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फर्रुखाबाद: इंस्पेक्टर की हत्या के मामले में बसपा नेता के घर कुर्की, 25 वर्ष पहले हुई थी घटना, ये है पूरा मामला

Tue, 13 Jul 2021 10:10 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उाजला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उाजला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 13 Jul 2021 10:10 PM IST
सार

सीओ अमृतपुर अजेय कुमार शर्मा मंगलवार को देर शाम अनुपम दुबे के घर से बाहर निकले। उन्होंने बताया कि जीआरपी इंस्पेक्टर कानपुर ने अनुपम से जुड़े सभी सामान की सूची बना ली है। बसपा नेता का सम्मिलित परिवार है इसलिए भाई व भतीजों की संपत्ति को कार्रवाई से दूर रखा जाएगा। इस प्रक्रिया को करने में समय लगेगा।

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Farrukhabad: Attachment of BSP leader's house in the murder of Inspector
मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले में रावतपुर स्टेशन पर करीब 25 वर्ष पहले हुई इंस्पेक्टर की हत्या में फरार चल रहे बसपा नेता के घर कुर्की के लिए कई जनपदों की जीआरपी पहुंची। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जाकर हाईकोर्ट का स्टे बताकर कुर्की का विरोध किया। इस पर सीओ से नोकझोंक हो गई।  
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मंगलवार को जीआरपी सीओ हरीश चंद्रा कई थानों की पुलिस के साथ फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी बसपा नेता व वकील डॉ. अनुपम दुबे की गली में पहुंचे। कुछ देर में फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल भी फोर्स लेकर पहुंच गए। पुलिस ने बसपा नेता के आवास को घेर लिया।
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सीओ ने बताया कि लगभग 25 वर्ष पहले कानपुर के रावतपुर स्टेशन पर इंस्पेक्टर रामनिवास यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में डॉ. अनुपम दुबे फरार है। कानपुर कोर्ट से उसकी कुर्की का आदेश सात जुलाई को किया गया है। इस पर कार्रवाई की जा रही। 
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जानकारी पर बार एसोसिएशन के सचिव संजीव पारिया, वकील सोनू मिश्रा, पंकज मिश्रा, दीपक द्विवेदी, अनूप, टिल्लू अग्निहोत्री आदि अधिवक्ता पहुंच गए। सचिव संजीव पारिया ने एक ही दिन में कुर्की नोटिस चस्पा करने व कुर्की का आदेश देखकर अचरज जाहिर किया।

उन्होंने अनुपम दुबे की ओर से 2 अगस्त तक का हाईकोर्ट का स्टे दिखाया। इस पर सीओ ने कहा कि कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्टे को संज्ञान में लेने के बाद यह कार्रवाई की है। इस पर वकीलों की जीआरपी सीओ व अन्य लोगों से तीखी नोकझोंक हुई। 

सीओ हरीश चंद्रा ने इसकी जानकारी एसपी जीआरपी आगरा को दी। जीआरपी एसपी ने एसपी अशोक कुमार मीणा सहित उच्चाधिकारियों से संपर्क किया। कुछ देर बाद एएसपी अजय प्रताप, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक मौर्या, शहर कोतवाल वेद प्रकाश पांडेय, मऊदरवाजा एसओ  अजय नारायण सिंह भी फोर्स को लेकर पहुंच गए।

संजीव पारिया कोर्ट में काम की बात कहकर चले गए। पुलिस ने इसके बाद आसपास खड़े सभी लोगों को गली के बाहर कर दिया। जीआरपी सीओ अनुपम के आवास में फोर्स के साथ घुस गए। वहां सामान कब्जे मेें लेने के लिए शाम सात बजे तक सूची बनाने का काम चलता रहा। 

अनुपम दुबे से जुड़ा सामान कुर्क होगा
सीओ अमृतपुर अजेय कुमार शर्मा मंगलवार को देर शाम अनुपम दुबे के घर से बाहर निकले। उन्होंने बताया कि जीआरपी इंस्पेक्टर कानपुर ने अनुपम से जुड़े सभी सामान की सूची बना ली है। बसपा नेता का सम्मिलित परिवार है इसलिए भाई व भतीजों की संपत्ति को कार्रवाई से दूर रखा जाएगा। इस प्रक्रिया को करने में समय लगेगा। रात में पुलिस उनके आवास पर तैनात रहेगी। सुबह उनका सामान कुर्क कर ले जाया जाएगा।

ढोल मंगवाकर गली में कराई मुनादी
डॉ. अनुपम दुबे के घर पर जीआरपी कानपुर ने कुर्की नोटिस चस्पा करने के बाद ढोल मंगवाकर गलियों में मुनादी कराई।  

पुलिस ने लोगों के दरवाजे खिड़कियां बंद कराए
जीआरपी व लोकल पुलिस ने गली के अंदर सभी मकानों के दरवाजे व खिड़कियां बंद करवा दीं। लोगों से अपने घरों में रहने की अपील की। बसपा नेता के आवास की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस लाइन से फोर्स मंगवाकर तैनात कर दिया गया।

अमीनगर सराय के रहने वाले थे पुलिस इंस्पेक्टर 
चार मई 1996 को पैसेंजर ट्रैन के गार्ड आरके बाजपेयी ने जीआरपी थाना अनवरंगज कानपुर में सूचना दी कि बोगी में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। शव की शिनाख्त जनपद मेरठ (अब बागपत) के थाना अमीनगर सराय के गांव लाहौर सराय निवासी पुलिस इंस्पेक्टर रामनिवास यादव के रूप में की गई। जीआरपी थाने में दर्ज मुकदमे में  विवेचना में नेम कुमार बिलइया, अनुपम दुबे व कौशल दुबे के नाम प्रकाश में आए थे। 24 जुलाई 1996 को तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें नेम कुमार बिलइया मुठभेड़ में मारा गया था। वहीं कौशल दुबे की बाद में मौत हो गई थी।
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