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एफआर निरस्त, पुन: विवेचना के आदेश
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:10 PM IST
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ कर युवक को पकड़कर ले जाने के बाद उसके साथ कुकर्म किए जाने के मामले में लगाई गई एफआर को खारिज कर दिया है। मऊदरवाजा थानाध्यक्ष को दोबारा विवेचना करने का आदेश दिया है। इस मुकदमे में दो सिपाही समेत छह लोग आरोपी बनाए गए थे।
मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव अदुउली निवासी सतेंद्र कुमार गुप्ता, जितेंद्र कुमार गुप्ता, अभिषेक गुप्ता उर्फ शिवम, हथियापुर निवासी लालाराम पाल, मऊदरवाजा थाने के सिपाही धर्मेंद्र कुमार यादव, सिपाही धीरेंद्र कुमार के खिलाफ 23 नवंबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित की जमीन मुख्य मार्ग पर है।
इसको लेकर सतेंद्र कुमार गुप्ता से मुकदमेबाजी चल रही थी। 23 अक्तूबर 2015 को शाम 6 बजे सभी आरोपी घर में घुस आए और मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने लगे। पौत्र को घर में बंधक बना लिया और अपने साथ ले गए। पीड़ित ने अदालत में याचिका दायर की। कोर्ट के आदेश पर मऊदरवाजा थानाध्यक्ष ने रिपोर्ट दर्ज की
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। जांच के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर आरोपियों को क्लीन चिट दें दी। पीड़ित ने इसके विरोध में अदालत में अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा के माध्यम से प्रार्थना पत्र दिया। आरोप है कि उसके, चश्मदीद गवाह के विवेचक ने बयान दर्ज नहीं किए। जो शपथ पत्र एसपी को दिए गए, उनको भी विवेचक ने जांच में शामिल किए बगैर मुकदमे में एफआर लगा दी
। सीजेएम ने सुनवाई के बाद लगाई गई एफआर को खारिज कर मऊदरवाजा थानाध्यक्ष को दोबारा से विवेचना करने का आदेश दिया है।
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मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव अदुउली निवासी सतेंद्र कुमार गुप्ता, जितेंद्र कुमार गुप्ता, अभिषेक गुप्ता उर्फ शिवम, हथियापुर निवासी लालाराम पाल, मऊदरवाजा थाने के सिपाही धर्मेंद्र कुमार यादव, सिपाही धीरेंद्र कुमार के खिलाफ 23 नवंबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित की जमीन मुख्य मार्ग पर है।
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इसको लेकर सतेंद्र कुमार गुप्ता से मुकदमेबाजी चल रही थी। 23 अक्तूबर 2015 को शाम 6 बजे सभी आरोपी घर में घुस आए और मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने लगे। पौत्र को घर में बंधक बना लिया और अपने साथ ले गए। पीड़ित ने अदालत में याचिका दायर की। कोर्ट के आदेश पर मऊदरवाजा थानाध्यक्ष ने रिपोर्ट दर्ज की
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। जांच के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर आरोपियों को क्लीन चिट दें दी। पीड़ित ने इसके विरोध में अदालत में अधिवक्ता विजय कुमार शर्मा के माध्यम से प्रार्थना पत्र दिया। आरोप है कि उसके, चश्मदीद गवाह के विवेचक ने बयान दर्ज नहीं किए। जो शपथ पत्र एसपी को दिए गए, उनको भी विवेचक ने जांच में शामिल किए बगैर मुकदमे में एफआर लगा दी
। सीजेएम ने सुनवाई के बाद लगाई गई एफआर को खारिज कर मऊदरवाजा थानाध्यक्ष को दोबारा से विवेचना करने का आदेश दिया है।