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Farrukhabad News: सरकारी खरीद से आलू खपत पर सवाल, पाउडर फैक्ट्री से ही राहत
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फोटो-20 फर्रुखाबाद में नेपाल के भैरहवा के लिए ट्रक में लोड किए जा रहे आलू के साथ सुधीर शुक्ला।
फर्रुखाबाद/कमालगंज। सरकार द्वारा 650 रुपये क्विंटल के हिसाब से आलू की सरकारी खरीद किए जाने की घोषणा से किसानों में उत्साह है लेकिन, उनके मन में सरकारी खरीद वाले आलू की खपत को लेकर सवाल भी है। यदि खरीद वाला आलू दूसरे देशों में भेजा जा सके या अपने यहां इसका कोई अतिरिक्त उपयोग हो तो फायदा ज्यादा मिल सकता है, अन्यथा लाभ कम होगा। वहीं, कुछ किसान मानते हैं कि किसानों को सरकारी खरीद से ज्यादा फायदा सरकार द्वारा आलू के पाउडर बनाने की फैक्टरी लगवाने से हो सकता है।
आलू की कच्ची फसल के समय भाव रसातल में होने से बहुत से किसानों ने पक्की फसल कर ली। इसका परिणाम यह हुआ कि पक्की फसल के आलू की भरमार हो गई। यही कारण है कि पिछले साल शीतगृहों में हुए 75 प्रतिशत भंडारण का आंकड़ा इस बार 92 प्रतिशत पर पहुंच गया। 75 प्रतिशत शीतगृह भरने पर ही आखिरी में आलू फेंके जाने की नौबत आई थी। जबकि इस बार भंडारण 17 प्रतिशत और बढ़ गया है तो आलू इफ़रात में है। किसान मानते हैं कि ऐसे में यदि ठोस नीति न बनी तो पिछले साल से ज्यादा आलू फेंकेगा और अन्नदाता लगातार दूसरी साल तबाह हो जाएगा।
कमालगंज के बसहा नगला के किसान निर्यात व्यवसायी सत्येंद्र प्रताप सिंह उर्फ मन्नी सिंह कहते हैं कि ज्यादातर सामान्य किसानों के आलू में इस बार चेचक लगी है। चेचक वाला आलू सरकारी खरीद में जाएगा या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। दूसरे यदि सरकारी खरीद का आलू नेपाल, बांग्लादेश, भूटान आदि जाए तो किसानों को फायदा होगा। यदि सरकारी खरीद का आलू बाद में अपनी ही मंडियों में बिका तो अपेक्षाकृत फायदा कम रहेगा। उन्होंने कहा, आलू के पाउडर की विश्व भर में खपत है। सब्जियों में ग्रेवी में पाउडर डाला जाता है। चाट के विभिन्न आइटम में भी यह पड़ता है। सरकार यदि कानपुर से फर्रुखाबाद के बीच आलू पाउडर बनाने की एक फैक्ट्री लगवा दे तो द्वितीयक गुणवत्ता का आलू खप जाएगा। एक फैक्टरी किसी अन्य क्षेत्र में लग जाए। छह साल पहले हापुड़ में फैक्टरी से जापान तक आलू पाउडर का निर्यात हुआ था।
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नेपाल के भैरहवा भेजा गया आलू
आलू की सरकारी खरीद की घोषणा के बीच जिले के कुछ किसान व व्यापारी आलू के निर्यात में भी लगे हैं। आलू निर्यातक संगठन के अध्यक्ष किसान व व्यापारी सुधीर शुक्ला ने रविवार को नेपाल के भैरहवा शहर के लिए आलू की लोडिंग कराई। दक्षिण पश्चिम नेपाल में भारतीय सीमा के पास स्थित भैरहवा में गोरखपुर सोनौली होते हुए तीसरे दिन आलू पहुंच जाएगा। सुधीर शुक्ला ने बताया कि नेपाल के व्यापारी से 3797 सुपर आलू का सौदा 550 रुपये क्विंटल हिसाब से हुआ है। लोडिंग के बाद अन्य सभी खर्चा नेपाल के खरीदार का होगा। उन्होंने मांग की कि आलू निर्यात पर मंडी शुल्क सरकार तत्काल माफ करे। इसके साथ ही निर्यात भाड़ा प्रोत्साहन 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए।
2023 में सरकारी खरीद से सुधरे थे दाम
आलू की मंदी के दौर में 2023 में भी 650 रुपये क्विंटल के हिसाब से आलू की सरकारी खरीद हुई थी। फर्रुखाबाद के साथ ही कौशांबी, उन्नाव, मैनपुरी, एटा, कासगंज व बरेली सहित सात जिलों में सरकारी खरीद हुई थी। उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) ने सरकारी खरीद की थी। हाफेड ने खरीदे गए आलू को मलेशिया भी भेजा था। जिला आलू विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी खरीद से प्रायः थोक बाजार में प्रतिस्पर्धा का माहौल बनता है। आलू व्यापार से जुड़े डॉ. अतुल शुक्ला कहते हैं कि 2023 में सरकारी खरीद होने पर 200 रुपये क्विंटल भाव बढ़ गए थे। इस बार 2023 से ज्यादा खराब स्थिति है, आलू भी इस बार ज्यादा है। बाहर की मंडियों में आलू की दाम निकली हुई है। ऐसे में सरकारी खरीद आलू को कितना उबार पाएगी यह समय बताएगा। खरीद में आलू गुणवत्ता का मानक क्या होगा, यह भी देखने की बात होगी।
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आलू की कच्ची फसल के समय भाव रसातल में होने से बहुत से किसानों ने पक्की फसल कर ली। इसका परिणाम यह हुआ कि पक्की फसल के आलू की भरमार हो गई। यही कारण है कि पिछले साल शीतगृहों में हुए 75 प्रतिशत भंडारण का आंकड़ा इस बार 92 प्रतिशत पर पहुंच गया। 75 प्रतिशत शीतगृह भरने पर ही आखिरी में आलू फेंके जाने की नौबत आई थी। जबकि इस बार भंडारण 17 प्रतिशत और बढ़ गया है तो आलू इफ़रात में है। किसान मानते हैं कि ऐसे में यदि ठोस नीति न बनी तो पिछले साल से ज्यादा आलू फेंकेगा और अन्नदाता लगातार दूसरी साल तबाह हो जाएगा।
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कमालगंज के बसहा नगला के किसान निर्यात व्यवसायी सत्येंद्र प्रताप सिंह उर्फ मन्नी सिंह कहते हैं कि ज्यादातर सामान्य किसानों के आलू में इस बार चेचक लगी है। चेचक वाला आलू सरकारी खरीद में जाएगा या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। दूसरे यदि सरकारी खरीद का आलू नेपाल, बांग्लादेश, भूटान आदि जाए तो किसानों को फायदा होगा। यदि सरकारी खरीद का आलू बाद में अपनी ही मंडियों में बिका तो अपेक्षाकृत फायदा कम रहेगा। उन्होंने कहा, आलू के पाउडर की विश्व भर में खपत है। सब्जियों में ग्रेवी में पाउडर डाला जाता है। चाट के विभिन्न आइटम में भी यह पड़ता है। सरकार यदि कानपुर से फर्रुखाबाद के बीच आलू पाउडर बनाने की एक फैक्ट्री लगवा दे तो द्वितीयक गुणवत्ता का आलू खप जाएगा। एक फैक्टरी किसी अन्य क्षेत्र में लग जाए। छह साल पहले हापुड़ में फैक्टरी से जापान तक आलू पाउडर का निर्यात हुआ था।
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नेपाल के भैरहवा भेजा गया आलू
आलू की सरकारी खरीद की घोषणा के बीच जिले के कुछ किसान व व्यापारी आलू के निर्यात में भी लगे हैं। आलू निर्यातक संगठन के अध्यक्ष किसान व व्यापारी सुधीर शुक्ला ने रविवार को नेपाल के भैरहवा शहर के लिए आलू की लोडिंग कराई। दक्षिण पश्चिम नेपाल में भारतीय सीमा के पास स्थित भैरहवा में गोरखपुर सोनौली होते हुए तीसरे दिन आलू पहुंच जाएगा। सुधीर शुक्ला ने बताया कि नेपाल के व्यापारी से 3797 सुपर आलू का सौदा 550 रुपये क्विंटल हिसाब से हुआ है। लोडिंग के बाद अन्य सभी खर्चा नेपाल के खरीदार का होगा। उन्होंने मांग की कि आलू निर्यात पर मंडी शुल्क सरकार तत्काल माफ करे। इसके साथ ही निर्यात भाड़ा प्रोत्साहन 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए।
2023 में सरकारी खरीद से सुधरे थे दाम
आलू की मंदी के दौर में 2023 में भी 650 रुपये क्विंटल के हिसाब से आलू की सरकारी खरीद हुई थी। फर्रुखाबाद के साथ ही कौशांबी, उन्नाव, मैनपुरी, एटा, कासगंज व बरेली सहित सात जिलों में सरकारी खरीद हुई थी। उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) ने सरकारी खरीद की थी। हाफेड ने खरीदे गए आलू को मलेशिया भी भेजा था। जिला आलू विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी खरीद से प्रायः थोक बाजार में प्रतिस्पर्धा का माहौल बनता है। आलू व्यापार से जुड़े डॉ. अतुल शुक्ला कहते हैं कि 2023 में सरकारी खरीद होने पर 200 रुपये क्विंटल भाव बढ़ गए थे। इस बार 2023 से ज्यादा खराब स्थिति है, आलू भी इस बार ज्यादा है। बाहर की मंडियों में आलू की दाम निकली हुई है। ऐसे में सरकारी खरीद आलू को कितना उबार पाएगी यह समय बताएगा। खरीद में आलू गुणवत्ता का मानक क्या होगा, यह भी देखने की बात होगी।

फोटो-20 फर्रुखाबाद में नेपाल के भैरहवा के लिए ट्रक में लोड किए जा रहे आलू के साथ सुधीर शुक्ला।