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वाह रे कोरोना! तू गर्भ की नन्हीं जान को भी कितना दुख दिलाएगा
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भोजपुर स्थित शरणालय में अंबाला में 28 दिन क्वारंटीन रहने का प्रमाण पत्र दिखाती महिला। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कमालगंज। हरियाणा से रविवार देर शाम भोजपुर स्थित कृषि महाविद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर आई पहली बस से एक महिला भी पति के साथ पहुंची। महिला के पति जिले के अमृतपुर थाना क्षेत्र के अमैयापुर गांव निवासी हैं। पति-पत्नी पंजाब के अमृतसर में परिवार का गुजर बसर कर रहे थे।
लॉकडाउन में पति के काम पर ताला लगा तो खतरों की परवाह नहीं की। गर्भ में पल रही तीन माह की नन्हीं जान को संभाले पति के साथ पैतृक घर को निकल पड़ी। अमृतसर से कभी पैदल तो कभी किसी वाहन का सहारा मिला। 258 किलोमीटर का सफर तय कर दूसरे दिन शाम को अंबाला कैंट तक पहुंच पाए।
वहां दोनों को क्वारंटीन कर दिया गया। यूपी सरकार की मेहरबानी हुई तो 29वें दिन अंबाला के लक्की फार्म हाउस स्थित क्वारंटीन सेंटर से बस से अपने जिले फर्रुखाबाद आ गए। यहां भी 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रख दिया गया। यह आप बीती सुनाते हुए महिला का दर्द छलक पड़ा। मुंह से बोल फूट पड़े-वाह रे कोरोना! क्या-क्या कराएगा, गर्भ की नन्हीं जान को और कितना दुख दिलाएगा।
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महिला ने बताया कि 4 साल पूर्व उसकी शादी हुई थी। मायका हरदोई में है। वह पहली बार इस बार होली पर पति के साथ अमृतसर गई थी, लेकिन कोरोना ने उसके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया। गर्भ में पल रही नन्हीं जान की हर समय चिंता सताती है। आखिर कब वह गांव पहुंच सकेगी।
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लॉकडाउन में पति के काम पर ताला लगा तो खतरों की परवाह नहीं की। गर्भ में पल रही तीन माह की नन्हीं जान को संभाले पति के साथ पैतृक घर को निकल पड़ी। अमृतसर से कभी पैदल तो कभी किसी वाहन का सहारा मिला। 258 किलोमीटर का सफर तय कर दूसरे दिन शाम को अंबाला कैंट तक पहुंच पाए।
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वहां दोनों को क्वारंटीन कर दिया गया। यूपी सरकार की मेहरबानी हुई तो 29वें दिन अंबाला के लक्की फार्म हाउस स्थित क्वारंटीन सेंटर से बस से अपने जिले फर्रुखाबाद आ गए। यहां भी 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रख दिया गया। यह आप बीती सुनाते हुए महिला का दर्द छलक पड़ा। मुंह से बोल फूट पड़े-वाह रे कोरोना! क्या-क्या कराएगा, गर्भ की नन्हीं जान को और कितना दुख दिलाएगा।
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महिला ने बताया कि 4 साल पूर्व उसकी शादी हुई थी। मायका हरदोई में है। वह पहली बार इस बार होली पर पति के साथ अमृतसर गई थी, लेकिन कोरोना ने उसके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया। गर्भ में पल रही नन्हीं जान की हर समय चिंता सताती है। आखिर कब वह गांव पहुंच सकेगी।