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नहीं भा रही जन्मभूमि, लॉकडाउन खुलते ही वापसी की है हसरत

Fri, 15 May 2020 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 11:54 PM IST
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Janmabhoomi is not happy, Hasrat has come back as soon as the lockdown opens
कमालगंज (फर्रुखाबाद)। पापी पेट का सवाल क्या-क्या नहीं करता। पेट की ही खातिर जन्मभूमि छोड़ दी थी। कोरोना महामारी के पैर पसारने के बाद लॉकडाउन घोषित होते ही काम-धंधा बंद हो गया तो पैदल ही जन्मभूमि की ओर चल दिए। कुछ दिन तो अपने गांव की माटी से अपनत्व की सौंधी सुगंध में इतराते रहे। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई राशन समग्री से गुजर की। सप्ताह भर रही गांव आने की खुशी अब थमने लगी और आने लगी है अपनी कर्म भूमि की याद। यही वजह है कि करीब 90 प्रतिशत प्रवासियों ने आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह में रोजगार के लिए जुड़ने से इनकार किया है। वे चाहते हैं जल्द कोरोना खत्म हो जाए तो वे भी वापस कर्मभूमि की ओर चले जाएं, जहां मेहनत-मजदूरी से वे अपनी रोजी-रोटी चला रहे थे।
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कमालगंज क्षेत्र में रजिस्ट्रेशन कराकर 1627 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। बिना रजिस्ट्रेशन भी अनेक लोगों को लॉकडाउन में रोजगार छिन जाने से घर लौटना पड़ा है। सरकार की मंशा हैं कि बाहर से लौटे लोगों को स्व रोजगार की छतरी मिले इसीलिए आजीविका मिशन के द्वारा गांव में पहले से गठित स्वयं सहायता समूह या नया समूह बनाकर रोजगार का अवसर चाहने वालों को मौका दिया जाए। पंचायत सचिव प्रवासियों को फोन कर उनकी इच्छा पूछ रहे हैं।
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एडीओ निरंजन त्रिवेदी का कहना है कि शासन से प्रवासियों की आई सूची में लिखे हुए मोबाइल नंबर से जानकारी ली जा रही है। औसतन दस में नौ लोगों ने कहा कि अभी हम लॉकडाउन खुलने का इंतजार करना चाहते हैं। लॉकडाउन खुलते ही हम वापस अपने काम वाले शहर में चले जाएंगे। अहिमालपुर गांव के मोनू दिल्ली में टैक्सी चलाते हैं। बोले, जैसे ही लॉकडाउन खुलेगा, वह उसी दिन दिल्ली चले जाएंगे। गांव की ही नन्हीं देवी के परिवार में 15 लोग दिल्ली में काम करते हैं। वह कहती हैं कि यहां कोई फैक्टरी भी नहीं। स्वयं सहायता समूह से इतनी आमदनी नहीं मिलेगी, जिससे परिवार की गुजर-बसर हो सके इसलिए सभी लोग दिल्ली जाने की लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे।
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