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प्रमाणपत्र बनवाने को सीएमओ कार्यालय में दिव्यांगों की भीड़
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प्रमाणपत्र के लिए उमड़े दिव्यांग
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित सीएमओ कार्यालय में सोमवार को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सुबह से दिव्यांगों की भीड़ लग गई। ईएनटी सर्जन न होने से दिव्यांगों को बिना जांच कराए ही वापस जाना पड़ा।
कोरोना के चलते सीएमओ कार्यालय में अप्रैल से दिव्यांग बोर्ड नहीं लग रहा था। इससे करीब ढाई माह तक दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सके। पिछले सोमवार को बोर्ड की जानकारी न होने से कम दिव्यांग ही पहुंचे थे। अब अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो गईं हैं।
इससे दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय में सुबह से ही भीड़ पहुंचने लगी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकांत, आई सर्जन डॉ. सर्वेश यादव दिव्यांग बोर्ड पहुंचे। बोर्ड में ईएनटी सर्जन न होने से पैनल पूरा नहीं हो सका।
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हालांकि हड्डी रोग व आंख संबंधी दिव्यांगता की जांच के लिए डॉक्टरों ने परीक्षण किया। वहीं मूकबधिर व सुनने की कम क्षमता वालों की जांच नहीं हो सकी। दोपहर बाद तक इंतजार करने के बाद आखिर दूरदराज से आए दिव्यांग बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही लौट गए।
बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 36 आवेदन जमा किए गए। ईएनटी सर्जन न होने से दो दिव्यांगों को जांच रिपोर्ट लगाने के लिए कानपुर को रेफर किया गया है।
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फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित सीएमओ कार्यालय में सोमवार को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सुबह से दिव्यांगों की भीड़ लग गई। ईएनटी सर्जन न होने से दिव्यांगों को बिना जांच कराए ही वापस जाना पड़ा।
कोरोना के चलते सीएमओ कार्यालय में अप्रैल से दिव्यांग बोर्ड नहीं लग रहा था। इससे करीब ढाई माह तक दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सके। पिछले सोमवार को बोर्ड की जानकारी न होने से कम दिव्यांग ही पहुंचे थे। अब अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो गईं हैं।
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इससे दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय में सुबह से ही भीड़ पहुंचने लगी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकांत, आई सर्जन डॉ. सर्वेश यादव दिव्यांग बोर्ड पहुंचे। बोर्ड में ईएनटी सर्जन न होने से पैनल पूरा नहीं हो सका।
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हालांकि हड्डी रोग व आंख संबंधी दिव्यांगता की जांच के लिए डॉक्टरों ने परीक्षण किया। वहीं मूकबधिर व सुनने की कम क्षमता वालों की जांच नहीं हो सकी। दोपहर बाद तक इंतजार करने के बाद आखिर दूरदराज से आए दिव्यांग बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही लौट गए।
बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 36 आवेदन जमा किए गए। ईएनटी सर्जन न होने से दो दिव्यांगों को जांच रिपोर्ट लगाने के लिए कानपुर को रेफर किया गया है।