया गया है। बुधवार शाम पीएसी के जवानों ने नाव में अधिक सवारियां बैठा रहे नाविकों को रोका।
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कहा कि पांच से अधिक सवारियां बैठाने से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। पीएसी जवानों और नाविकों की तकरार के बाद दोनों पक्ष वहां से चले गए। सुबह एकाएक नाविकों ने गंगा में नाव नहीं उतारीं। इससे गंगापार करने वाले श्रद्धालुओं को काफी असुविधा हुई। धीरे-धीरे मामला मेला एसओ के पास पहुंचा।
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मेला एसओ महेंद्र त्रिपाठी ने मौके पर जाकर नाविकों से बातचीत की। नाविकों का कहना था कि कुछ जवान नाव को नंबर से ले जाने और सवारियां बैठाने के एवज में 20 रुपये की मांग करते हैं। जो नाविक रुपया नहीं देते हैं, उन्हें सवारियां नहीं बैठाने दी जातीं हैं।
जबकि पीएसी के जवानों का कहना था कि एक नाव में 10 ज्यादा सवारियां बैठाकर नाव को गंगा के उस पार ले जाया जाता है। इससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी फ्लड कंपनी की होगी। पीएसी जवानों का कहना था कि नाव में पांच सवारियाें से ज्यादा बैठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जबकि नाविक जुम्मन, निजाम, श्याम बाबू, इरफान, गुल मोहम्मद, साबिर, बंदे हसन का कहना था कि उनकी नाव में 10 सवारियां बैठाने की क्षमता है। और वह कई बरसों से 10 से 12 सवारियां बैठाकर गंगा के पार जाते और आते हैं।
इससे कम सवारियां बैठाने पर किराया बढ़ाना पडे़गा। एसओ मेला ने कहा कि श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। इन्होंने नाविकों से कहा कि नाव में ज्यादा सवारियां नहीं बैठाएं। इसके बाद करीब दोपहर 12 बजे हड़ताल समाप्त हो सकी।
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