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Farrukhabad News: होलाष्टक लगा शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित

Thu, 06 Mar 2025 11:13 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Thu, 06 Mar 2025 11:13 PM IST
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Holashtak is observed and auspicious and auspicious work is prohibited
फर्रुखाबाद। होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। होलाष्टक समाप्त होने के बाद खरमास लग जाएगा। ऐसे में शुभ और मांगलिक कार्य पर विराम लगा रहेगा। 14 अप्रैल से ही गृह प्रवेश, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान शुभारंभ आदि मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो पाएंगे।
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आचार्य योगीराज दुबे ने बताया कि छह मार्च को सुबह 10.51 बजे से होलाष्टक लग गया है। जो 13 मार्च को होलिका दहन तक रहेगा। इन आठ दिनों के समय में कोई भी मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश करना वर्जित होता है। यही नहीं व्यक्ति को नए रोजगार और नया व्यवसाय भी इस दौरान शुरू नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस अवधि में शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। आचार्य डॉ प्रदीप नारायण शुक्ला बताते हैं कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 13 अप्रैल को होलिका दहन के साथ होलाष्टक समाप्त होगा। अगले दिन 14 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा। वहीं 14 मार्च से ही खरमास लग जाएगा। इस दौरान भी कोई भी मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है।
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होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ कार्य

आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ला बताते हैं कि होलाष्टक के आठ दिनों तक गृह उग्र रहते हैं। इन आठ दिवसों में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुद्ध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य करना वर्जित माना है।
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आचार्य ओंकारनाथ शास्त्री ने बताया कि होलाष्टक का सबसे मुख्य कारण हिरण्यकश्यप और प्रहलाद की कथा से जुड़ा है। माना जाता है की हिरण्यक्श्यप अपने पुत्र प्रहलाद की भक्ति से क्रोधित था। उसने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से आठ दिनों तक प्रहलाद को कठोर यातनाएं दी थी। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से वह बच गए। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन हुआ। प्रहलाद की विजय हुई। इसलिए इन आठ दिनों को पीड़ा संघर्ष और नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
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