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पितरों को दें जल, मिलेगा फल

Fri, 16 Sep 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद Updated Fri, 16 Sep 2016 11:33 PM IST
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Fathers to give water, get fruit
पांचालघाट पर पितरों को तर्पण के लिए जल दान करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
पितृ पक्ष को लेकर पांचाल घाट पर तर्पण करने के लिए भीड़ उमड़ी। पुरोहितों ने विधि-विधान से श्रद्घालुओं को तर्पण करवाया।
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पांचाल घाट पर तर्पण करने आने वाले लोगों की भीड़ घाटों पर लगी रही। घाटों पर मौजूद पुरोहितों ने तिल, चावल, गंगाजल, जौ, कुश से पूर्वजों का तर्पण कराया। तर्पण करने से पहले लोगों ने नया अंगौछा और जनेऊ धारण किया।

बताते हैं कि तर्पण करने के दौरान कुश का प्रयोग बेहद आवश्यक माना गया है। आचार्य योगीराज दबे (कमालगंज) ने बताया कि 30 सितंबर को पितृ पक्ष समाप्त होंगे। पिता का श्राद्घ अष्टमी और मां का श्राद्घ नवमी को करना चाहिए। अकाल मृत्यु वाले का श्राद्घ चतुर्दशी के दिन करें।
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जिन लोगों को पितरों के मरने की तिथि याद न हो वह लोग अमावस्या को श्राद्घ करें। इस दिन को सर्व पितृ श्राद्घ कहा जाता है।


मान्यता है कि अगर किसी मनुष्य का विधि पूर्वक श्राद्घ व तर्पण न किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती है। पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष कहते हैं।
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