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सातनपुर आलू मंडी में बनेंगी दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:19 AM IST
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heaps of potato
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आलू आढ़तियों व किसानों के लिए खुशखबरी। सातनपुर आलू मंडी में आने वाले किसानों और आढ़तियों की सहूलियत के लिए प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। जिलाधिकारी ने मंडी सचिव को विकास कार्यों के प्रस्ताव जल्द बनाकर देने के निर्देश दिए हैं।
जिले की सातनपुर आलू मंडी को एशिया की सबसे बड़ी मंडी कहा जाता है। यहां जिले के अलावा पड़ोसी जिलों से किसान आकर आलू की खरीद-फरोख्त करते हैं। मंडी से अन्य प्रदेशों के साथ पड़ोसी पाकिस्तान, नेपाल में आलू का निर्यात किया जाता है। लेकिन यहां आने वाले किसानों को मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं हो पाती हैं। इसको देखते हुए आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा की मांग पर डीएम मोनिका रानी ने मंडी में विकास कार्य करवाने की सहमति दे दी है। सतीश वर्मा ने बताया कि उन्होंने डीएम से मंडी में 70 नई दुकानें, मंडी की सड़कों की मरम्मत व फुटपाथ पर इंटरलांकिग, मंडी परिषद की रंगाई-पुताई, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने को पांच हैंडपंप, सात आरओ प्लांट, छह सुलभ शौचालय, हाईमास्ट लाइटें और बिजली के पोलों पर एलईडी लगाने, के अलावा सर्दी के मौसम में प्रतिदिन अलाव जलवाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि मंडी में आवारा पशुओं की वजह से किसानों और व्यापारियों का काफी नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए आवारा पशुओं की धरपकड़ करने की मांग भी जिलाधिकारी से की थी। डीएम ने किसानों और व्यापारियों की सुविधाओं को देखते हुए मंडी सचिव शिव कुमार राघव को निर्माण कार्य से संबंधित प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।
मंडी सचिव ने बताया कि मंडी समिति में बी और सी ब्लाक के पीछे पड़ी जमीन पर सत्तर नई दुकानाें को बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए मंडी में आरओ प्लांट लगाने के लिए स्थान का चयन व्यापारियों की सुविधाओं को देखते हुए किया जाएगा। मंडी में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगरपालिका प्रशासन को पत्र लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंडी में कई ऐसे लाइसेंस धारक हैं, जिनके पास दुकानें नहीं हैं। नई दुकानों के आवंटन में लाइसेंसधारियों को वरीयता दी जाएगी। प्रस्ताव को निर्माण खंड के पास स्टीमेट बनने के लिए भेजा गया है। स्टीमेट बनते ही टेंडर करवाकर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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जिले की सातनपुर आलू मंडी को एशिया की सबसे बड़ी मंडी कहा जाता है। यहां जिले के अलावा पड़ोसी जिलों से किसान आकर आलू की खरीद-फरोख्त करते हैं। मंडी से अन्य प्रदेशों के साथ पड़ोसी पाकिस्तान, नेपाल में आलू का निर्यात किया जाता है। लेकिन यहां आने वाले किसानों को मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं हो पाती हैं। इसको देखते हुए आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा की मांग पर डीएम मोनिका रानी ने मंडी में विकास कार्य करवाने की सहमति दे दी है। सतीश वर्मा ने बताया कि उन्होंने डीएम से मंडी में 70 नई दुकानें, मंडी की सड़कों की मरम्मत व फुटपाथ पर इंटरलांकिग, मंडी परिषद की रंगाई-पुताई, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने को पांच हैंडपंप, सात आरओ प्लांट, छह सुलभ शौचालय, हाईमास्ट लाइटें और बिजली के पोलों पर एलईडी लगाने, के अलावा सर्दी के मौसम में प्रतिदिन अलाव जलवाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि मंडी में आवारा पशुओं की वजह से किसानों और व्यापारियों का काफी नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए आवारा पशुओं की धरपकड़ करने की मांग भी जिलाधिकारी से की थी। डीएम ने किसानों और व्यापारियों की सुविधाओं को देखते हुए मंडी सचिव शिव कुमार राघव को निर्माण कार्य से संबंधित प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।
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मंडी सचिव ने बताया कि मंडी समिति में बी और सी ब्लाक के पीछे पड़ी जमीन पर सत्तर नई दुकानाें को बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए मंडी में आरओ प्लांट लगाने के लिए स्थान का चयन व्यापारियों की सुविधाओं को देखते हुए किया जाएगा। मंडी में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगरपालिका प्रशासन को पत्र लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंडी में कई ऐसे लाइसेंस धारक हैं, जिनके पास दुकानें नहीं हैं। नई दुकानों के आवंटन में लाइसेंसधारियों को वरीयता दी जाएगी। प्रस्ताव को निर्माण खंड के पास स्टीमेट बनने के लिए भेजा गया है। स्टीमेट बनते ही टेंडर करवाकर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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