{"_id":"6acd3e53ef6b3212d4049aac","slug":"broken-beds-and-benches-patients-have-to-make-do-with-torn-mattresses-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-112122-2026-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: टूटे बेड व बेंच, मरीजों को नसीब होते फटे गद्दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: टूटे बेड व बेंच, मरीजों को नसीब होते फटे गद्दे
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों को टूटे बेड, बेंच व फटे गद्दे नसीब हो रहे हैं। सामान की गुणवत्ता खराब होने से चंद महीनों में कबाड़ वाले स्टोर में पहुंच जाता है। वार्डों की स्थिति तो दूर इमरजेंसी के पुरुष वार्ड में भी टूटे बेड पर हर रोज मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
मरीजों को अच्छी सुविधा मुहैया कराने की मंशा से करोड़ों का सामान खरीदकर अस्पताल में भेजा जाता है। स्थानीय स्तर से भी खरीद होती है। लेकिन सामान की गुणवत्ता इस कदर खराब है कि चंद महीनों में ही बेडों पर पड़े गद्दे फट जाते हैं। मरीज इन्हीं फटे गद्दों पर समय गुजारने को मजबूर हैं। इमरजेंसी के पुरुष वार्ड में बेड नंबर पांच सामने से भले ही नया दिखता हो, मगर वह बीच में टूटा है। इस पर भर्ती होने वाले मरीजों की कमर नीची बनी रहती है। इस बेड पर बीच में हुआ गड्ढा कम करने के लिए दूसरा गद्दा भी डाला गया है।
इमरजेंसी के गेट पर पड़ी बेंच कई दिन से टूटी है। इसके अलावा जनरल वार्ड, सर्जिकल वार्ड, नेत्र वार्ड समेत कई वार्डों में मरीजों को फटे गद्दे नसीब हो रहे हैं।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- --
कक्ष सेवक के सहारे जीरियाट्रिक वार्ड
अस्पताल के जीरियाट्रिक वार्ड में नौ बेड हैं। यहां अलग के स्टाफ नर्स, कक्ष सेवकों की तीनों शिफ्टों में तैनाती रहती है। मगर एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद से इस वार्ड में भर्ती बुजुर्गों की देखरेख एक कक्ष सेवक के सहारे है। आर्थो और जनरल वार्ड के लिए तैनात स्टाफ नर्स को ही जीरियाट्रिक वार्ड और बर्न यूनिट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि अभी तक जीरियाट्रिक वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स बर्न यूनिट में भर्ती होने वाले मरीजों की देखरेख करती थीं।
-- -- -- -- -- -- -
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल की वजह से दिक्कत है। उनके आते ही अपनी देखरेख में सभी फटे गद्दे, टूटी बेंच और बेडों को बदलवाया जाएगा। गद्दे उपलब्ध हो चुके हैं। पूरा काम वह खुद कराएंगे।
डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस
विज्ञापन
मरीजों को अच्छी सुविधा मुहैया कराने की मंशा से करोड़ों का सामान खरीदकर अस्पताल में भेजा जाता है। स्थानीय स्तर से भी खरीद होती है। लेकिन सामान की गुणवत्ता इस कदर खराब है कि चंद महीनों में ही बेडों पर पड़े गद्दे फट जाते हैं। मरीज इन्हीं फटे गद्दों पर समय गुजारने को मजबूर हैं। इमरजेंसी के पुरुष वार्ड में बेड नंबर पांच सामने से भले ही नया दिखता हो, मगर वह बीच में टूटा है। इस पर भर्ती होने वाले मरीजों की कमर नीची बनी रहती है। इस बेड पर बीच में हुआ गड्ढा कम करने के लिए दूसरा गद्दा भी डाला गया है।
विज्ञापन
इमरजेंसी के गेट पर पड़ी बेंच कई दिन से टूटी है। इसके अलावा जनरल वार्ड, सर्जिकल वार्ड, नेत्र वार्ड समेत कई वार्डों में मरीजों को फटे गद्दे नसीब हो रहे हैं।
विज्ञापन
कक्ष सेवक के सहारे जीरियाट्रिक वार्ड
अस्पताल के जीरियाट्रिक वार्ड में नौ बेड हैं। यहां अलग के स्टाफ नर्स, कक्ष सेवकों की तीनों शिफ्टों में तैनाती रहती है। मगर एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद से इस वार्ड में भर्ती बुजुर्गों की देखरेख एक कक्ष सेवक के सहारे है। आर्थो और जनरल वार्ड के लिए तैनात स्टाफ नर्स को ही जीरियाट्रिक वार्ड और बर्न यूनिट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि अभी तक जीरियाट्रिक वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स बर्न यूनिट में भर्ती होने वाले मरीजों की देखरेख करती थीं।
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल की वजह से दिक्कत है। उनके आते ही अपनी देखरेख में सभी फटे गद्दे, टूटी बेंच और बेडों को बदलवाया जाएगा। गद्दे उपलब्ध हो चुके हैं। पूरा काम वह खुद कराएंगे।
डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस