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Farrukhabad News: बचकर निकलिए...हाईवे घेरकर खड़े रहते हैं वाहन
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फोटो-3 सेंट्रल जेल चौकी के बाहर खड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार। संवाद
फर्रुखाबाद। इटावा-बरेली हाईवे पर ट्रक, बस, रिकवरी क्रेन और दुर्घटनाग्रस्त वाहन कई स्थानों पर बिना रोक-टोक के सड़क घेरकर खड़े रहते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के इनसे टकराने का हर पल खतरा बना रहता है। फिर भी पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को यह समस्या दिखाई नहीं पड़ती।
सेंट्रल जेल पुलिस चौकी के बाहर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की कतार लगना आम बात है। कुछ दूरी पर रिकवरी वाहन और क्रेन भी सड़क किनारे खड़े रहते हैं। एआरटीओ कार्यालय के बाहर फिटनेस के लिए आने वाले भारी वाहन आधी सड़क घेर लेते हैं। इससे अन्य वाहन चालकों को जोखिम उठाकर निकलना पड़ता है। नेकपुर पुल और मसेनी चौराहे पर निजी बसें सवारियां भरने के लिए सड़क पर ही खड़ी रहती हैं। डिवाइडर और किनारे खड़े वाहनों से सड़क पर चलने के लिए आधी जगह भी नहीं बचती। रात में पर्याप्त रोशनी न होने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मोहम्मदाबाद क्षेत्र में भी भारी वाहनों की हाईवे पर पार्किंग आम बात है।
यातायात प्रभारी सतेंद्र सिंह ने कहा कि हाईवे पर गश्त के दौरान सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाया जाता है। यदि कहीं अनधिकृत पार्किंग मिलती है तो संबंधित वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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दोपहिया सवार सबसे ज्यादा बन रहे हादसों का शिकार
कलक्ट्रेट सभागार में जून में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने बताया था कि वर्ष 2026 में मई तक जिले में 214 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। 140 हादसों में कम से कम एक दोपहिया वाहन शामिल था। इन दुर्घटनाओं में 80 दोपहिया सवारों की मौत हुई, जबकि 119 लोग घायल हुए। कुल सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 65.42 प्रतिशत और मृतकों में उनकी संख्या 58.82 प्रतिशत रही। वहीं 27 हादसे ऐसे थे, जिनमें दोनों वाहन दोपहिया थे, इनमें 16 लोगों की मौत और 27 लोग घायल हुए।
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सेंट्रल जेल पुलिस चौकी के बाहर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की कतार लगना आम बात है। कुछ दूरी पर रिकवरी वाहन और क्रेन भी सड़क किनारे खड़े रहते हैं। एआरटीओ कार्यालय के बाहर फिटनेस के लिए आने वाले भारी वाहन आधी सड़क घेर लेते हैं। इससे अन्य वाहन चालकों को जोखिम उठाकर निकलना पड़ता है। नेकपुर पुल और मसेनी चौराहे पर निजी बसें सवारियां भरने के लिए सड़क पर ही खड़ी रहती हैं। डिवाइडर और किनारे खड़े वाहनों से सड़क पर चलने के लिए आधी जगह भी नहीं बचती। रात में पर्याप्त रोशनी न होने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मोहम्मदाबाद क्षेत्र में भी भारी वाहनों की हाईवे पर पार्किंग आम बात है।
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यातायात प्रभारी सतेंद्र सिंह ने कहा कि हाईवे पर गश्त के दौरान सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाया जाता है। यदि कहीं अनधिकृत पार्किंग मिलती है तो संबंधित वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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दोपहिया सवार सबसे ज्यादा बन रहे हादसों का शिकार
कलक्ट्रेट सभागार में जून में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने बताया था कि वर्ष 2026 में मई तक जिले में 214 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। 140 हादसों में कम से कम एक दोपहिया वाहन शामिल था। इन दुर्घटनाओं में 80 दोपहिया सवारों की मौत हुई, जबकि 119 लोग घायल हुए। कुल सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 65.42 प्रतिशत और मृतकों में उनकी संख्या 58.82 प्रतिशत रही। वहीं 27 हादसे ऐसे थे, जिनमें दोनों वाहन दोपहिया थे, इनमें 16 लोगों की मौत और 27 लोग घायल हुए।

फोटो-3 सेंट्रल जेल चौकी के बाहर खड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार। संवाद

फोटो-3 सेंट्रल जेल चौकी के बाहर खड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार। संवाद

फोटो-3 सेंट्रल जेल चौकी के बाहर खड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार। संवाद