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गूजरपुर पमारान में पुलिस की दबिश से दहशत में ग्रामीण

Thu, 15 Oct 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद Updated Thu, 15 Oct 2015 11:32 PM IST
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Gugrpur Pmaran police raiding villages in panic

अमृतपुर। पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में गांव गूजरपुर पमारन में बवाल के बाद पुलिस गांव में रात और दिन दबिश दे रही है। पुलिस की दबिश से ग्रामीणों में दहशत है। अधिकांश युवक गांव छोड़ कर चले गए हैं। अब गांव में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग रह गए हैं। वहीं, गांव और स्कूल में सन्नाटा पसरा है।

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टीचर गांव से बच्चों को लेकर आई, लेकिन वे कुछ देर बाद फिर चले गए। 17 अक्तूबर को वोटिंग से ग्रामीण घबरा रहे हैं। इस कारण मतदान का प्रतिशत घटना तय है। पुलिस ने शाम को गांव में दबिश देकर दो लोगों को हिरासत में लिया है। इन्हें बवाल के दिन कराई गई वीडियो फुटेज से शिनाख्त के बाद पकड़ा गया।
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पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में प्राइमरी स्कूल गूजरपुर पमारान के बूथों  पर पथराव और फायरिंग करने के मामले में पीठासीन अधिकारी ने लगभग 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। पुलिस ने लगभग 20 लोगों को चिह्नित कर लिया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए गांव में पुलिस बल के साथ सीओ कालूराम दोहरे रात और दिन में बार बार दबिश दी। पुलिस की दबिश से अधिकांश युवक गांव छोड़कर चले गए। अब गांव में बुजुर्ग और महिलाएं ही रह गई  हैं। गुरुवार को पुलिस ने दो युवकों को पकड़ लिया।
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गांव की ऊषा देवी का कहना है कि दोबारा मतदान शांतिपूर्ण हुआ तो वह वोट डालने जाएंगी। अगर थोड़ा भी विवाद हुआ तो वह वोट नहीं डालेंगी। खुशीराम का कहना है कि गांव के युवक पकड़े जाने के डर से भयभीत हैं, इस कारण अधिकांश लोग मतदान करने नहीं जाएंगे। रजनी और सुधारानी ने बताया कि गांव में रहने वाले अधिकांश पुरुष पुलिस के डर से चले गए हैं। गांव में सिर्फ महिलाएं रह गई हैं।

अगर परिवार के लोग 17 अक्तूबर को वोट डालने गए तो वह जाएंगी। गांव में अगर यहीं हाल रहा तो 17 अक्तूबर को होने वाले पुन: मतदान का प्रतिशत कम होगा। एसओ अमृतपुर  ज्ञान प्रकाश ने बताया कि घटना को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। गुरुवार को गांव के छविराम और ब्रजकिशोर को पकड़ा है। अन्य की तलाश में दबिशें दी जा रही हैं।


 वहीं, गुरुवार को गूजरपुर पमारान का पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुला था। इसमें टीचर नीतू मिश्रा, पल्लवी गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह बच्चों को काफी देर तक इंतजार करती रहीं। बच्चों के स्कूल न आने पर टीचर गांव में गईं और कुछ बच्चों को बुलाकर स्कूल लाईं। बच्चे स्कूल में कुछ दरे रुके, इसके बाद चले गए। शिक्षिका नीतू मिश्रा का कहना है कि बच्चे स्कूल आए थे और डर की वजह से घर चले गए। इस कारण स्कूल में सन्नाटा रहा।

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