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ट्रांजिट हास्टल गोशाला में फिर मरे चार गोवंश

Mon, 25 Nov 2019 07:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 Nov 2019 07:09 PM IST
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Four cow dynasties died again in transit hostel goshala
ट्रांजिस्ट हास्टल गोशाला में खुले में खड़े अन्ना मवेशी। - फोटो : FARRUKHABAD
नगरपालिका की गोशालाओं में गोवंश के मरने का सिलसिला जारी है। फतेहगढ़ की ट्रांजिट हास्टल स्थित गोशाला में रविवार रात से लेकर सोमवार सुबह तक चार गोवंश मर गए जबकि पांच गोवंश बीमार हैं। वहां पर्याप्त टिन शेड भी नहीं हैं।
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बीमार गोवंशों को समय से इलाज भी नहीं मिल रहा है। तीन दिन से दाना न होने से गोवंश सूखा भूसा खाने को मजबूर हैं। उसमें भी चरनी न होने से कमजोर गोवंशों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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शहर में नगरपालिका की तीन गोशालाएं संचालित हैं। सर्दी शुरू होने के बावजूद किसी भी गोशाला में पर्याप्त टिनशेड नहीं हैं। इससे आधे से अधिक गोवंश खुले आसमान के नीचे सर्दी की रात बिताते हैं। फतेहगढ़ की ट्रांजिट हास्टल गोशाला में सोमवार सुबह नजारा कुछ अलग था। गेट खुला तो नगरपालिका का लोडर खड़ा था।
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कोने में टिनशेड के बाहर एक साथ तीन गोवंश मरे पड़े थे। कैमरे के फ्लैश चमकते ही कर्मचारी सन्न रह गए। दूसरी ओर दीवार के किनारे एक गोवंश का क्षत-विक्षत शव पड़ा था। उसके शरीर का आधा भाग कुत्ते नोचकर खा चुके थे। गोशाला में पांच गोवंश बीमार चल रहे हैं। बोर्ड पर लिखी 143 गोवंश की संख्या में 37 गाय, 67 सांड़ व 39 बछड़े अंकित थे।
पूछने पर कर्मचारियों ने बताया कि डाक्टर तीसरे-चौथे दिन ही आते हैं। चरनी में सूखा भूसा देख बताया कि तीन दिन से गोशाला में दाना नहीं है। इससे सूखा भूसा ही डालना पड़ता है। शाम तक दाना पहुंचने की जानकारी मिली है।
गोशाला में बिजली व रोशनी की व्यवस्था न होने से रात की ड्यूटी करने वाला कर्मचारी रुकता ही नहीं है। इसी वजह से गोवंश का शव कुत्तों ने नोच डाला। हालांकि यह सभी मृत गोवंश कटरी धर्मपुर के जंगल में ले जाकर दफना दिए जाते।
धरपकड़ अभियान के बाद भी घट रहे गोवंश
नगरपालिका की गोशालाओं में शुरुआती दौर में करीब 600 गोवंश रखने के दावे किए जा रहे थे। इसके बाद धरपकड़ अभियान के लिए 350 रुपये प्रति गोवंश का ठेका दिया गया। धरपकड़ अभियान भी जोरों पर चला। बावजूद इसके इन दिनों तीनों गोशालाओं में गोवंश की संख्या 400 भी नहीं है।
धर्मपुर कटरी गोशाला में 126, सातनपुर में 103 व ट्रांजिट हास्टल में 143 गोवंश बचे हैं। पालिका कर्मचारी विनय कुमार ने बताया कि संख्या अधिक हो जाने पर गोवंश शिफ्ट किए जाते हैं। इन दिनों करीब पौने चार सौ गोवंश बंद हैं। उन्हें गोवंश मरने की जानकारी नहीं दी गई। बीमार होने के संबंध में डाक्टर को फोन किया था, लेकिन बात नहीं हो सकी।
शिफ्टिंग के खेल में छिपाए जाते मृत गोवंश
नगरपालिका की गोशालाओं में कर्मचारी से लेकर डाक्टर तक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार होने पर गोवंश शहर से किनारे कटरी धर्मपुर स्थित गोशाला पहुंचा दिए गए। इससे मरने पर उन्हें आसानी से दफनाया जा सके। ट्रांजिट हास्टल में तो इस शिफ्टिंग के खेल में गोवंश की संख्या रोज घटती बढ़ती रहती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
नगरपालिका ईओ रश्मि भारती ने बताया कि ट्रांजिट हास्टल गोशाला में चार गोवंश कैसे मरे इसकी जांच कराई जाएगी। कर्मचारियों की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी। शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। ट्रांजिट हास्टल व सातनपुर की गोशाला को कटरी धर्मपुर गोशाला में शिफ्ट करने की योजना है। वहां टिन शेड की व्यवस्था की जा रही है।
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