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कुदरत ले रहा बड़ा इम्तिहान, भीड़ से बचें: कासमी
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फर्रुखाबाद। जमात-ए-उलेमा-ए-हिंद के सेक्रेटरी मौलाना जफर अहमद कासमी ने कहा कि इस दफा फिर से कुदरत अवाम का बड़ा इम्तिहान ले रही है। ऐसे नाजुक दौर में हम सबको भीड़भाड़ से बचना है। हर व्यक्ति को कोरोना महामारी से बचाना सबसे बड़ा सवाब हैै।
मौलाना जफर अहमद कासमी ने कहा कि रमजान हमें अवाम की खिदमत का संदेश देता हैै। इस वक्त सबसे बड़ी खिदमत कोरोना संक्रमण से बचाना है। कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से बचाने को जो निर्देश दिए हैं, उनको नजरअंदाज नहीं करना है। कहा कि शरियाई सीमाओं में रहते हुए इनका पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा मुस्लिम एक जज्बाती कौम है। यह वक्त जज्बात का नहीं है। हम सबको होश में रहकर इबादत करनी है। भीड़भाड़ से बचें और घर पर भी दूरी के हिसाब से नमाज अदा करें।
मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने अपने आखिरी नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वालेही वसल्लम को दुनिया में इंसानों के लिए रहमत बनाकर भेजा। उनकी शिक्षा किसी एक कौम या धर्म के लिए सीमित नहीं है। इस्लाम धर्म सद्भावना, न्याय और समानता का पैगाम देता है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वह इस पैगाम को अपने किरदार व अमल से समाज के सामने पेश करें। उन्होंने कहा कि दुनिया में वे सारे कार्य इबादत बन जाते हैं, जो अल्लाह की मर्जी के अनुसार किए गए हैं। मौलाना ने कहा कि दूसरों के हक ईमानदारी से अदा करें। मां-बाप, पड़ोसी, उस्ताद, यहां तक कि तुम पर जानवरों तक के अधिकार बता दिए गए हैं। जिनको पूरा करना मुसलमानों का कर्तव्य है। इन कर्तव्यों के पालन से मुंह मोड़ने वाला गुनहगार होगा।
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मौलाना जफर अहमद कासमी ने कहा कि रमजान हमें अवाम की खिदमत का संदेश देता हैै। इस वक्त सबसे बड़ी खिदमत कोरोना संक्रमण से बचाना है। कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से बचाने को जो निर्देश दिए हैं, उनको नजरअंदाज नहीं करना है। कहा कि शरियाई सीमाओं में रहते हुए इनका पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा मुस्लिम एक जज्बाती कौम है। यह वक्त जज्बात का नहीं है। हम सबको होश में रहकर इबादत करनी है। भीड़भाड़ से बचें और घर पर भी दूरी के हिसाब से नमाज अदा करें।
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मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने अपने आखिरी नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वालेही वसल्लम को दुनिया में इंसानों के लिए रहमत बनाकर भेजा। उनकी शिक्षा किसी एक कौम या धर्म के लिए सीमित नहीं है। इस्लाम धर्म सद्भावना, न्याय और समानता का पैगाम देता है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वह इस पैगाम को अपने किरदार व अमल से समाज के सामने पेश करें। उन्होंने कहा कि दुनिया में वे सारे कार्य इबादत बन जाते हैं, जो अल्लाह की मर्जी के अनुसार किए गए हैं। मौलाना ने कहा कि दूसरों के हक ईमानदारी से अदा करें। मां-बाप, पड़ोसी, उस्ताद, यहां तक कि तुम पर जानवरों तक के अधिकार बता दिए गए हैं। जिनको पूरा करना मुसलमानों का कर्तव्य है। इन कर्तव्यों के पालन से मुंह मोड़ने वाला गुनहगार होगा।
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