फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Lledaraen getting wages instead of flour

पल्लेदाराें को मजदूरी की जगह मिल रहा आटा

Mon, 05 Dec 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
अमर उजाला/फर्रुखाबाद Updated Mon, 05 Dec 2016 11:22 PM IST
विज्ञापन
Lledaraen getting wages instead of flour
मंडी समिति में सातनपुर में लगा आलू - फोटो : amarujala
आलू की अगेती फसल ने जहां किसानों की उम्मीदाें पर पानी फेर दिया है। वही इस पेशे से जुड़े आढ़तियों, श्रमिकों और ट्रैक्टर व ट्रक चालकों के घरों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं। हालात यह है कि पैसा न होने के कारण आढ़ती पल्लेदारों को मजदूरी में आटा देकर काम चला रहे हैं।
विज्ञापन


ट्रक व ट्रैक्टर चालकों को डीजल तक का पैसा नही दे पा रहे हैं। किसानों को पैसे के बदले में चेक दिया जा रहा है। जिसका भुगतान किसानों को 40000 रुपये की जगह 4000 रुपये किया जा रहा है।
विज्ञापन



आठ नवंबर से बंद 1000 और 500 के नोट का असर आलू व्यापारियों से जुड़े मजदूरों पर भी पड़ा है। मौजूदा समय में आलू आढ़ती आलू किसानों के भुगतान की बात तो दूर ट्रैक्टर का किराया तक नहीं दे पा रहे हैं। किसानों को तो चेक से पेमेंट दिया जा रहा है, लेकिन दैनिक मजदूरी करने वालों को 200 रुपये के चेक किस बैंक में लगाए जाए इसको लेकर आलू आढ़ती पेरशान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आलू आढ़ती सुधीर उर्फ रिंकू  वर्मा का कहना है कि उन्हें बैंक से 50000 रुपये प्रति सप्ताह निकालने की अनुमति है। जबकि 100 ट्रैक्टर वालों को यदि भाड़ा छोड़कर डीजल के दाम दिए जाए तो 10000 रुपये के आसपास प्रतिदिन पैसा खर्च हो रहा है। इनका भाड़ा और किसानों के माल का भुगतान कहां से किया जाए यह बात उन्हें खल रही है।

आलू आढ़ती का कहना है कि एक करोड़ दस लाख कीमत के आसपास आलू प्रतिदिन मंडी में आ रहा है। जिसका भुगतान केवल व्यापारी चेक से कर रहा है। इस चेक पर किसान किस तरह से मजदूरों का भुगतान करें। इसको लेकर मजदूरों के घर चूल्हे ठंडे हो गए है।

आलू आढ़ती धर्मेंद्र गुप्ता का कहना है कि हालात यह है कि पल्लेदारों को मौजूदा समय में वह शिवनारायण आटा विक्रेता के यहां से पैसे के बदले में आटा दिलाकर काम चला रहे है। उनका कहना है कि आखिर कार्य कब तक चलता रहेगा यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है।


ममता इंटरप्राइजेज के मालिक सतेंद्र वर्मा का कहना है कि वह मंडी समिति सातनपुर में वारदाना की आपूर्ति करते हैं। उन्हें इसका भुगतान चेक से मिल रहा है और चेक जमा करने पर बैंक निर्धारित रुपये दे रहा है। इस वजह से वह इस चेक से अपना कारोबार नहीं चला पा रहे है।

उनका कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। वह भी वारदाना लादने में लगे पल्लेदारों को प्रतिदिन पैसे के बदले आटा देकर काम चला रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed