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लोहिया इमरजेंसी के बाहर ऑक्सीजन को 2 घन्टे आहें भर्ती रही महिला
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फर्रुखाबाद। ऑक्सीजन की खातिर एक महिला दो घंटे तक लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी के सामने तड़पती रही। डॉक्टर ने ऑक्सीजन लगाना तो दूर देखने तक कि जरूरत नहीं समझी। उसे एल-2 अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। नाजुक हालत होने के बावजूद उसे एंबुलेंस तक मुहैया नहीं हुई। मजबूर बेटा मां को बाइक पर बीच में बैठाकर कहीं लेकर चला गया।
शमसाबाद थाने के गांव दुबरी चिलसरा निवासी रामसनेह की पत्नी गुड्डी देवी की सोमवार सुबह करीब आठ बजे हालत बिगड़ गई। कुछ ही देर में सांस लेने में दिक्कत होने पर उनका पुत्र सुरेश करीब 10 बजे बाइक से लोहिया अस्पताल लेकर आया।
यहां स्ट्रेचर पर लिटाकर इमरजेंसी में ले गया, तो उसे बिना देखे ही डॉक्टर ने महिला के पुत्र सुरेश से जानकारी लेकर एल -2 अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। मां की हालत काफी गंभीर होती जा रही थी। सुरेश ने बताया कि वह डॉक्टर से ऑक्सीजन लगाने की गुहार करता रहा मगर एक नहीं सुनी गई। हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसके बावजूद एंबुलेंस से एल-2 अस्पताल तक भिजवाने की डॉक्टर ने जरूरत नहीं समझी।
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दोपहर करीब सवा 12 बजे वह एक अन्य परिजन के साथ मां को बाइक पर बीच में बैठाकर लोहिया अस्पताल से लेकर चला गया। काफी पूछने पर भी उसने यह नहीं बताया कि वह कहां जा रहा है। कुछ देर ऑक्सीजन तक न लगाने पर नाखुश पुत्र अस्पताल प्रशासन को कोसता रहा। इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि महिला की हालत बेटे के बताए अनुसार बहुत नाजुक थी। ऐसे के उसे एल-2 ले जाने के लिए कह दिया था। वहीं इलाज संभव था।
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शमसाबाद थाने के गांव दुबरी चिलसरा निवासी रामसनेह की पत्नी गुड्डी देवी की सोमवार सुबह करीब आठ बजे हालत बिगड़ गई। कुछ ही देर में सांस लेने में दिक्कत होने पर उनका पुत्र सुरेश करीब 10 बजे बाइक से लोहिया अस्पताल लेकर आया।
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यहां स्ट्रेचर पर लिटाकर इमरजेंसी में ले गया, तो उसे बिना देखे ही डॉक्टर ने महिला के पुत्र सुरेश से जानकारी लेकर एल -2 अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। मां की हालत काफी गंभीर होती जा रही थी। सुरेश ने बताया कि वह डॉक्टर से ऑक्सीजन लगाने की गुहार करता रहा मगर एक नहीं सुनी गई। हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसके बावजूद एंबुलेंस से एल-2 अस्पताल तक भिजवाने की डॉक्टर ने जरूरत नहीं समझी।
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दोपहर करीब सवा 12 बजे वह एक अन्य परिजन के साथ मां को बाइक पर बीच में बैठाकर लोहिया अस्पताल से लेकर चला गया। काफी पूछने पर भी उसने यह नहीं बताया कि वह कहां जा रहा है। कुछ देर ऑक्सीजन तक न लगाने पर नाखुश पुत्र अस्पताल प्रशासन को कोसता रहा। इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि महिला की हालत बेटे के बताए अनुसार बहुत नाजुक थी। ऐसे के उसे एल-2 ले जाने के लिए कह दिया था। वहीं इलाज संभव था।