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Farrukhabad News: गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पार, ग्रामीणों की बढ़ीं मुश्किलें
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फर्रुखाबाद/अमृतपुर। गंगा का जलस्तर मंगलवार को खतरे के निशान 137.10 से पांच सेंटीमीटर ऊपर 137.15 मीटर पर पहुंच गया। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नीचे बाढ़ का पानी और ऊपर से बारिश ग्रामीणों को बेहाल कर रही है। करीब 100 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे अधिक पशुओं के लिए चारे की समस्या आ रही है। ईंधन भीगने से भोजन पकाने का भी संकट खड़ा हो गया है।
नरौरा बांध से मंगलवार को गंगा में 1,22,848 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बाढ़ का पानी कई गांवों में पहले से ही घरों और गलियों में भरा हुआ है। अब बारिश होने से जलभराव की स्थिति और गंभीर हो गई है। घर की छत पर भी भोजन बनाने में दिक्कत आ रही है। जलाने के लिए ईंधन भी नहीं है। ग्रामीणों को घर से बाहर निकलने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार पानी में रहने से लोगों के सामने दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। बारिश के पानी से घरेलू सामान को बचाने के लिए ग्रामीण घरों की छतों पर रखा सामान पर पाॅलिथीन डाल रहे हैं। बिस्तर, कपड़े, अनाज और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित रखने के लिए लोग तरह-तरह के इंतजाम कर रहे हैं। कई घरों में पानी पहुंचने से सामान को ऊंचे स्थानों पर रखा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लंबे समय से भरा होने से पहले ही काफी परेशानी है, अब बारिश ने स्थिति और खराब कर दी है। कंडा व लकड़ियों को किसी तरह सुखा पाए थे, अब बारिश से भीग रही है। इस कारण एक वक्त की रोटी मिलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन तो किसी तरह कट जाता है, रात में जब बारिश होती है, उस समय जाग कर रात काटनी पड़ती है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
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बाढ़ शरणालय जाने के लिए ग्रामीणों को किया प्रेरित
अमृतपुर। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने इटावा-बरेली हाईवे के किनारे पाॅलिथीन डालकर रह रहे गांव महमदपुर गढ़िया व गांधी के ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने बाढ़ के खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थान बाढ़ शरणालय में जाने के लिए प्रेरित किया। एसडीएम ने कहा कि शरणालय में रहने और भोजन आदि की व्यवस्था की गई है। पशुओं के चारे के लिए भी व्यवस्था है। एसडीएम ने लेखपालों को मौके पर बुलाकर हाईवे किनारे रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी परिवारों को सूची के आधार पर बाढ़ शरणालय में पहुंचाने को कहा।
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फखरपुर जालिम में 215 परिवारों को मिली राहत सामग्री
अमृतपुर। बाढ़ प्रभावित गांव फखरपुर जालिम में लेखपाल आदिल खान ने 200 से अधिक परिवारों को राहत सामग्री वितरित की, लेकिन राहत सामग्री के साथ मिलने वाली लहिया का वितरण नहीं हो सका। इससे ग्रामीणों को लहिया के लिए इंतजार करना पड़ा। एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि लहिया लेकर आने वाला ट्रक बॉर्डर पर रोक लिया गया था। इसी कारण समय से लहिया नहीं आ पाई है। उन्होंने बताया कि ट्रक के पहुंचते ही ग्रामीणों को लहिया का वितरण करा दिया जाएगा। एसडीएम का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी होने पर प्रशासन को सूचना देने के लिए कहा है।
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नरौरा बांध से मंगलवार को गंगा में 1,22,848 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बाढ़ का पानी कई गांवों में पहले से ही घरों और गलियों में भरा हुआ है। अब बारिश होने से जलभराव की स्थिति और गंभीर हो गई है। घर की छत पर भी भोजन बनाने में दिक्कत आ रही है। जलाने के लिए ईंधन भी नहीं है। ग्रामीणों को घर से बाहर निकलने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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लगातार पानी में रहने से लोगों के सामने दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। बारिश के पानी से घरेलू सामान को बचाने के लिए ग्रामीण घरों की छतों पर रखा सामान पर पाॅलिथीन डाल रहे हैं। बिस्तर, कपड़े, अनाज और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित रखने के लिए लोग तरह-तरह के इंतजाम कर रहे हैं। कई घरों में पानी पहुंचने से सामान को ऊंचे स्थानों पर रखा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लंबे समय से भरा होने से पहले ही काफी परेशानी है, अब बारिश ने स्थिति और खराब कर दी है। कंडा व लकड़ियों को किसी तरह सुखा पाए थे, अब बारिश से भीग रही है। इस कारण एक वक्त की रोटी मिलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन तो किसी तरह कट जाता है, रात में जब बारिश होती है, उस समय जाग कर रात काटनी पड़ती है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
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बाढ़ शरणालय जाने के लिए ग्रामीणों को किया प्रेरित
अमृतपुर। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने इटावा-बरेली हाईवे के किनारे पाॅलिथीन डालकर रह रहे गांव महमदपुर गढ़िया व गांधी के ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने बाढ़ के खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थान बाढ़ शरणालय में जाने के लिए प्रेरित किया। एसडीएम ने कहा कि शरणालय में रहने और भोजन आदि की व्यवस्था की गई है। पशुओं के चारे के लिए भी व्यवस्था है। एसडीएम ने लेखपालों को मौके पर बुलाकर हाईवे किनारे रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी परिवारों को सूची के आधार पर बाढ़ शरणालय में पहुंचाने को कहा।
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फखरपुर जालिम में 215 परिवारों को मिली राहत सामग्री
अमृतपुर। बाढ़ प्रभावित गांव फखरपुर जालिम में लेखपाल आदिल खान ने 200 से अधिक परिवारों को राहत सामग्री वितरित की, लेकिन राहत सामग्री के साथ मिलने वाली लहिया का वितरण नहीं हो सका। इससे ग्रामीणों को लहिया के लिए इंतजार करना पड़ा। एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि लहिया लेकर आने वाला ट्रक बॉर्डर पर रोक लिया गया था। इसी कारण समय से लहिया नहीं आ पाई है। उन्होंने बताया कि ट्रक के पहुंचते ही ग्रामीणों को लहिया का वितरण करा दिया जाएगा। एसडीएम का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी होने पर प्रशासन को सूचना देने के लिए कहा है।