{"_id":"607735278ebc3e58fe369d1e","slug":"jail-farrukhabad-news-knp6235085195","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला जेल में फिर मिले दो मोबाइल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला जेल में फिर मिले दो मोबाइल
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फर्रुखाबाद। जिला जेल की बैरक के ऊपर पाइप में साबुन व छाछ के रैपरों मेें दो मोबाइल रखे मिले हैं। उनमें सिम नहीं थे। प्रभारी जेल अधीक्षक ने कोतवाली में इस संदर्भ में तहरीर दी है। पुलिस दोनों मोबाइल को लावारिस में दाखिल करने की फिराक में है।
फतेहगढ़ स्थित जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक अखिलेश कुमार के आदेश पर बुधवार सुबह बैरक खुलने से पहले डिप्टी जेलर, बंदी रक्षकों व पीएसी के जवानों ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। बैरक नंबर सात-ए की छत पर पाइप में छाछ व साबुन के खाली रैपर में दो मोबाइल मिले। मोबाइल में बैटरी थी लेकिन सिम नहीं थे। प्रभारी जेल अधीक्षक अखिलेश कुमार ने इस संदर्भ में कोतवाली में तहरीर दी है। दोनों मोबाइल भी कोतवाली में जमा करने के लिए भेजे हैं। कारागार अधिनियम के तहत किसी के पास मोबाइल मिलने पर धारा 42 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। बिना किसी नाम के उजागर हुए कैसे मुकदमा दर्ज किया जाए। इससे पुलिस दोनों मोबाइल लावारिस में दाखिल करने की तैयारी में है।
जिला जेल में मिले दोनों मोबाइल का इस्तेमाल किसने किया है इसका पता पुलिस सर्विलांस के जरिए आसानी से लगा सकती है। दोनों के आईएमईआई नंबर सर्विलांस पर डालने से सिम नंबर उजागर हो जाएगा। इसके बाद उससे किस नंबर से बात हुई इसका भी पता चल सकता है। पुलिस विभाग इस पचड़े में पड़ने से बचना चाहता है। इसीलिए मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
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डीजी जेल आनंद कुमार के आदेश पर फतेहगढ़ स्थित सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद शुक्ला की अगुवाई में गठित टास्क फोर्स ने 24 मार्च को जिला जेल में तलाशी अभियान चलाया था। इसमें तीन बंदियों के पास से तीन मोबाइल व सिम बरामद हुए थे। मामले में तीन बंदी रक्षक निलंबित किए गए थे। जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक गिरजाशंकर यादव को लखनऊ मुख्यालय अटैच कर दिया गया था और डिप्टी जेलर जितेंद्र कुमार से जवाब तलब किया गया था। 6 अप्रैल को बैरक नंबर सात-ए में कायमगंज कोतवाली के गांव पंछी नगला निवासी हत्यारोपी गुड्डू के थैले से मोबाइल बरामद हुआ था। अब बैरक नंबर सात-ए की छत से दो मोबाइल मिलना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिला जेल में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उसी क्रम में जेल की बैरक सात-ए के पाइप मेें छिपाकर रखे गए दो मोबाइल मिले है। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर भेजी है। -अखिलेश कुमार, प्रभारी जिला जेल अधीक्षक
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फतेहगढ़ स्थित जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक अखिलेश कुमार के आदेश पर बुधवार सुबह बैरक खुलने से पहले डिप्टी जेलर, बंदी रक्षकों व पीएसी के जवानों ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। बैरक नंबर सात-ए की छत पर पाइप में छाछ व साबुन के खाली रैपर में दो मोबाइल मिले। मोबाइल में बैटरी थी लेकिन सिम नहीं थे। प्रभारी जेल अधीक्षक अखिलेश कुमार ने इस संदर्भ में कोतवाली में तहरीर दी है। दोनों मोबाइल भी कोतवाली में जमा करने के लिए भेजे हैं। कारागार अधिनियम के तहत किसी के पास मोबाइल मिलने पर धारा 42 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। बिना किसी नाम के उजागर हुए कैसे मुकदमा दर्ज किया जाए। इससे पुलिस दोनों मोबाइल लावारिस में दाखिल करने की तैयारी में है।
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जिला जेल में मिले दोनों मोबाइल का इस्तेमाल किसने किया है इसका पता पुलिस सर्विलांस के जरिए आसानी से लगा सकती है। दोनों के आईएमईआई नंबर सर्विलांस पर डालने से सिम नंबर उजागर हो जाएगा। इसके बाद उससे किस नंबर से बात हुई इसका भी पता चल सकता है। पुलिस विभाग इस पचड़े में पड़ने से बचना चाहता है। इसीलिए मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
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डीजी जेल आनंद कुमार के आदेश पर फतेहगढ़ स्थित सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद शुक्ला की अगुवाई में गठित टास्क फोर्स ने 24 मार्च को जिला जेल में तलाशी अभियान चलाया था। इसमें तीन बंदियों के पास से तीन मोबाइल व सिम बरामद हुए थे। मामले में तीन बंदी रक्षक निलंबित किए गए थे। जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक गिरजाशंकर यादव को लखनऊ मुख्यालय अटैच कर दिया गया था और डिप्टी जेलर जितेंद्र कुमार से जवाब तलब किया गया था। 6 अप्रैल को बैरक नंबर सात-ए में कायमगंज कोतवाली के गांव पंछी नगला निवासी हत्यारोपी गुड्डू के थैले से मोबाइल बरामद हुआ था। अब बैरक नंबर सात-ए की छत से दो मोबाइल मिलना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिला जेल में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उसी क्रम में जेल की बैरक सात-ए के पाइप मेें छिपाकर रखे गए दो मोबाइल मिले है। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर भेजी है। -अखिलेश कुमार, प्रभारी जिला जेल अधीक्षक