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Farrukhabad News: एआरटीओ दफ्तर में बाहरी लोगाें का दखल, सीसीटीवी कैमरे बंद

Tue, 13 Oct 2026 01:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:27 AM IST
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Interference by outsiders at the ARTO office; CCTV cameras switched off.
फर्रुखाबाद। एआरटीओ दफ्तर में भ्रष्टाचार चरम पर है। इसका खुलासा संवाद न्यूज एजेंसी के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है। शाम चार बजते ही दफ्तर का नजारा बदल जाता है। सरकारी दफ्तर दलालों के अड्डे में तब्दील हो जाता है। दफ्तर में दलाल हावी हैं, जो खुलेआम रुपये वसूलते हैं। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान देखा गया कि बाबुओं के चहेते लोग शाम चार बजे के बाद सक्रिय होते हैं। दलालों की भीड़ केबिन के बाहर ही नहीं अंदर भी लगती है। खुलेआम लेन-देन होता है। सूत्र बताते हैं कि हर फाइल का रेट तय है। बिना चढ़ावे के फाइल आगे नहीं बढ़ती।
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सरकारी फाइलों तक दलालों की सीधी पहुंच है। वह खुद ही रैक से फाइलें निकालते और लगाते हैं। केबिन के अंदर कागजों को पलटते ही नहीं बल्कि लिपिकों की कुर्सी पर बैठकर काम भी करते हैं। नियम तो यह है कि बाहरी व्यक्ति का सरकारी अभिलेखों को छूना तो दूर केबिन में घुसना भी अपराध है, मगर यहां दलाल ही सब कुछ संभालते हैं। एआरटीओ प्रशासन और प्रवर्तन दोनों प्रथम तल पर बैठते हैं। नीचे क्या-क्या गुल खिल रहे हैं, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। इससे उनका शह होने के संदेह को बल मिल रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी के 8.09 मिनट के एक स्टिंग में केबिनों के अंदर दलालों का राज, खुलेआम धन उगाही, फाइलों को रैक से उठाने और रखने के साथ लिपिक अपने निजी चेला के पास मौजूद एक झोले में रखकर बाहर ले जाने की तैयारी करते दिख रहे हैं। पिछले महीने आरटीओ बांदा ने औचक निरीक्षण में बंद सीसीटीवी को चालू करने के निर्देश दिए थे। इन्हें इसलिए बंद रखा जाता है कि कोई सबूत कैद न हो जाए।
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शाम चार बजे के करीब भारी वाहन ट्रांसफर काउंटर पर केबिन के दरवाजे खुले थे। उसमें लिपिक और उगाही की जिम्मेदारी निभाने वाला उसका चहेता बाहरी व्यक्ति खड़ा था। एक दलाल रैक में सरकारी फाइलों को उठाता और रखता दिख रहा था। इसी दौरान एक दलाल फाइल के साथ लिपिक के चहेते बाहरी व्यक्ति को 500-500 रुपये के नोट देता नजर आता है। इस दौरान दलालों की भीड़ लगी थी। दूसरा दलाल किसी फाइल की चर्चा करते हुए 500-500 के नोट देता है। बाहरी व्यक्ति रुपये को देखता और ऊपर की जेब में रखता रहा।

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लाइसेंस, फिटनेस, परमिट व ट्रांसफर के लिए देने होते रुपये
एआरटीओ दफ्तर में कोई भी आवेदक सीधे काम नहीं करा सकता। लाइसेंस, फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर समेत सभी कामों के बदले दलालों के जरिये ही पैसा देना पड़ता है। सीधे पहुंचने पर फाइलों में कमी निकालकर बार-बार चक्कर लगवाए जाते हैं।

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केबिन में घुसने पर दे चुके चेतावनी, अब करेंगे कार्रवाई : एआरटीओ
एआरटीओ प्रशासन कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लिपिक की केबिन में कोई भी बाहरी नहीं घुस सकता। यदि अंदर खड़े होकर रुपये का लेन-देन और फाइलों को उठाया जाता है, तो अपराध है। वह इस मामले में कठोर कार्रवाई करेंगे।
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