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किसानों ने मक्का की जगह बोई मूंगफली
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:03 AM IST
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किलमापुर गांव में मूंगफली के खेत में निराई करता किसान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जायद की फसल में गत वर्ष बोई गई मूंगफली में अधिक लाभ होने पर किसानों ने मक्का का फसल चक्र बदल दिया है। अब आलू खुदने के बाद मक्का की धरती पर मूंगफली की फसल लहलाएगी। पिछले कई सालों से आलू में पड़ रहे घाटे को पूरा करने के लिए यहां के किसान जायद की फसल के समय मक्का पैदा करके घाटा पूरा कर रहे थे। पिछले वर्ष चौकी महमदपुर के प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप ने मक्का के साथ मूंगफली की भी फसल उगाई। एक-एक बीघा तैयार की गई मक्का और मूंगफली में मूंगफली के दाम मक्का की अपेक्षा ज्यादा मिले।
मक्का की फसल में नारद सिंह को 5400 रुपया एक बीघा में शुद्ध लाभ हुआ। जबकि, मूंगफली की फसल में 5800 रुपया शुद्ध लाभ हुआ। मक्का में लगने वाले रोगों से छुटकारा पाने और आलू का घाटा निकालने के लिए इस बार गर्मी की सीजन में किसानों ने तकरीबन 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की बुवाई कर दी है। हार्डिकल्चर निरीक्षक एपी सेंगर ने बताया कि मूंगफली की फसल पैदा होने पर किसानों को जब लाभ हुआ तो मक्का का क्षेत्रफल कम करके 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की फसल तैयार कराने की कार्ययोजना बनाई गई। बुवाई अभी जारी है। मूंगफली में अधिक लाभ होने से किसानों ने जायद की मक्का का फसल चक्र बदला है।
किस तरह आलू में हुआ किसान को घाटा
आलू की फसल एक बीघा खेत में तैयार करने पर 1500 रुपये की खाद, 400 की दवा, 300 की लेबर, 500 रुपये जुताई, 500 रुपये की सिंचाई, 4200 रुपये डीजल व 300 रुपये अन्य खर्चे आते हैं। कुल मिलाकर 7700 रुपया लागत का लगता है और 25 क्विंटल आलू पैदा होने से 6250 रुपये के दाम किसान को मिल पाए हैं। 1450 रुपया प्रति बीघा किसान को घाटा हो रहा है।
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मक्का की फसल में नारद सिंह को 5400 रुपया एक बीघा में शुद्ध लाभ हुआ। जबकि, मूंगफली की फसल में 5800 रुपया शुद्ध लाभ हुआ। मक्का में लगने वाले रोगों से छुटकारा पाने और आलू का घाटा निकालने के लिए इस बार गर्मी की सीजन में किसानों ने तकरीबन 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की बुवाई कर दी है। हार्डिकल्चर निरीक्षक एपी सेंगर ने बताया कि मूंगफली की फसल पैदा होने पर किसानों को जब लाभ हुआ तो मक्का का क्षेत्रफल कम करके 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली की फसल तैयार कराने की कार्ययोजना बनाई गई। बुवाई अभी जारी है। मूंगफली में अधिक लाभ होने से किसानों ने जायद की मक्का का फसल चक्र बदला है।
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किस तरह आलू में हुआ किसान को घाटा
आलू की फसल एक बीघा खेत में तैयार करने पर 1500 रुपये की खाद, 400 की दवा, 300 की लेबर, 500 रुपये जुताई, 500 रुपये की सिंचाई, 4200 रुपये डीजल व 300 रुपये अन्य खर्चे आते हैं। कुल मिलाकर 7700 रुपया लागत का लगता है और 25 क्विंटल आलू पैदा होने से 6250 रुपये के दाम किसान को मिल पाए हैं। 1450 रुपया प्रति बीघा किसान को घाटा हो रहा है।
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