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गोशाला में लाखों का गबन, 80 गोवंश की तस्करी की आशंका
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सितवनपुर पिथू गोशाला। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। मोहम्मदाबाद ब्लाक क्षेत्र के गांव सितवनपुर पिथू स्थित मॉडल गोशाला में बड़ा खेल सामने आया है। यहां से 80 गोवंश की तस्करी और 50 लाख रुपये गबन की आशंका जताई गई है। बीडीओ ने जांच रिपोर्ट डीडीओ को सौंपी है।
ग्राम पंचायत सितवनपुर पिथू स्थित गोशाला जिले की मॉडल गोशाला में गिनी जाती है। इसमें इन दिनों 735 गोवंश हैं। 900 रुपये प्रति माह (30 रुपये प्रति दिन) के हिसाब से प्रति गोवंश के भरण-पोषण के लिए धनराशि दी जाती है। यह धनराशि गोशाला के नाम से बैंक खाते में आती है। गोशाला को मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए जन सहयोग लिया गया।
इसका गोशाला के नाम से दूसरा खाता एचडीएफसी बैंक में दो अप्रैल 2020 को खोला गया। गोवंश के नाम पर लोगों ने दान स्वरूप खूब सहयोग किया। 350 से अधिक लोगों ने एक करोड़ दो लाख से अधिक धनराशि जमा की, जिससे गोवंशों के भरण-पोषण के साथ संसाधन भी जुटाए जाने थे। इसके अलावा गोशाला के नाम से पास में ही 60 बीघा भूमि है। इस पर धान व गेहूं की फसल की जाती है।
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पैदावार भी खूब हुई। यहीं से खेल शुरू हुआ। गोवंश का भरण-पोषण तो सरकारी धन से होता रहा, जबकि फसल से हुई अतिरिक्त आय और जन सहयोग से मिली धनराशि का बड़ा हिस्सा जिम्मेदार हजम कर गए। मोहम्मदाबाद के तत्कालीन बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने सचिव के काले कारनामों का चिट्ठा खोलकर रिपोर्ट डीडीओ को सौंप दी है।
कहां गया 10 लाख से अधिक का अनाज
डीडीओ को सौंपी जांच रिपोर्ट में बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी विनय कुमार सिंह ने आठ जनवरी 2022 तक गोशाला का संचालन किया। स्थानांतरण के बाद भी उन्होंने ग्राम विकास अधिकारी मोतीलाल को गोशाला के अभिलेख, कैश बुक, स्टाक, गोवंश रजिस्टर आदि नहीं दिए। तीन वर्ष में गोशाला की 60 बीघा भूमि पर उपजी गेहूं व धान की फसल मनमाने तरीके से बेचकर करीब 10 लाख से अधिक का गबन कर लिया गया है।
इसके अलावा गोशाला से 80 गोवंश पशुधन सहभागिता के तहत लोगों को फर्जी तरीके से देकर तस्करी कर ली गई। इसी वजह से जांच में गोवंश पशुपालकों के पास नहीं मिले। 80 गोवंशों के भरण-पोषण की धनराशि चहेतों को दिलाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बीडीओ का दावा है कि गहनता से जांच की जाए तो गोशाला में 50 लाख रुपये का गबन पकड़ा जाएगा।
प्रधान को पता नहीं, निकल गए 74 लाख
गोशाला के बैंक खाते का संचालन प्रधान व सचिव संयुक्त रूप से करते हैं। जनसहयोग की धनराशि वाले बैंक खाते की प्रधान को जानकारी तक नहीं है। इस खाते में दो वर्ष में एक करोड़ दो लाख से अधिक रुपये जमा किए गए और 74 लाख से अधिक धनराशि खर्च की जा चुकी है।
प्रधान शेर बहादुर सिंह से इस संबंध में पूछा तो वह चौंक गए। प्रधान ने बताया कि उन्हें गोशाला के दूसरे खाते ही जानकारी तक नहीं है। खाते से आखिर 74 लाख रुपये किसने निकाले। इसकी वह जांच कराएंगे।
मामला गंभीर है, गहनता से कराई जाएगी जांच
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बीडीओ की रिपोर्ट के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। फिर भी 80 गोवंश की तस्करी, तीन वर्ष की फसल का हिसाब न देना और प्रधान को बिना बताए 74 लाख रुपये खर्च किए जाने का मामला गंभीर है। इसकी गहनता से जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम पंचायत सितवनपुर पिथू स्थित गोशाला जिले की मॉडल गोशाला में गिनी जाती है। इसमें इन दिनों 735 गोवंश हैं। 900 रुपये प्रति माह (30 रुपये प्रति दिन) के हिसाब से प्रति गोवंश के भरण-पोषण के लिए धनराशि दी जाती है। यह धनराशि गोशाला के नाम से बैंक खाते में आती है। गोशाला को मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए जन सहयोग लिया गया।
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इसका गोशाला के नाम से दूसरा खाता एचडीएफसी बैंक में दो अप्रैल 2020 को खोला गया। गोवंश के नाम पर लोगों ने दान स्वरूप खूब सहयोग किया। 350 से अधिक लोगों ने एक करोड़ दो लाख से अधिक धनराशि जमा की, जिससे गोवंशों के भरण-पोषण के साथ संसाधन भी जुटाए जाने थे। इसके अलावा गोशाला के नाम से पास में ही 60 बीघा भूमि है। इस पर धान व गेहूं की फसल की जाती है।
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पैदावार भी खूब हुई। यहीं से खेल शुरू हुआ। गोवंश का भरण-पोषण तो सरकारी धन से होता रहा, जबकि फसल से हुई अतिरिक्त आय और जन सहयोग से मिली धनराशि का बड़ा हिस्सा जिम्मेदार हजम कर गए। मोहम्मदाबाद के तत्कालीन बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने सचिव के काले कारनामों का चिट्ठा खोलकर रिपोर्ट डीडीओ को सौंप दी है।
कहां गया 10 लाख से अधिक का अनाज
डीडीओ को सौंपी जांच रिपोर्ट में बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी विनय कुमार सिंह ने आठ जनवरी 2022 तक गोशाला का संचालन किया। स्थानांतरण के बाद भी उन्होंने ग्राम विकास अधिकारी मोतीलाल को गोशाला के अभिलेख, कैश बुक, स्टाक, गोवंश रजिस्टर आदि नहीं दिए। तीन वर्ष में गोशाला की 60 बीघा भूमि पर उपजी गेहूं व धान की फसल मनमाने तरीके से बेचकर करीब 10 लाख से अधिक का गबन कर लिया गया है।
इसके अलावा गोशाला से 80 गोवंश पशुधन सहभागिता के तहत लोगों को फर्जी तरीके से देकर तस्करी कर ली गई। इसी वजह से जांच में गोवंश पशुपालकों के पास नहीं मिले। 80 गोवंशों के भरण-पोषण की धनराशि चहेतों को दिलाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बीडीओ का दावा है कि गहनता से जांच की जाए तो गोशाला में 50 लाख रुपये का गबन पकड़ा जाएगा।
प्रधान को पता नहीं, निकल गए 74 लाख
गोशाला के बैंक खाते का संचालन प्रधान व सचिव संयुक्त रूप से करते हैं। जनसहयोग की धनराशि वाले बैंक खाते की प्रधान को जानकारी तक नहीं है। इस खाते में दो वर्ष में एक करोड़ दो लाख से अधिक रुपये जमा किए गए और 74 लाख से अधिक धनराशि खर्च की जा चुकी है।
प्रधान शेर बहादुर सिंह से इस संबंध में पूछा तो वह चौंक गए। प्रधान ने बताया कि उन्हें गोशाला के दूसरे खाते ही जानकारी तक नहीं है। खाते से आखिर 74 लाख रुपये किसने निकाले। इसकी वह जांच कराएंगे।
मामला गंभीर है, गहनता से कराई जाएगी जांच
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बीडीओ की रिपोर्ट के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। फिर भी 80 गोवंश की तस्करी, तीन वर्ष की फसल का हिसाब न देना और प्रधान को बिना बताए 74 लाख रुपये खर्च किए जाने का मामला गंभीर है। इसकी गहनता से जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।